जीवन
स्पिरोस एवांगेलातोस का जन्म 20 अक्टूबर 1940 को एथेंस में हुआ; वे संगीतकार आंतियोख़ोस एवांगेलातोस और हार्प-वादक क्सेनी बुरेक्साकी के पुत्र थे। 1961 में उन्होंने राष्ट्रीय रंगमंच के नाट्य विद्यालय से स्नातक किया और एथेंस विश्वविद्यालय में भाषाशास्त्र पढ़ा, जहाँ 1970 में उन्हें डॉक्टरेट मिली। 1966 से 1970 तक उन्होंने छात्रवृत्ति पर वियना विश्वविद्यालय में रंगमंच अध्ययन किया। लगभग इक्कीस वर्ष की आयु में उन्होंने Φορτουνάτος (फ़ोर्तुनातोस) से पेशेवर निर्देशन शुरू किया; यह मार्कोस आंतोनियोस फ़ोस्कोलोस की एक क्रीटी कॉमेडी है, जिसका पाठ उन्हें एथेंस की एक किताबों की दुकान में मिला था।
करियर के आरंभ में उन्होंने Νεοελληνική Σκηνή (नव-यूनानी मंच) नाम की मंडली बनाई; स्रोत 1962 या 1972 बताते हैं। 1970 के दशक में उन्होंने एपिडॉरस में राष्ट्रीय रंगमंच के लिए निर्देशन किया और 1975 में आम्फ़ी-थियात्रो की स्थापना की। वे 1977 से 1980 तक उत्तरी यूनान राजकीय रंगमंच के महानिदेशक और 1984 से 1987 तक यूनानी राष्ट्रीय ऑपेरा के महानिदेशक रहे, और बाद में उसके बोर्ड के अध्यक्ष भी बने। 1989 में वे एथेंस विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बने और 1991 में उसके नए रंगमंच अध्ययन विभाग में गए। 2005 में वे एथेंस अकादमी के सदस्य चुने गए, 2012 में उपाध्यक्ष और 2013 में अध्यक्ष रहे। फ़रवरी 2011 में आर्थिक कठिनाइयों ने उन्हें आम्फ़ी-थियात्रो का काम स्थगित करने पर मजबूर किया। 24 जनवरी 2017 को उनका निधन हुआ।
कृतियाँ
एवांगेलातोस किसी नाटक तक पहले भाषाशास्त्री के रूप में पहुँचते थे, उसके पाठ और इतिहास का अध्ययन करते हुए, और फिर पूर्वाभ्यास-कक्ष के व्यक्ति के रूप में। उन्होंने क्रीटी रंगमंच और आयोनियन द्वीपों की नाट्य परंपरा पर अनेक अध्ययन लिखे और उस शोध को मंच पर उतारा। उनके द्वारा पुनर्जीवित पुरानी कृतियों में कोर्नारोस का Ερωτόκριτος (एरोतोक्रितोस), ख़ोर्तात्सिस की Ερωφίλη (एरोफ़िली), कात्साइतिस की Ιφιγένεια εν Ληξουρίω (लिक्सूरी में इफ़िजेनिया), जिसे उन्होंने एडिनबरा महोत्सव में प्रस्तुत किया, और मोंत्सेलेज़े की Ευγένα (एवगेना) शामिल हैं। उन्होंने यूनानी और विदेशी लेखकों के नाटकों का अनुवाद भी किया।
प्राचीन नाटक उनके काम के केंद्र में था। राष्ट्रीय रंगमंच के लिए उन्होंने 1972 में एपिडॉरस में सोफ़ोक्लीज़ का Ηλέκτρα (इलेक्ट्रा) और 1975 में यूरिपिडीज़ का Βάκχαι (बाक्काई) निर्देशित किया। आम्फ़ी-थियात्रो, जो कई वर्षों तक प्लाका की आद्रियानू गली में स्थित रहा, ने 95 प्रस्तुतियाँ कीं और लगभग तीस अंतरराष्ट्रीय समारोहों में भाग लिया, हर प्रस्तुति के लिए एक विद्वत्तापूर्ण कार्यक्रम-पुस्तिका प्रकाशित करते हुए। उन्होंने यूनानी राष्ट्रीय ऑपेरा के लिए कई ऑपेरा भी निर्देशित किए, जिनमें अंतिम 2014 में मास्से का वेर्थर था। उनके पुरस्कारों में 1988 में एक ओरेस्टिया के लिए मिला कारोलोस कून पुरस्कार शामिल था। उनकी अंतिम प्रस्तुति Αμύντας (आमिंतास), जिसे गेओर्गियोस मोर्मोरिस की रचना माना जाता है, 8 जुलाई 2016 को हेरोडेस एटिकस के ओडियन में मंचित हुई।
