जीवन
समाराकिस का जन्म 16 अगस्त 1919 को एथेंस में हुआ। उन्होंने एथेंस विश्वविद्यालय में क़ानून पढ़ा और 1935 में, जब वे अभी छात्र ही थे, श्रम मंत्रालय में नौकरी शुरू की, जहाँ एक अंतराल को छोड़कर वे 1963 तक सरकारी कर्मचारी रहे। वह अंतराल था क़ब्ज़े का दौर: 1944 में उन्होंने इस्तीफ़ा दिया, प्रतिरोध आंदोलन में भाग लिया, जर्मनों ने उन्हें गिरफ़्तार कर मौत की सज़ा सुनाई, और वे भाग निकले। सत्ता की मशीन में फँसे एक अकेले इंसान का यही अनुभव उनके पूरे लेखन का विषय बन गया।
उन्होंने देर से, पैंतीस वर्ष की आयु में, कहानी-संग्रह «Ζητείται ελπίς» (आशा चाहिए, 1954) से प्रकाशन शुरू किया, और उनका लेखन कम ही रहा: आधी सदी में कहानियों के तीन संग्रह और तीन उपन्यास। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अन्य संस्थाओं के लिए उन्होंने बहुत यात्राएँ कीं, ख़ासकर अफ़्रीका और मध्य पूर्व में। जब «Το λάθος» ने उन्हें विदेश में प्रसिद्ध कर दिया, तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी और लेखन से जीविका चलाने लगे।
अपने अंतिम दशकों में वे एक दुर्लभ तरह की सार्वजनिक हस्ती थे: एक ऐसे लेखक जिन्हें युवा पसंद करते थे। 1989 से वे यूनान के लिए यूनिसेफ़ के सद्भावना दूत रहे, नशे के ख़िलाफ़ अभियान चलाया और यूनानी युवा संसद (Βουλή των Εφήβων) के प्रेरणास्रोत बने, जिसकी पहली बैठक 1990 के दशक के मध्य में हुई। 8 अगस्त 2003 को, अपने चौरासीवें जन्मदिन से एक सप्ताह पहले, पिलोस में उनका निधन हुआ; उन्होंने अपना शरीर एथेंस विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल को दान कर दिया था।
कृतियाँ

«Ζητείται ελπίς» (1954), «Σήμα κινδύνου» (ख़तरे का संकेत, 1959, एक लघु उपन्यास) और «Αρνούμαι» (मैं इनकार करता हूँ, 1961, जिसे कहानी के लिए राजकीय पुरस्कार मिला) के पात्र एक जैसे हैं: एक क्लर्क, कैफ़े में बैठा एक अकेला आदमी, एक बच्चा, एक मज़दूर, एक ऐसे शहर के बेनाम लोग जो उन्हें देखता ही नहीं। कुछ छोटा-सा घटता है, एक फ़ोन कॉल, एक चिट्ठी, अख़बार की एक सुर्ख़ी, और उससे डर, अकेलापन या दया का कोई अनपेक्षित काम सामने आता है। «Το ποτάμι» (नदी), जिसमें एक सैनिक आदेश तोड़कर दो मोर्चों के बीच बहती नदी में तैरने जाता है और वहाँ वही करते एक दुश्मन सैनिक से मिलता है, वह कहानी है जो यूनानी छात्रों को याद रहती है।
«Το λάθος» (भूल, 1965) ने इसी सामग्री को एक राजनीतिक थ्रिलर में बदल दिया। शासन द्वारा चलाए जा रहे एक बेनाम देश में, कैफ़े में बैठा एक आदमी एक मामूली-सी चूक करता है और दो एजेंट उसे गिरफ़्तार कर लेते हैं। राजधानी की लंबी यात्रा में एक एजेंट को आदेश है कि वह उससे दोस्ती करे ताकि वह ख़ुद को उजागर कर दे; पर इसके बजाय एजेंट की अपनी इंसानियत उस पर हावी हो जाती है, और किताब की आख़िरी «भूल» क़ैदी की नहीं, बल्कि उसकी अपनी है। ठंडे, लगभग वृत्तचित्र जैसे वाक्यों में, 1967 के कर्नलों के तख़्तापलट से दो साल पहले लिखी गई यह किताब यूनान में एक भविष्यवाणी की तरह पढ़ी गई। 1975 में पीटर फ़्लाइशमान ने मिशेल पिकोली और ऊगो तोन्याज़ी के साथ इस पर फ़िल्म बनाई।
