जीवन
निकोलूदी ने कूला प्रात्सिका से नृत्य शुरू किया और एथेंस संगीतविद्यालय में पियानो तथा उच्च संगीत-सिद्धांत पढ़े। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ज़्यूरिख़ की अंतरराष्ट्रीय नृत्य कार्यशाला में उनका परिचय प्रमुख यूरोपीय कलाकारों से हुआ। उन्होंने एकल प्रस्तुतियाँ दीं और प्रात्सिका के कलात्मक दायरे में काम किया। इसी दौरान संगीत की अभिव्यक्ति और शरीर की गति का वह संबंध विकसित हुआ जिसका वर्णन उन्होंने बाद के साक्षात्कारों में किया।
उन्होंने कारो्लोस कून के कला रंगमंच, राष्ट्रीय रंगमंच, राष्ट्रीय ओपेरा और अन्य मंचों से सहयोग किया। 1966 में संगीतकार निकीफोरोस रोतास के साथ खोरिका की स्थापना की। मंडली ने स्वर, संगीत और गति की संयुक्त अभ्यास-पद्धति बनाई। शिक्षण उनके काम का महत्वपूर्ण भाग रहा: प्रात्सिका के विद्यालय और उसके उत्तराधिकारी राजकीय नृत्य विद्यालय में पढ़ाया तथा बाद वाले की अध्यक्ष भी रहीं। 1995 के प्रथम कालामाता अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव के लिए खोरिका फिर सक्रिय हुई, जिससे उनका काम दोबारा जनता तक पहुँचा। 17 दिसंबर 2004 को एथेंस में उनका निधन हुआ। उनका जीवन प्रदर्शन, नृत्य-रचना और साथ सुनने, बोलने व चलने वाले समूह के धैर्यपूर्ण प्रशिक्षण को जोड़ता है।
कृतियाँ

1956 में माइसीनी का भाग्य के समूहों की गति में सहयोग उनके शुरुआती मंचीय कार्यों में था। फिर कला रंगमंच में अरिस्तोफानेस के पक्षी के 1962 संस्करण की महत्वपूर्ण नृत्य-रचना की। कून का निर्देशन, हाजिदाकिस का संगीत और त्सारूखिस की दृश्य-रचना इसमें एकत्र हुए; पेरिस में थिएटर ऑफ नेशंस ने प्रस्तुति को मान्यता दी। निकोलूदी की गति इस साझा रंगभाषा का हिस्सा थी।
1966 में स्थापित खोरिका ने कोरस अंशों पर उनके शोध को निरंतर रूप दिया। कलाकार सामूहिक नाटकीय स्वर के लिए वाणी, संगीत और गति का प्रशिक्षण लेते थे। ये समकालीन अभ्यास से बनी प्राचीन ग्रंथों की आधुनिक कलात्मक व्याख्याएँ थीं। बैले में भी काम हुआ: राष्ट्रीय ओपेरा 1978 की जेनेसिस और 1993 की सिम्फनी संख्या 7 दर्ज करता है, दोनों हेरोदेस अत्तिकुस रंगमंच में। कालामाता में 1995 की वापसी और सुरक्षित फ़िल्मों से बाद के दर्शक उनकी शैली से मिले। शरीर से गाने की साक्षात्कार वाली छवि गति में संगीत-शिक्षा की मौजूदगी समझाती है। उनके शब्द निजी कलात्मक अनुभव बताते और उनकी यूनानी वाणी तक छोटा सहायक मार्ग खोलते हैं।
आज के यूनान में विरासत
उनका काम संबंधित शब्द अलग करना सिखाता है: χορός नृत्य और नाटक में कोरस है; χορικό कोरस का अंश है। ये अर्थ भाषा को समूह-अभ्यास से जोड़ते हैं। महोत्सव और प्रसारण अभिलेख इसके चिह्न रखते हैं।
«Η ομάδα μιλά με μία φωνή» पहले अकेले, फिर किसी के साथ पढ़ें। एक शब्द पर ज़ोर देकर असर का बदलाव बताएँ। χορός से दो यूनानी वाक्य लिखें: एक गति, दूसरा नाटकीय समूह पर। उद्धरण संगीत और शरीर पर उनके अपने आधुनिक यूनानी शब्द देता है। B1 सरल पाठ और इन निर्देशित बोलने तथा शब्दावली अभ्यासों का स्तर है।
क्या आप जानते हैं?
- उन्होंने 1966 में निकीफोरोस रोतास के साथ खोरिका बनाई।
- पक्षी की नृत्य-रचना 1962 की प्रस्तुति की है।
- खोरिका 1995 के प्रथम कालामाता महोत्सव में आई।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Μοίρα των Μυκηνών — συνεργασία στην κίνηση ομάδων | माइसीनी का भाग्य — समूह-गति में सहयोग | 1956 |
| Όρνιθες — χορογραφία | पक्षी — नृत्य-निर्देशन | 1962 |
| Χορικά — ίδρυση ομάδας | खोरिका — मंडली की स्थापना | 1966 |
| Γένεση — χορογραφία | जेनेसिस — नृत्य-निर्देशन | 1978 |
| Συμφωνία αρ. 7 — χορογραφία | सिम्फनी संख्या 7 — नृत्य-निर्देशन | 1993 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Αισθανόμουν την ανάγκη να τραγουδήσω με το σώμα μου σαν ένα τρίτο όργανο
Aisthanómoun tin anánki na tragoudíso me to sóma mou san éna tríto órgano
मुझे अपने शरीर से तीसरे वाद्य की तरह गाने की आवश्यकता महसूस होती थी
















































































































