जीवन
सामियू का जन्म 12 अक्टूबर 1928 को एथेंस के कैसारियानी में एशिया माइनर के यूनानी शरणार्थियों के एक ग़रीब परिवार में हुआ, जो 1922 की त्रासदी और आबादी की अदला-बदली के बाद यूनान आए थे। वे एक शरणार्थी बस्ती में बड़ी हुईं और वे गीत सुनती रहीं जो उनकी माँ और पड़ोसी एजियन के उस पार से लाए थे। युवावस्था में वे सिमोन कारास के मंडल से जुड़ीं, जो बीज़ान्टिन भजन और पारंपरिक यूनानी संगीत को समर्पित संगीतशास्त्री थे, और उनकी संस्था में उन्होंने पुरानी शैली में गाना, संगीत पढ़ना और रागों (मोड) को समझना सीखा।
1954 से 1971 तक उन्होंने यूनानी राष्ट्रीय रेडियो (EIR) के लिए काम किया, और उनका काम उन्हें एक टेप रिकॉर्डर के साथ गाँव-गाँव ले गया। उन्होंने बुज़ुर्ग पुरुषों और महिलाओं को शादियों, फ़सल कटाई, विलाप और त्योहारों के गीत गाते हुए रिकॉर्ड किया, ऐसे गीत जो कभी लिखे नहीं गए थे और गाँवों के ख़ाली होने के साथ लुप्त हो रहे थे। उनका पहला LP 1962 में आया, और 1970 के दशक में उन्होंने कॉन्सर्ट देने शुरू किए, पहले छोटी जगहों पर, फिर युवा संगीतकारों के साथ बड़े कॉन्सर्टों में, और रिकॉर्डों की एक लंबी शृंखला बनाई। 1981 में उन्होंने दोम्ना सामियू यूनानी लोक संगीत संस्था, «Καλλιτεχνικός Σύλλογος Δημοτικής Μουσικής Δόμνα Σαμίου», की स्थापना की, ताकि रिकॉर्डिंग प्रकाशित की जा सकें और शिक्षा दी जा सके। अस्सी की उम्र पार करने तक वे गाती, सिखाती और यात्रा करती रहीं, और 10 मार्च 2012 को एथेंस में उनका निधन हुआ।
कृतियाँ

सामियू के काम के दो हिस्से थे जो एक-दूसरे को पोषित करते थे। शोधकर्ता के रूप में वे संग्रह करती थीं: एपिरस और मैसेडोनिया के पहाड़ों में, द्वीपों पर, थ्रेस में और एशिया माइनर व पोंटस के शरणार्थी समुदायों के बीच की गई उनकी क्षेत्रीय रिकॉर्डिंग यूनानी परंपरा के महान ध्वनि अभिलेखागारों में से एक हैं। उन्होंने लिखा कि हर गीत कहाँ से आया, किसने गाया और किस अवसर पर, उस समय जब एथेंस में बहुत लोग गाँव के संगीत को पुराना और थोड़ा शर्मनाक मानते थे।
गायिका के रूप में उन्होंने गीत लौटाए। उन्होंने उन्हें ऑर्केस्ट्रा और पॉप संगीत-संयोजन से आधुनिक नहीं बनाया; उन्होंने उन्हें वैसे ही गाया जैसे सुना था, अलंकारों, मुक्त लयों और गाँवों की सादी, दमदार आवाज़ के साथ, अक्सर λύρα, κλαρίνο, σαντούρι और ούτι जैसे पारंपरिक वाद्यों के साथ। उनके रिकॉर्ड पूरे-पूरे क्षेत्रों को समेटते हैं: एशिया माइनर, थ्रेस और द्वीपों के गीत, कार्निवल गीत, विवाह गीत, विलाप, बाल गीत और κάλαντα (त्योहारी मंगल-गीत)। 1970 के दशक में, जब तानाशाही के बाद युवा यूनानी अपनी जड़ें खोज रहे थे, उनके कॉन्सर्टों ने उन्हें दिखाया कि δημοτικό τραγούδι संग्रहालय की वस्तु नहीं, बल्कि जीवित संगीत है, और वे आज के कई लोक संगीतकारों की गुरु बनीं। उन्होंने यूनानी रेडियो और टेलीविज़न पर कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए, और क्षेत्र-दर-क्षेत्र गीतों का परिचय एक बड़े श्रोता वर्ग से कराया।
आज के यूनान में विरासत
एथेंस में दोम्ना सामियू यूनानी लोक संगीत संस्था आज भी सक्रिय है: यह उनका अभिलेखागार सँभालती है, उनकी रिकॉर्डिंग प्रकाशित करती है और ऐसे कार्यक्रम चलाती है जो पारंपरिक गीत और नृत्य को स्कूलों और युवा संगीतकारों तक पहुँचाते हैं। जो कोई यूनानी लोकगीत को वैसे सीखना चाहता है जैसे वह गाया जाता था, उसके लिए उनके रिकॉर्ड पहला पड़ाव हैं, और आज के कई पारंपरिक गायक उन्हें अपनी गुरु कहते हैं। उनकी स्मृति में लोक संगीत उत्सव और कॉन्सर्ट नियमित रूप से होते हैं। एक अच्छा काम: एशिया माइनर के गीतों या κάλαντα की उनकी रिकॉर्डिंग खोजिए, वे मंगल-गीत जो बच्चे क्रिसमस, नववर्ष और एपिफ़नी पर घर-घर जाकर गाते हैं, और बोलों के साथ चलिए; लोकगीत अपनी पंक्तियाँ दोहराते हैं, जिससे वे शिक्षार्थी के लिए आदर्श बन जाते हैं।
क्या आप जानते हैं?
- उनके माता-पिता एशिया माइनर के शरणार्थी थे, और खोई हुई मातृभूमि के गीत वह पहला संगीत था जो उन्होंने सुना।
- उन्होंने पारंपरिक गायन बीज़ान्टिन भजन के संगीतशास्त्री सिमोन कारास से सीखा।
- गायिका के रूप में प्रसिद्ध होने से पहले उन्होंने रेडियो के लिए काम किया और गाँव के गायकों को टेप पर रिकॉर्ड किया।
- 1981 में स्थापित उनकी संस्था आज भी उनका नाम धारण करती है।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Μαθήτρια του Σίμωνα Καρά | सिमोन कारास की शिष्या और सहयोगी | 1940s–50s |
| Ηχογραφήσεις στα χωριά για το ραδιόφωνο | यूनानी रेडियो के लिए गाँवों में क्षेत्रीय रिकॉर्डिंग | 1954–1971 |
| Πρώτος δίσκος: «Τραγούδια της στεριάς και της θάλασσας» | पहला LP: धरती और समुद्र के गीत | 1962 |
| Καλλιτεχνικός Σύλλογος Δημοτικής Μουσικής «Δόμνα Σαμίου» | दोम्ना सामियू यूनानी लोक संगीत संस्था की स्थापना | 1981 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Μήλο μου κόκκινο, ρόιδο βαμμένο, / γιατί με μαραζώνεις τον πικραμένο;
Milo mou kokkino, roido vammeno, / giati me marazoneis ton pikrameno?
मेरे लाल सेब, मेरे रंगे हुए अनार, / तुम मुझ दुखियारे को क्यों तड़पाते हो?
