बाद में «Το διαβατήριο» (पासपोर्ट, 1973) आया, तानाशाही के दौर में लिखी कहानियाँ, और उपन्यास «Εν ονόματι» (के नाम पर, 1998)। उनकी शैली कभी नहीं बदली: छोटे वाक्य, दोहराव, कोई रूपक नहीं, अख़बार की शब्दावली। यह सादगी एक चुनाव है: वे आलोचक नहीं, साधारण पाठक चाहते थे, और उन्हें वे मिले।
आज के यूनान में विरासत
समाराकिस उन गिने-चुने आधुनिक यूनानी गद्य लेखकों में हैं जिन्हें छात्र सचमुच पढ़ते हैं: «Το ποτάμι» और अन्य कहानियाँ लाइसियम के संकलनों में हैं, और «Το λάθος» अक्सर यूनानी किशोरों का पहला वयस्क उपन्यास होता है, जैसा कि किसी शिक्षार्थी के लिए भी हो सकता है, क्योंकि इसकी यूनानी सरल है और कथानक आपको बाँधे रखता है। «ζητείται ελπίς» वाक्यांश किताब से निकलकर एक आम सुर्ख़ी बन गया है, जब भी यूनान उदास महसूस करता है। उनकी प्रेरणा से बनी युवा संसद आज भी हर साल यूनानी संसद के सभागार में मिलती है, जिसमें हर क्षेत्र और प्रवासी समुदाय के छात्रों के लिए सीटें होती हैं। विदेश में उनकी ख्याति भूल पर टिकी है, जो अंग्रेज़ी, फ़्रांसीसी, जर्मन और दर्जनों अन्य भाषाओं में उपलब्ध है, अक्सर अपराध-कथा की शेल्फ़ पर, जहाँ यह कुछ असहज-सी लगती है।
क्या आप जानते हैं?
- «Το λάθος» ने 1970 में फ़्रांस में Grand Prix de Littérature Policière जीता, जो अपराध-कथा का पुरस्कार है, हालाँकि समाराकिस ज़ोर देते थे कि यह मानवीय गरिमा के बारे में किताब है।
- उन्होंने अपनी पहली किताब पैंतीस साल की उम्र में प्रकाशित की और अगले पचास वर्षों में बस गिनी-चुनी और; उनका पूरा लेखन एक छोटी-सी शेल्फ़ पर समा जाता है।
- उन्होंने अपना शरीर विज्ञान को दान किया: 2003 में उनकी मृत्यु के बाद, उनकी इच्छा के अनुसार, वह एथेंस विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल को सौंपा गया।
- भूल की तुलना काफ़्का और ऑरवेल से की गई है, फिर भी इसके शासन का न कोई नाम है, न विचारधारा, न देश, और यही बात उसे डरावना बनाती है।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Ζητείται ελπίς | आशा चाहिए (कहानियाँ) | 1954 |
| Σήμα κινδύνου | ख़तरे का संकेत (उपन्यास) | 1959 |
| Αρνούμαι | मैं इनकार करता हूँ (कहानियाँ) | 1961 |
| Το λάθος | भूल (उपन्यास) | 1965 |
| Το διαβατήριο | पासपोर्ट (कहानियाँ) | 1973 |
| Εν ονόματι | के नाम पर (उपन्यास) | 1998 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Ζητείται ελπίς
Ziteitai elpis
आशा चाहिए














