जीवन
लेला काराग्यान्नी का जन्म 1898 में उत्तरी एविया के एक छोटे तटीय कस्बे लिम्नी में हुआ। उन्होंने विवाह किया और एथेंस में बस गईं, जहाँ उन्होंने सात बच्चों वाले बड़े परिवार का पालन-पोषण किया। युद्ध से पहले उनके जीवन में कुछ भी ऐसा नहीं था जो किसी नायिका का संकेत देता: वे एथेंस के एक मध्यमवर्गीय घर में गृहिणी और माँ थीं।
अप्रैल 1941 में जर्मन सेना एथेंस में घुसी, और यूनान जर्मन, इतालवी और बुल्गारियाई कब्ज़े में बँट गया। यूनान में लड़ चुके हज़ारों ब्रिटिश, ऑस्ट्रेलियाई और न्यूज़ीलैंड के सैनिक पीछे छूट गए थे और छिपे हुए थे। काराग्यान्नी ने अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ उन्हें शरण देना, खाना खिलाना और नावों से मध्य पूर्व भागने का प्रबंध करना शुरू किया। उनका घर एक बढ़ते नेटवर्क का केंद्र बन गया। अगले तीन वर्षों में इस समूह ने, जिसने «Μπουμπουλίνα» (बूबूलिना) नाम अपनाया, मित्र राष्ट्रों के लिए सैन्य जानकारी भी इकट्ठा की, जर्मनों द्वारा खोजे जा रहे लोगों की मदद की और तोड़फोड़ की कार्रवाइयों में भाग लिया। अक्टूबर 1941 में वे पहली बार गिरफ़्तार हुईं और लगभग सात महीने जेल में रहीं, फिर अपने काम पर लौट आईं।
1944 की गर्मियों में एक मुखबिर के विश्वासघात के कारण उन्हें अपने कुछ बच्चों के साथ फिर से गिरफ़्तार किया गया और मेर्लिन स्ट्रीट पर गेस्टापो के मुख्यालय ले जाया गया। उनसे पूछताछ हुई और उन्हें यातनाएँ दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने साथियों को धोखा नहीं दिया। उन्हें एथेंस के पश्चिम में हाइदारी यातना शिविर में रखा गया, जो कब्ज़े वाले यूनान का सबसे बड़ा जर्मन शिविर था। 8 सितंबर 1944 को हाइदारी के उपवन में लगभग साठ अन्य कैदियों के साथ उन्हें गोली मार दी गई। एक महीने बाद, अक्टूबर 1944 में, जर्मन एथेंस छोड़कर चले गए।
कृतियाँ

«बूबूलिना» नेटवर्क इस बात का अच्छा उदाहरण है कि शहरों में यूनानी प्रतिरोध कैसे काम करता था। पहाड़ों के सशस्त्र दलों के विपरीत, शहरी समूह मुखबिरों और गश्ती दलों से भरी एक कब्ज़े वाली राजधानी के भीतर रहते थे। उनके हथियार थे भरोसा, गोपनीयता और साहस: ऐसे घर जहाँ कोई अजनबी सो सके, ऐसे परिवार जो उस शहर में अपना भोजन बाँटते थे जहाँ 1941–42 की सर्दियों में दसियों हज़ार लोग भूख से मर गए, रात में समुद्र में निकलने को तैयार मछुआरे, और हाथों-हाथ पहुँचाए जाने वाले संदेश।
काराग्यान्नी की भूमिका एक संगठनकर्ता की थी। वे सहायकों की भर्ती करतीं, सुरक्षित घर और नावें ढूँढ़तीं, और यह सुनिश्चित करतीं कि उनके लोगों द्वारा जुटाई गई जानकारी मध्य पूर्व में मित्र राष्ट्रों तक पहुँचे। «Μπουμπουλίνα» नाम का चुनाव बहुत कुछ कहता है: लास्करीना बूबूलिना, स्वतंत्रता संग्राम की जहाज़-मालकिन और नौसैनिक कमांडर, सबसे प्रसिद्ध यूनानी महिला योद्धा थीं, और काराग्यान्नी के समूह ने स्वयं को उसी परंपरा में रखा। उनका महत्व प्रतीकात्मक भी है। उन्होंने दिखाया कि प्रतिरोध केवल बंदूक़ वाले युवा पुरुषों के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं और माँओं के लिए भी था, और गिरफ़्तारी के बाद उनका शांत साहस एक आदर्श बन गया। युद्ध के बाद एथेंस अकादमी ने उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया, और 2011 में याद वाशेम ने कब्ज़े के दौरान यहूदियों की मदद करने के लिए उन्हें «राष्ट्रों में धर्मी» के रूप में मान्यता दी। उनका जीवन पुस्तकों, स्कूली पाठों और टेलीविज़न वृत्तचित्रों में बताया गया है।
आज के यूनान में विरासत
आज एथेंस में अमेरिकिस चौक के पास एक सड़क उनके नाम पर है, और एक्सार्खिया में तोसित्सा स्ट्रीट पर प्रतिरोध की महिलाओं की स्मृति में उनकी संगमरमर की आवक्ष प्रतिमा (1963) खड़ी है। थेस्सालोनिकी, खाल्किदा, हाइदारी और अन्य नगरों में भी सड़कें उनके नाम पर हैं। स्कूलों में 28 अक्टूबर के आसपास और 12 अक्टूबर को एथेंस की मुक्ति की वर्षगाँठ पर उनकी कहानी सुनाई जाती है। पूर्व हाइदारी शिविर का स्थल, जहाँ यातना पाए और गोली से मारे गए कैदियों का स्मारक है, देखा जा सकता है। यदि आप अपनी यूनानी का अभ्यास करना चाहते हैं, तो हर शरद ऋतु में यूनानी अख़बारों के इतिहास पृष्ठों पर αντίσταση (प्रतिरोध) शब्द और «Μπουμπουλίνα» नाम खोजिए: लेला काराग्यान्नी का नाम हर साल लौट आता है।
क्या आप जानते हैं?
- जब उन्होंने अपने घर में मित्र राष्ट्रों के सैनिकों को छिपाना शुरू किया, तब वे सात बच्चों की माँ थीं।
- उनके नेटवर्क ने 1821 के स्वतंत्रता संग्राम की नायिका बूबूलिना का नाम अपनाया।
- उन्हें 8 सितंबर 1944 को मृत्युदंड दिया गया, जर्मनों के एथेंस छोड़ने से लगभग एक महीना पहले।
- 2011 में याद वाशेम ने उन्हें «राष्ट्रों में धर्मी» घोषित किया।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Απόκρυψη και φυγάδευση συμμαχικών στρατιωτών | मित्र राष्ट्रों के सैनिकों को छिपाना और उनके भागने का प्रबंध | 1941 |
| Οργάνωση «Μπουμπουλίνα» | «बूबूलिना» प्रतिरोध नेटवर्क | 1941–1944 |
| Συλλογή πληροφοριών για τους Συμμάχους | मित्र राष्ट्रों के लिए गुप्त जानकारी जुटाना | 1941–1944 |
| Σύλληψη και θάνατος στο Χαϊδάρι | हाइदारी में गिरफ़्तारी और मृत्यु | 1944 |
कृतियों से


विकिमीडिया कॉमन्स से सार्वजनिक डोमेन की तस्वीरें।
याद रखने लायक एक पंक्ति
Μπουμπουλίνα
Boumpoulina
बूबूलिना
























