जीवन
आना सिनोदीनु का जन्म 1927 में लुत्राकी में हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय रंगमंच के नाट्य विद्यालय से 1950 में प्रशिक्षण पूरा किया। आरंभिक पेशेवर कामों में मारिका कोतोपुली की मंडली शामिल थी। 1954 में राष्ट्रीय रंगमंच से अनुबंध हुआ। इस समूह में अभिनय, अनुवाद, गति और संगीत मिलकर शास्त्रीय नाटकों का प्रदर्शन बनाते थे।
1955 में एपिडॉरस उत्सव के उद्घाटन पर उन्होंने यूरिपिदेस के Εκάβη (हेकुबा) में पोलिक्सेना की भूमिका निभाई। कातिना पाक्सिनु हेकुबा थीं और निर्देशक अलेक्सिस मिनोतिस थे। अगले वर्ष उन्हीं के निर्देशन में सोफ़ोक्लीज़ की Αντιγόνη (अंतिगोनी) का मुख्य पात्र निभाया। ये आधुनिक प्रस्तुतियाँ थीं जिनके यूनानी अनुवाद प्राचीन संघर्ष समकालीन दर्शकों तक लाते थे। उनके प्रदर्शनों में हास्य तथा नए यूनानी और विदेशी नाटक भी शामिल थे।
1964 में उन्होंने Ελληνική Σκηνή (यूनानी मंच) की स्थापना की। मंडली ने 1965 में लाइकाबेतस रंगमंच का उद्घाटन किया; वास्तुकार ताकिस ज़ेनेतोस और यूनानी राष्ट्रीय पर्यटन संगठन इस परियोजना में जुड़े थे। सैन्य तानाशाही की सेंसरशिप ने 1967 में यह प्रयास रोक दिया। वह 1972 में मंच पर लौटीं और काम करती रहीं; 1991 में Τρωάδες (ट्रॉय की स्त्रियाँ) में हेकुबा बनीं। 2016 में उनका निधन हुआ। उनका जीवन अभिनय और रंगस्थल बनाने को जोड़ता है।
कृतियाँ

सिनोदीनु के पात्र अलग नाटकीय दबाव दिखाते हैं। Εκάβη (हेकुबा, 1955) की पोलिक्सेना बलि का सामना करती युवती है; मुख्य पात्र कातिना पाक्सिनु ने निभाया। Αντιγόνη (अंतिगोनी, 1956) में सिनोदीनु सत्ता और कर्तव्य के संघर्ष के केंद्र में थीं। यानिस ग्रिपारिस का यूनानी अनुवाद और अलेक्सिस मिनोतिस का निर्देशन आधार थे। अभिनेत्री को संघर्ष सुनने योग्य और शारीरिक रूप से उपस्थित बनाना था।
उनकी मंडली ने इस काम के लिए नए स्थान खोले। 1965 में लाइकाबेतस में अरिस्तोफ़ानेस का Εκκλησιάζουσες (स्त्रियों की सभा), मिनोस वोलानाकिस के निर्देशन में, और अंतिगोनी, यॉर्गोस सेवास्तिकोग्लु के निर्देशन में, प्रस्तुत हुए। हास्य और त्रासदी ने एथेंस के ऊपर एक नया खुला मंच साझा किया। उसी शरद ऋतु में उन्होंने उत्तरी यूनान के राष्ट्रीय रंगमंच में आंगेलोस सिकेलियानोस की Σίβυλλα (सिबिल) की पुनर्प्रस्तुति का मुख्य पात्र भी निभाया।
1991 में यूरिपिदेस की Τρωάδες (ट्रॉय की स्त्रियाँ) की हेकुबा के रूप में लौटकर उन्होंने अभिनेताओं को देवताओं और मनुष्यों के दुखों का चित्रण करते और न्याय खोजते बताया। उनका साक्षात्कार प्रदर्शन और व्याख्या जोड़ता है: आवाज़ मतभेद, शोक और प्रश्न दर्शकों तक ले जाती है।
आज के यूनान में विरासत
सिनोदीनु की विरासत में यादगार भूमिकाएँ और यूनानी रंगमंच को एक और खुला घर देने का प्रयास दोनों हैं। उनका काम बोलने को लोगों के बीच क्रिया की तरह सुनने को कहता है। रूपांतरित आधुनिक यूनानी पाठ सुनें, फिर Θα έρθεις αύριο पहले कथन और फिर प्रश्न की तरह कहें। शब्द समान रखें और स्वर का परिवर्तन देखें। αύριο पर बल देकर वाक्य दोहराएँ ताकि समय महत्वपूर्ण विवरण बने। दोनों रूपों के बीच छोटा विराम दें और साथी से पूछें किसमें उत्तर अपेक्षित है। अभिनय कला से प्रेरित यह रोज़मर्रा का अभ्यास सुनना, स्पष्ट बोलना और आवाज़ से व्यक्त अर्थ पर ध्यान देना विकसित करता है।
क्या आप जानते हैं?
- 1927 में लुत्राकी में जन्म; 2016 में निधन।
- 1950 में राष्ट्रीय रंगमंच के नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षण पूरा किया।
- 1964 में यूनानी मंच की स्थापना; मंडली ने 1965 में लाइकाबेतस में शुरुआत की।
- कृतियों की तिथियाँ प्रदर्शन वर्ष हैं, प्राचीन नाटकों के रचनाकाल नहीं।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Εκάβη — Πολυξένη | हेकुबा — पोलिक्सेना (प्रदर्शन) | 1955 |
| Αντιγόνη — Αντιγόνη | अंतिगोनी — मुख्य पात्र (प्रदर्शन) | 1956 |
| Σίβυλλα — Σίβυλλα | सिबिल — मुख्य पात्र (पुनर्प्रस्तुति) | 1965 |
| Τρωάδες — Εκάβη | ट्रॉय की स्त्रियाँ — हेकुबा (प्रदर्शन) | 1991 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Οι ηθοποιοί αναπαριστούμε τα πάθη των θεών και των ανθρώπων, τις διαμάχες και ψάχνουμε να βρούμε πού είναι το δίκιο.
Oi ithopoioi anaparistoume ta pathi ton theon kai ton anthropon, tis diamaches kai psachnoume na vroume pou einai to dikio.
हम अभिनेता देवताओं और मनुष्यों के दुख, उनके संघर्ष प्रस्तुत करते हैं और खोजते हैं कि न्याय कहाँ है।
















































































































