जीवन
कार्योटाकिस का जन्म 30 अक्टूबर 1896 को पेलोपोनीज़ के त्रिपोली में हुआ। उनके पिता सिविल इंजीनियर थे, जिनकी नौकरी के कारण परिवार एक शहर से दूसरे शहर जाता रहा: लेफ़काडा, अर्गोस्तोली, लारिसा, कलामाता, एथेंस, खानिया। उन्होंने एथेंस में क़ानून की पढ़ाई की, 1917 में डिग्री ली और कुछ समय वकालत करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही सरकारी सेवा में आ गए, जहाँ वे जीवन भर रहे और थेसालोनिकी, सिरोस, आर्टा, एथेंस तथा अन्य जगहों के प्रांतीय कार्यालयों में तैनात रहे। उन्हें यह काम पसंद नहीं था और उन्होंने अपनी कविताओं में यह खुलकर कहा।
1922 में उनकी मुलाक़ात कवयित्री मारिया पोलिदूरी से हुई, जो एथेंस में उसी दफ़्तर में काम करती थीं। उनका रिश्ता छोटा और दर्दभरा रहा; बाद में उन्होंने यूनानी भाषा की कुछ सबसे भावुक प्रेम कविताएँ लिखीं, जिनमें से कई उन्हीं के लिए थीं, और 1930 में तपेदिक से उनकी मृत्यु हो गई। कार्योटाकिस सरकारी कर्मचारियों के संघ में भी सक्रिय थे, जिससे उनके करियर को कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
1928 की शुरुआत में उन्हें सज़ा के तौर पर उत्तर-पश्चिमी यूनान के छोटे शहर प्रेवेज़ा भेज दिया गया। वे जून में पहुँचे और मुश्किल से एक महीना टिक पाए। 20 जुलाई को उन्होंने डूबकर जान देने की कोशिश की और, उनके अपने शब्दों में, हार मानने से पहले दस घंटे लहरों से लड़ते रहे। अगले दिन, 21 जुलाई 1928 को, उन्होंने एक रिवॉल्वर ख़रीदी और किनारे के पास एक यूकेलिप्टस के पेड़ के नीचे ख़ुद को गोली मार ली। उनकी जेब में मिला नोट, जो आज प्रसिद्ध है, तैरना जानने वाले हर व्यक्ति को व्यंग्यभरी सलाह के साथ ख़त्म होता है कि वह डूबकर मरने की कोशिश न करे।
कृतियाँ
कार्योटाकिस ने केवल तीन संग्रह प्रकाशित किए: Ο πόνος του ανθρώπου και των πραγμάτων (मनुष्य और वस्तुओं की पीड़ा, 1919), Νηπενθή (नेपेंथी, 1921) और Ελεγεία και Σάτιρες (शोकगीत और व्यंग्य, 1927)। शुरुआती किताबें उस दौर के फ़ैशन के अनुसार उदास हैं; असली महत्त्व आख़िरी किताब का है। इसके शोकगीत एक ऐसे जीवन की बात करते हैं जो पहले ही विफल हो चुका है, ऐसी आवाज़ में जो कोमल भी है और व्यंग्यपूर्ण भी: «Είμαστε κάτι ξεχαρβαλωμένες κιθάρες» (हम कुछ टूटी-फूटी गिटारें हैं), इस पंक्ति से कविता Είμαστε κάτι… (हम कुछ…) शुरू होती है। Ιδανικοί αυτόχειρες (आदर्श आत्मघाती) में वे ऐसे लोगों का वर्णन करते हैं जो अपनी मृत्यु की सावधानी से योजना बनाते हैं और फिर, आख़िरी पंक्ति में, उसे टाल देते हैं।
व्यंग्य कविताएँ उसी कड़वाहट को बाहर की ओर मोड़ती हैं। Δημόσιοι υπάλληλοι (सरकारी कर्मचारी) में बाबू अपने दफ़्तरों में स्तंभों की तरह धीरे-धीरे घिसते दिखाई देते हैं; Μικρή ασυμφωνία εις Α μείζον (ए मेजर में छोटी असंगति) उस समय के लोकप्रिय कवि मिल्तियादिस मलाकासिस का मज़ाक़ उड़ाती है। उनकी शैली रूप में पारंपरिक है, तुकबंदी और सख़्त छंद के साथ, लेकिन भाषा रोज़मर्रा की है और बिंब आधुनिक जीवन से आते हैं: ट्राम, टाइपराइटर, कैफ़े, दवाख़ाना। अपने