जीवन
पावलोस मेलास का जन्म 29 मार्च 1870 को मार्से में हुआ, जहाँ उनके पिता मिखाइल मेलास, एपिरस मूल के परिवार के एक व्यापारी, काम करते थे। पावलोस बचपन में ही थे जब परिवार एथेंस आ गया; उनके पिता बाद में एथेंस के महापौर और संसद सदस्य बने। पावलोस सैन्य अकादमी (Σχολή Ευελπίδων) में भर्ती हुए और 1891 में तोपख़ाना अधिकारी बने। 1892 में उन्होंने नतालिया द्रागूमी से विवाह किया, जो राजनेता स्तेफ़ानोस द्रागूमिस की बेटी और लेखक व राजनयिक इओन द्रागूमिस की बहन थीं। उनके दो बच्चे हुए, मिखाइल और ज़ोई।
सदी के मोड़ पर मकदूनिया अभी भी उस्मानी साम्राज्य का हिस्सा था, और यूनानी, बुल्गारियाई और सर्ब, अक्सर हथियारों के बल पर, उसके ईसाई गाँवों की निष्ठा पाने के लिए होड़ कर रहे थे। अपने साले इओन द्रागूमिस से प्रभावित होकर मेलास को विश्वास हो गया कि यूनान को कदम उठाना चाहिए। 1904 की शुरुआत में वे कुछ अन्य अधिकारियों के साथ स्थिति का अध्ययन करने गुप्त रूप से मकदूनिया गए, और उसी वर्ष अगस्त में एक छोटे सशस्त्र दल के मुखिया के रूप में कापेतान मिकिस ज़ेज़ास (Καπετάν Μίκης Ζέζας) नाम से लौटे, जो उनके दोनों बच्चों के नामों से बना था।
उनका अभियान लगभग दो महीने ही चला। 13 अक्टूबर 1904 को कास्तोरिया क्षेत्र के स्तातिस्ता गाँव में उस्मानी सेना ने उनके दल को घेर लिया, और लड़ाई में मेलास मारे गए। वे चौंतीस वर्ष के थे।
कृतियाँ

मेलास का महत्व इस बात में कम है कि उन्होंने मैदान में क्या हासिल किया, और उनकी मृत्यु के प्रभाव में अधिक। जब ख़बर एथेंस पहुँची, तो सदमा बहुत बड़ा था: एक ऊँचे घराने का अधिकारी, एक पति और पिता, जिसके सामने शानदार करियर था, मकदूनिया के लिए अपनी जान दे चुका था। अब तक हिचकिचाता जनमत निर्णायक रूप से संघर्ष के पक्ष में मुड़ गया। कई अधिकारी और स्वयंसेवक उनके उदाहरण पर चले, और अगले वर्षों में थेसालोनिकी के यूनानी वाणिज्य दूतावास और स्थानीय लड़ाकों के समर्थन से यूनानी सशस्त्र दल इस क्षेत्र में एक वास्तविक शक्ति बन गए।
मकदूनियाई संघर्ष (Μακεδονικός Αγώνας), लगभग 1904–1908, 1908 की युवा तुर्क क्रांति के साथ समाप्त हुआ, और कुछ साल बाद 1912–1913 के बाल्कन युद्धों ने थेसालोनिकी सहित मकदूनिया के बड़े हिस्से को यूनानी राज्य में ला दिया। यूनानियों ने हमेशा मेलास को इस कहानी का पहला शहीद माना है।
अपने अभियानों के दौरान पत्नी नतालिया को लिखे उनके पत्र सुरक्षित हैं और उनके परिवार ने उन्हें प्रकाशित किया; वे संदेह, कोमलता और दृढ़ संकल्प से भरे एक व्यक्ति को दिखाते हैं। उनकी कहानी ने साहित्य को भी प्रेरित किया। मेलास और द्रागूमिस परिवारों को जानने वाली पेनेलोपी देल्ता उनकी मृत्यु से गहराई से विचलित हुईं; इसी ने उन्हें मकदूनिया के बारे में लिखने को प्रेरित किया, और मकदूनियाई संघर्ष के दौर पर आधारित उनका उपन्यास Τα μυστικά του βάλτου (दलदल के रहस्य, 1937) आज भी यूनानी बच्चे पढ़ते हैं।
आज के यूनान में विरासत
उत्तरी यूनान में पावलोस मेलास हर जगह हैं। जिस गाँव में उनकी मृत्यु हुई, स्तातिस्ता, उसका नाम 1927 में बदलकर Μελάς (मेलास) रखा गया, और वहाँ एक स्मारक खड़ा है। थेसालोनिकी में पूरी एक नगरपालिका का नाम Δήμος Παύλου Μελά है, और शहर का मकदूनियाई संघर्ष संग्रहालय उनकी कहानी सुनाता है। पूरे यूनान में उनके नाम पर सड़कें, चौक और स्कूल हैं, और कई नगरों में उनकी प्रतिमा है। यूनानी पाठ्यपुस्तकें बीसवीं सदी के आरंभ के इतिहास में उनकी कहानी बताती हैं। शुरुआत का एक अच्छा तरीक़ा है देल्ता की Τα μυστικά του βάλτου, या बस सैकड़ों Οδός Παύλου Μελά (पावलोस मेलास मार्ग) में से किसी एक पर टहलना।
क्या आप जानते हैं?
- उनका जन्म यूनान में नहीं, फ़्रांस के मार्से में हुआ था।
- उनका युद्ध-नाम मिकिस ज़ेज़ास उनके बेटे मिखाइल (मिकिस) और बेटी ज़ोई के नामों से बना था।
- उनकी पत्नी इओन द्रागूमिस की बहन थीं, जो उस समय के प्रमुख लेखकों और राष्ट्रवादियों में से एक थे।
- जिस गाँव में वे मारे गए, उसका नाम 1927 में उनके नाम पर रखा गया।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Αξιωματικός του Πυροβολικού | तोपख़ाना अधिकारी के रूप में नियुक्ति | 1891 |
| Πρώτη αποστολή στη Μακεδονία | मकदूनिया का पहला गुप्त अभियान | 1904 |
| Ο Καπετάν Μίκης Ζέζας και το σώμα του | कापेतान मिकिस ज़ेज़ास और उनका सशस्त्र दल | August 1904 |
| Ο θάνατος στη Στάτιστα | स्तातिस्ता में मृत्यु | 13 October 1904 |
| Η Στάτιστα μετονομάζεται Μελάς | स्तातिस्ता का नाम बदलकर मेलास रखा गया | 1927 |
कृतियों से



विकिमीडिया कॉमन्स से सार्वजनिक डोमेन की तस्वीरें।
याद रखने लायक एक पंक्ति
Καπετάν Μίκης Ζέζας
Kapetan Mikis Zezas
कप्तान मिकिस ज़ेज़ास
























