जीवन
फ्रीदा लिआप्पा का जन्म 1948 में मेसिनी में हुआ। 1965 में उन्होंने एथेंस विश्वविद्यालय में साहित्य पढ़ना शुरू किया और छात्र राजनीति में सक्रिय हुईं। सैन्य तानाशाही के दौरान 1968 में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया; सज़ा के साथ विश्वविद्यालय से भी निकाल दिया गया। साहित्यिक रुचि, राजनीतिक अनुभव और फिल्मों से गहरा जुड़ाव उनकी पृष्ठभूमि के अंग थे।
1972 में उन्होंने पांतेलिस वूलगारिस की Το προξενιό της Άννας (आन्ना की सगाई) में निरंतरता की देखरेख की। उसी साल Μετά σαράντα μέρες (चालीस दिन बाद) का निर्देशन किया। 1973 में वे सिनेमा पढ़ने लंदन गईं और 1974 में यूनान लौटीं। आगे फिल्में बनाने के साथ समीक्षा लिखीं और Σύγχρονος Κινηματογράφος (समकालीन सिनेमा) की संपादकीय समिति में रहीं। फिल्मों पर लिखना और उन्हें बनाना साथ-साथ विकसित हुए।
उनकी पहली फीचर फिल्म 1981 में आई, फिर 1986 और 1991 में दो और आईं। टेलीविजन में ERT के वृत्तचित्र भी उनके काम का हिस्सा थे। 1985 का आल्की ज़ेई व्यक्तिचित्र लेखिका की यादों और पुस्तकों से उनके संबंध को देखता है। लिआप्पा ने कविता और गद्य भी लिखा। 1994 में उनका निधन हुआ। उनके विविध काम को साथ देखना चाहिए, केवल फीचर फिल्मों तक सीमित नहीं करना चाहिए।
कृतियाँ

Μια ζωή σε θυμάμαι να φεύγεις (तुम्हें हमेशा जाते हुए याद करती हूँ, 1977) तानाशाही के बाद के एथेंस में वामपंथी पत्रकार और रंगमंच छोड़ चुके अभिनेता की कहानी है। चवालीस मिनट में निजी संबंध, राजनीतिक निराशा और कलात्मक अनिश्चितता जुड़ते हैं। यूनानी फिल्म अभिलेखागार इसे सार्वजनिक प्रतिबद्धताओं और निजी जीवन के बीच रास्ता खोजती पेशेवर महिलाओं की पीढ़ी का चित्र बताता है।
Οι δρόμοι της αγάπης είναι νυχτερινοί (प्रेम के रास्ते रात के हैं, 1981) दो बहनों और लौटते चचेरे भाई पर केंद्रित है। खुले सिनेमाघर की ओर दिखने वाला घर बंद घरेलू जगह को दूसरे पर्दे से जोड़ता है। उस समय के साक्षात्कार में लिआप्पा कहती हैं कि कुछ सपनों को चित्रों में बदलने के बजाय मौखिक वर्णन रखा। काव्यात्मक और यथार्थवादी तत्वों की चर्चा खास तौर पर यूनानी संवाद की भाषा और अदायगी से जुड़ी है।
Ήταν ένας ήσυχος θάνατος (वह एक शांत मृत्यु थी, 1986) और Τα χρόνια της μεγάλης ζέστης (बड़ी गर्मी के साल, 1991) उनकी फीचर फिल्मों को पूरा करते हैं। वृत्तचित्र अलग ध्यान माँगते हैं। Γυναικεία πορτραίτα: Άλκη Ζέη (स्त्री व्यक्तिचित्र: आल्की ज़ेई, 1985) में बचपन और कब्ज़े के समय के नाटक की यादें लेखन के अनुभव से मिलती हैं। साहित्य केवल रूपांतरण का विषय नहीं, लेखिका द्वारा समझाया गया जिया हुआ काम बनता है।
आज के यूनान में विरासत
थेसालोनिकी के वेयरहाउस D में एक सिनेमाघर लिआप्पा के नाम पर है। संरक्षण से फिल्में नए अध्ययन के लिए बचती हैं: यूनानी फिल्म अभिलेखागार ने Μια ζωή σε θυμάμαι να φεύγεις का 4K पुनर्स्थापन किया और ERT उनके टेलीविजन काम का दस्तावेज़ देता है।
B1 के सहायक अभ्यास के लिए ERT का Γυναικεία πορτραίτα: Άλκη Ζέη खोलें। भाषा संबंधी मदद से छोटा अंश सुनकर बचपन की एक याद और लेखन की एक बात पहचानें। यूनानी विवरण संदर्भ देता है। फिर तीन संकेतों से अपनी याद सुनाएँ: πού, “कहाँ”; με ποιον, “किसके साथ”; τι έκανα, “मैंने क्या किया”। सरल पाठ नमूना देता है। फीचर फिल्मों का काव्यात्मक संवाद अलग और अधिक कठिन श्रवण अनुभव है।
क्या आप जानते हैं?
- 1972 में वे आन्ना की सगाई की निरंतरता प्रभारी थीं।
- 1977 की पुनर्स्थापित फिल्म 44 मिनट की है, पूरी फीचर फिल्म नहीं।
- 1985 का आल्की ज़ेई ERT व्यक्तिचित्र बचपन की यादों को पुस्तक रचना से जोड़ता है।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Μετά σαράντα μέρες | चालीस दिन बाद | 1972 |
| Μια ζωή σε θυμάμαι να φεύγεις | तुम्हें हमेशा जाते हुए याद करती हूँ | 1977 |
| Απεταξάμην | मैंने त्याग दिया है | 1980 |
| Οι δρόμοι της αγάπης είναι νυχτερινοί | प्रेम के रास्ते रात के हैं | 1981 |
| Ήταν ένας ήσυχος θάνατος | वह एक शांत मृत्यु थी | 1986 |
| Τα χρόνια της μεγάλης ζέστης | बड़ी गर्मी के साल | 1991 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
ποιητικά και ρεαλιστικά στοιχεία συνυπάρχουν
poiitiká kai realistiká stoicheía synypárchoun
काव्यात्मक और यथार्थवादी तत्व साथ मौजूद हैं।
















































































