आख़िरी हफ़्तों में लिखी गई Πρέβεζα काली दीवारों पर बैठे कौवों, कम तौलने वाले सिपाही, रविवार को बजने वाले बैंड और तीस द्राख़्मा की पहली जमा राशि वाली एक बैंक पासबुक को गिनाती है, और इस विचार पर ख़त्म होती है कि अगर शहर का एक भी निवासी घृणा से मर जाए, तो अंतिम संस्कार में सब मज़े करेंगे। उन्होंने बोदलेयर और वेरलेन जैसे फ़्रांसीसी कवियों का अनुवाद भी किया, जिनका प्रभाव उनकी पूरी रचना में दिखता है।
आज के यूनान में विरासत
यूनानी स्कूली संकलन में कार्योटाकिस वह अकेले कवि हैं जिन्हें किशोर अक्सर अपना मान लेते हैं; Πρέβεζα, Ιδανικοί αυτόχειρες और Μικρή ασυμφωνία लिसियम (हाई स्कूल) में पढ़ी और कंठस्थ की जाती हैं। 1928 के बाद उनके स्वर की इतनी नक़ल हुई कि आलोचकों ने उनकी शैली की उदास कविता के लिए καρυωτακισμός (कार्योटाकिसवाद) शब्द गढ़ा, जो आज भी प्रचलित है। कई संगीतकारों ने उनकी कविताओं को संगीत में ढाला है: लेना प्लातोनोस के एल्बम Καρυωτάκης (1982) से शुरुआत करें, और उन पर मिकिस थियोडोराकिस का ऑपेरा खोजें। 2009 में ERT ने टीवी धारावाहिक Καρυωτάκης प्रसारित किया। प्रेवेज़ा में एक स्मारक उस स्थान को चिह्नित करता है जहाँ उनकी मृत्यु हुई, और त्रिपोली, एथेंस तथा प्रेवेज़ा में सड़कें उनके नाम पर हैं। जब यूनानी अपनी सरकारी व्यवस्था पर आहें भरते हैं, तो कोई न कोई अक्सर उन्हें उद्धृत करता है।
क्या आप जानते हैं?
- उनका सुसाइड नोट एक पुनश्च के साथ ख़त्म होता है जिसमें तैरना जानने वाले हर व्यक्ति को सलाह दी गई है कि वह कभी समुद्र में आत्महत्या की कोशिश न करे: वे अभी-अभी दस घंटे डूबने में असफल रहे थे।
- मारिया पोलिदूरी की उन्हें संबोधित प्रेम कविताएँ, दोनों की मृत्यु के बाद, एक तरह की राष्ट्रीय दुखांत प्रेमकथा बन गईं; स्कूल में दोनों को अक्सर साथ पढ़ा जाता है।
- प्रेवेज़ा में सज़ा के तौर पर तबादला आंशिक रूप से सरकारी कर्मचारी संघ में उनकी गतिविधियों के कारण हुआ था।
- उनकी एक व्यंग्य कविता न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी को संबोधित है, «που φωτίζει τον κόσμο» (जो दुनिया को रोशन करती है); उन्होंने कभी अमेरिका में क़दम नहीं रखा।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Ο πόνος του ανθρώπου και των πραγμάτων | मनुष्य और वस्तुओं की पीड़ा | 1919 |
| Νηπενθή | नेपेंथी | 1921 |
| Ελεγεία και Σάτιρες | शोकगीत और व्यंग्य | 1927 |
| Ιδανικοί αυτόχειρες | आदर्श आत्मघाती | 1927 |
| Πρέβεζα | प्रेवेज़ा | 1928 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Είμαστε κάτι ξεχαρβαλωμένες / κιθάρες. Ο άνεμος, όταν περνάει, / στίχους, ήχους παράφωνους ξυπνά / στις χορδές που κρέμονται σαν καδένες.
Eimaste kati xecharvalomenes / kithares. O anemos, otan pernaei, / stichous, ichous parafonous xypna / stis chordes pou kremontai san kadenes.
हम कुछ टूटी-फूटी / गिटारें हैं। हवा, जब गुज़रती है, / ज़ंजीरों की तरह लटकते तारों पर / पंक्तियाँ, बेसुरी ध्वनियाँ जगा देती है।