आज के यूनान में विरासत
उनका काम यूनानी रंगमंच-शोध और मंच पर जीवित है। 2017 में एथेंस महोत्सव ने Αμύντας (आमिंतास) को उनकी बेटी, निर्देशक कातेरीना एवांगेलातू, की देखरेख में फिर प्रस्तुत किया; वे 2019 में एथेंस और एपिडॉरस महोत्सव की कलात्मक निदेशक नियुक्त हुईं। 2022 में केफ़ालोनिया में एथेंस अकादमी के सहयोग से हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने उनके रंगमंच की पड़ताल की। उनकी प्रस्तुतियों पर यूनानी अख़बारों की कई समीक्षाएँ राष्ट्रीय रंगमंच के अभिलेखागार में डिजिटल रूप में उपलब्ध हैं। 1972 की वह कतरन खोजें जिसका शीर्षक Μία νέα «Ηλέκτρα» του ’72 (’72 की एक नई इलेक्ट्रा) है, और उसका यूनानी शीर्षक पढ़ें। फिर एक मंचीय क्रिया लें और उसे यूनानी में दो बार कहें: सुझाव के रूप में, Ίσως θα μπορούσες να γυρίσεις αργά (शायद तुम धीरे से मुड़ सकते हो), और आदेश के रूप में, Γύρνα αμέσως! (तुरंत मुड़ो!)। ये हमारे अपने अभ्यास-वाक्य हैं।
क्या आप जानते हैं?
- एक प्रोफ़ेसर के उल्लेख के बाद उन्हें अपनी पहली प्रस्तुति फ़ोर्तुनातोस का पाठ एक किताबों की दुकान में मिला।
- उनका अंतिम ऑपेरा निर्देशन, मास्से का वेर्थर, 2014 में एथेंस के ओलंपिया थिएटर में मंचित हुआ।
- आम्फ़ी-थियात्रो की हर प्रस्तुति के साथ रंगमंच-विद्वानों की ज़िम्मेदारी में तैयार एक कार्यक्रम-पुस्तिका आती थी।
- 2016 में जब उनसे पूछा गया कि इतने वर्षों तक उन्हें किसने राह दिखाई, तो उन्होंने एक शब्द में उत्तर दिया: Το ψώνιο (जुनून)।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Φορτουνάτος | फ़ोर्तुनातोस — फ़ोस्कोलोस की क्रीटी कॉमेडी, उनकी पहली प्रस्तुति | c. 1961 |
| Ηλέκτρα | इलेक्ट्रा — सोफ़ोक्लीज़, राष्ट्रीय रंगमंच, एपिडॉरस | 1972 |
| Βάκχαι | बाक्काई — यूरिपिडीज़, राष्ट्रीय रंगमंच, एपिडॉरस | 1975 |
| Βέρθερος | वेर्थर — मास्से, यूनानी राष्ट्रीय ऑपेरा | 2014 |
| Αμύντας | आमिंतास — मोर्मोरिस की रचना मानी जाती है, हेरोडेस एटिकस का ओडियन | 2016 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Τρία πράγματα είναι διαχρονικά: η γέννηση, ο έρωτας και ο θάνατος.
Tría prágmata íne diachroniká: i génnisi, o érotas ke o thánatos.
तीन चीज़ें कालातीत हैं: जन्म, प्रेम और मृत्यु।


























































