जीवन
पापालूकास ने एथेंस कला विद्यालय में पढ़कर 1917–1921 में पेरिस में शिक्षा जारी रखी। वहाँ आधुनिक चित्रकला और रंग-रूप के उत्तर-प्रभाववादी प्रयोगों से परिचय हुआ। एशिया माइनर अभियान में युद्ध-चित्रकार बनकर लौटे। काम 1922 में ज़ाप्पियोन में दिखाए गए; उसका बड़ा हिस्सा बाद में स्मिर्ना के विनाश में खो गया।
1923–1924 का एथोस प्रवास निर्णायक था। दृश्य, मठ और बंदरगाह बनाते हुए बीजान्टिन भित्तिचित्र, प्रतिमाचित्र और पांडुलिपियाँ पढ़ीं। इन मुलाक़ातों ने निजी चित्रभाषा गढ़ी। अम्फ़िसा का एवांगेलिस्त्रिया गिरजाघर 1927–1932 में सजाया। शिक्षण और सार्वजनिक भूमिकाओं ने प्रभाव बढ़ाया: 1943–1951 में तकनीकी विश्वविद्यालय में रेखांकन पढ़ाया और 1956 में कला विद्यालय के चित्रकला प्रोफ़ेसर बने। स्त्रातिस दूकास, निकोस हाजीकिरियाकोस-घिकास, दिमित्रिस पिकिओनिस और सोक्रातिस कारान्तिनोस के साथ 1935–1937 में To Trito Mati पत्रिका में काम किया। यूनानी स्थानों का निकट अवलोकन अंतरराष्ट्रीय कला-विकास से जुड़ा रहा।
कृतियाँ

लाव्रा मठ का अतिथि कक्ष, 1924, महत्वपूर्ण एथोस काल का है। राष्ट्रीय दीर्घा द्वारा 1925 का माना गया सस्पेंडर पहने लड़का मानव आकृति को रंग और संरचना के अध्ययन में लाता है। अम्फ़िसा की एवांगेलिस्त्रिया सज्जा, 1927–1932, बीजान्टिन कला से मुलाक़ात को बड़े वास्तु-स्थान में ले जाती है। रेखांकन और अध्ययन अलग चित्रों तथा गिरजाघर के अंदरूनी स्थान का संबंध तैयार करते थे।
किप्रियादिस के मकान, 1938, और देल्फ़ी का दृश्य, 1945, बसे हुए दृश्यों में लगातार रुचि बताते हैं। इमारतें, ढलान और वनस्पति रूप-रंग के संबंध बनते हैं। फूलदान (गहरे रंग), 1956, यही ध्यान स्थिर-जीवन चित्र में लाता है। मामूली विषय भी कठिन संयोजन माँग सकता है। भौतिक साधनों पर उनका कथन रंग, रेखा और संगठन की ओर देखना सिखाता है। पास के रंगों की तुलना, कूची के निशान का अनुसरण और वस्तु की उपस्थिति देखना दृष्टि को सक्रिय करते हैं। काम कैनवास से विशाल धार्मिक सज्जा तक फैला है।
आज के यूनान में विरासत
पापालूकास ने बीजान्टिन दृश्य परंपरा और आधुनिक रंग-अनुसंधान जोड़कर बीसवीं सदी की यूनानी चित्रकला में योगदान दिया। राष्ट्रीय दीर्घा की 1976 पुनरावलोकन प्रदर्शनी ने नए दर्शकों से परिचय कराया। यूनानी संग्रहालय-विवरण और यहाँ का छोटा कथन देखी चीज़ पर बोलने की भाषा देते हैं।
अपने कागज़ पर दो नीले नमूने बनाकर दूसरे में सफ़ेद मिलाएँ। «Το δεύτερο μπλε είναι πιο φωτεινό από το πρώτο» प्रयोग करें। फिर गरम और ठंडा रंग चुनकर यूनानी में वर्णन करें। θερμός और ψυχρός रंग-संबंध बताते हैं, मापा तापमान नहीं। B1 इस निर्देशित आधुनिक यूनानी तुलना का स्तर है, जिसमें विशेषण, चित्रकला-क्रियाएँ और निजी पसंद का कारण जुड़ते हैं।
क्या आप जानते हैं?
- 1923–1924 में एथोस पर बीजान्टिन कला पढ़ी।
- अम्फ़िसा की एवांगेलिस्त्रिया सज्जा 1927–1932 की है।
- राष्ट्रीय दीर्घा ने 1976 में पुनरावलोकन प्रदर्शनी लगाई।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Αρχονταρίκι Λαύρας Αγ. Όρους | एथोस के लाव्रा मठ का अतिथि कक्ष | 1924 |
| Αγόρι με τιράντες | सस्पेंडर पहने लड़का | 1925 |
| Ευαγγελίστρια Άμφισσας — τοιχογράφηση | एवांगेलिस्त्रिया, अम्फ़िसा — गिरजाघर सज्जा | 1927–1932 |
| Σπίτια στου Κυπριάδη | किप्रियादिस के मकान | 1938 |
| Τοπίο Δελφών | देल्फ़ी का दृश्य | 1945 |
| Βάζο με λουλούδια (σκούρα χρώματα) | फूलदान (गहरे रंग) | 1956 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
η ζωγραφική πρέπει να συγκινεί με τα υλικά της μέσα και όχι με το θέμα
i zografikí prépei na sygkiní me ta yliká tis mésa kai óchi me to théma
चित्रकला को अपने भौतिक साधनों से भाव जगाने चाहिए, विषय से नहीं।
















































































































