जीवन
दोरा स्त्रातू, जिन्हें दोरोथेआ स्त्रातू भी कहा जाता है, का जन्म 1903 में एथेंस में हुआ। उनकी शिक्षा में गायन, विदेशी भाषाएँ और दिमित्रिस मित्रोपुलोस से पियानो सीखना शामिल था। विदेश में कई वर्ष बिताकर वे 1932 में यूनान लौटीं और एथेंस के कलाजगत से जुड़ीं। कारोलोस कून के आर्ट थिएटर में उनका व्यावहारिक योगदान प्रशासनिक था: लोगों और संसाधनों का संगठन आगे उनकी अपनी परियोजना का केंद्र बना।
1952 में उन्होंने दौरे पर आए यूगोस्लाव लोकदल को देखा। उसके क्षेत्रीय नृत्य, संगीत और वेशभूषा के मेल ने स्थायी यूनानी दल की संभावनाएँ सुझाईं। लोकसंस्कृति विशेषज्ञ गेओर्गिओस मेगास की सलाह और कलाकारों तथा सार्वजनिक व्यक्तियों के सहयोग से उन्होंने 1953 में यूनानी नृत्य संस्था बनाई। चित्रकार यानिस त्सारूखिस ने शुरुआती पोशाकों में मदद की; दूसरे सलाहकार संगीत, वस्त्र और प्रदर्शन का ज्ञान लाए।
गाँवों के दौरे, संग्रह और अभ्यास यात्राओं के साथ बढ़े। 1963 में फ़िलोपापू पहाड़ी पर दल के लिए विशेष रंगमंच बनाने का आदेश दिया गया, जिसके स्थायी दृश्यपट स्पिरोस वासिलिउ ने बनाए। स्त्रातू ने नृत्य-संग्रह और वेशभूषा बढ़ाना जारी रखा तथा अपनी दृष्टि पर पुस्तकें लिखीं। वे 1983 में सेवानिवृत्त हुईं और 19 जनवरी 1988 को उनकी मृत्यु हुई। उनका नाम उनके बनाए संस्थान से जुड़ा रहा।
कृतियाँ

स्त्रातू की उपलब्धि स्थानीय अभ्यास और रंगमंच का मिलन आयोजित करना था। विशिष्ट समुदायों के नर्तक और संगीतकार कदम, धुनें, हाथ पकड़ने के ढंग और संगीत तथा गति का संबंध पहुँचाते थे। दल मैदानी शोध, रिकॉर्डिंग और सीधे शिक्षण से सामग्री जुटाता था; अभ्यास उसे दर्शकों के कार्यक्रम में बदलता था। मंचन उसे नया परिवेश और चुना क्रम देता था।
वेशभूषा इसका अनिवार्य हिस्सा थी। संस्था ने गाँवों में बने वस्त्र, आभूषण और कढ़ाई एकत्र किए तथा उन्हें पहनने, तह लगाने और सँभालने के कौशल विकसित किए। उसके प्रदर्शनों में क्रीत और पोंतुस सहित क्षेत्रीय परंपराएँ पहचानी जाती हैं; नृत्य का नाम हर स्थानीय रूप नहीं बताता। रंगमंच का अपना विवरण मानता है कि कभी पड़ोसी गाँव की पोशाक मंच पर इस्तेमाल होती है।
उनकी पुस्तकें Οι λαϊκοί χοροί, ένας ζωντανός δεσμός με το παρελθόν (लोकनृत्य, अतीत से जीवित संबंध, 1966) और Ελληνικοί παραδοσιακοί χοροί (यूनानी पारंपरिक नृत्य, 1978) संरक्षण की उनकी दृष्टि दिखाती हैं। वे नृत्य को राष्ट्रीय ऐतिहासिक निरंतरता से जोड़ती थीं। यह विरासत की उनकी व्याख्या थी; दर्ज व्यक्ति, स्थान और संस्करण विविध प्रथाओं के मूल्यवान प्रमाण हैं। उनकी विरासत में वह संगठन भी है जो सामग्री अध्ययन के लिए उपलब्ध रखता है।
आज के यूनान में विरासत
संस्था के Dance Pandect में कालामातियानोस की प्रविष्टि खोलें और स्थान का नाम अपने नोट के साथ रखें। प्रमाणित चित्र या छोटे गतिदृश्य में वृत्त, हाथ की पकड़ और एक दिखता वस्त्र पहचानें। το βήμα, το χέρι, ο κύκλος और η φορεσιά की यूनानी सूची बनाएँ। फिर δεξιά और αριστερά से दो मौलिक सरल निर्देश दें, जो सचमुच दिखती गति बताते हों। ये वाक्य दिशा और शरीर की शब्दावली का अभ्यास हैं, पूरा नृत्य-पाठ नहीं। दूसरी क्षेत्रीय प्रविष्टि से तुलना करके एक अंतर लिखें। संग्रह साथ चलते लोगों का सटीक वर्णन सिखाता है और नृत्य से जुड़े नाम तथा स्थान बनाए रखता है।
क्या आप जानते हैं?
- उनके पियानो शिक्षक दिमित्रिस मित्रोपुलोस थे।
- उन्होंने लगभग पचास वर्ष की उम्र में नृत्य संस्था बनाई।
- चित्रकार यानिस त्सारूखिस ने शुरुआती पोशाकों में मदद की।
- रंगमंच के संग्रह में कपड़ों के साथ रिकॉर्डिंग भी हैं।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Ίδρυση του σωματείου Ελληνικοί Χοροί | यूनानी नृत्य संस्था की स्थापना | 1953 |
| Εντολή κατασκευής θεάτρου στον Φιλοπάππου | फ़िलोपापू रंगमंच निर्माण का आदेश | 1963 |
| Οι λαϊκοί χοροί, ένας ζωντανός δεσμός με το παρελθόν | लोकनृत्य, अतीत से जीवित संबंध | 1966 |
| Ελληνικοί παραδοσιακοί χοροί | यूनानी पारंपरिक नृत्य | 1978 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
ήξερε να μαζεύει γύρω της πάρα πολύ καλούς συμβούλους
ixere na mazevei gyro tis para poly kalous symvoulous
वे अपने आसपास बहुत अच्छे सलाहकार जुटाना जानती थीं।
















































































































