जीवन
किवेली का जन्म 1888 में हुआ। उनका पूरा नाम किवेली आद्रियानू या आंद्रियानू दर्ज है, पर यूनानी दर्शक उन्हें बस पहले नाम से जानते थे। लड़कपन में उन्होंने उच्चारण की शिक्षा ली और पंद्रह वर्ष की होने से पहले एथेंस के शाही रंगमंच के नए स्थापित नाट्य विद्यालय में दाख़िला लिया, जो जल्द ही बंद हो गया। फिर कोंस्तांतिनोस ख्रिस्तोमानोस की नेआ स्कीनी (नया मंच) ने उन्हें रखा, जो आधुनिक यूरोपीय और यूनानी नाटक मंचित करने वाली मंडली थी। दिसंबर 1901 में उन्होंने इब्सन के द वाइल्ड डक में युवा हेडविग की भूमिका निभाई; हेडविग के पिता की भूमिका अभिनेता मित्सोस मिरात ने निभाई, जिनसे बाद में उनकी एक बेटी हुई, अभिनेत्री मिरांदा मिरात।
1908 तक वे अपनी मंडली Θίασος Κυβέλης Αδριανού (किवेली आद्रियानू मंडली) चला रही थीं, जो एथेंस, दूसरे यूनानी शहरों और विदेशों के यूनानी समुदायों, जैसे कॉन्स्टेंटिनोपल और मिस्र, में प्रदर्शन करती थी। वे और मारिका कोतोपूली अपने समय की प्रमुख अभिनेत्रियाँ थीं और ग्रिगोरियोस ज़ेनोपुलोस के हर नए नाटक के लिए होड़ करती थीं। 1917 में, राष्ट्रीय विभाजन के दौरान, शाही अधिकारियों ने एलेफ़्थेरियोस वेनिज़ेलोस का समर्थन करने के कारण उन्हें शाही रंगमंच से बाहर कर दिया। राजनेता गेओर्गियोस पापांद्रेउ के साथ उनके संबंध से एक संतान हुई और 1920 के दशक के अंत में विवाह हुआ, जो 1940 के दशक के अंत में अलगाव पर समाप्त हुआ।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद वे राष्ट्रीय रंगमंच से जुड़ीं, जहाँ उन्होंने 1951 से 1967 तक प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। 26 मई 1978 को उनका निधन हुआ।
कृतियाँ
किवेली की कला मंच पर जीवित थी, इसलिए उनका काम किताबों में नहीं, बल्कि कार्यक्रम-पत्रों, तस्वीरों, समीक्षाओं और प्रदर्शन-अभिलेखों में बचा है। ओस्लो विश्वविद्यालय का IbsenStage डेटाबेस उन्हें 1901 से 1930 के बीच इब्सन के अड़तालीस प्रदर्शनों में दर्ज करता है। हेडविग के बाद उन्होंने हेड्डा गैबलर में थेआ एल्वस्टेड और बाद में स्वयं हेड्डा, घोस्ट्स में रेगीने और सबसे बढ़कर ए डॉल्स हाउस में नोरा की भूमिका निभाई; यह भूमिका उन्होंने 1907 से 1930 तक एथेंस, पिरेयस, वोलोस और अन्य जगहों पर की। यूनानी नाटक भी उतने ही केंद्रीय थे: 1978 में To Vima अख़बार के शोक-लेख ने उनकी सफलताओं में ज़ेनोपुलोस के Φωτεινή Σάντρη (फ़ोतिनी सांद्री) और Πειρασμός (प्रलोभन) गिनाए।
उनके बाद के करियर का राष्ट्रीय रंगमंच के डिजिटल अभिलेखागार में विस्तृत दस्तावेज़ है। 1951 में उन्होंने जेम्स ब्राइडी के डैफ़नी लॉरियोला में, निकोस गात्सोस के अनुवाद में, लेडी पिट्स की भूमिका निभाई। 4 मार्च 1953 को वे ज़ेनोपुलोस के Το μυστικό της κοντέσσας Βαλέραινας (काउंटेस वालेरेना का रहस्य) के पहले प्रदर्शन में काउंटेस बनकर आईं, जिसका निर्देशन अलेक्सिस सोलोमोस ने किया। 1951 में दिवंगत हुए लेखक को श्रद्धांजलि के रूप में मंचित यह प्रस्तुति बहुत सफल रही। 1961 में वे लामिया, पात्रा, वोलोस, इओआन्निना और रोड्स के दौरे में और 1967 में निकोसिया में इस भूमिका में लौटीं। वे चेख़व के द सीगल (1957) में आर्कादिना, लोर्का के दोन्या रोसिता (1959) में, मानोस हादजिदाकिस के संगीत के साथ, मौसी, और बर्नानोस के डायलॉग्स ऑफ़ द कार्मेलाइट्स (1962) में वृद्ध मठाधीशा मादाम द क्रुआसी भी बनीं।
आज के यूनान में विरासत
किवेली को उन अभिनेत्रियों में याद किया जाता है जिन्होंने आधुनिक यूनानी अभिनय को आकार दिया। मूर्तिकार नतालिया मेला की बनाई उनकी प्रतिमा (1992) एथेंस में है, और निकोलाओस लित्रास की पेंटिंग अभिनेत्री किवेली (लगभग 1920) राष्ट्रीय कला दीर्घा की है। सिरोस द्वीप के एरमूपोली में, उनकी परपोती वालेंतीनी पोतामियानू के मार्गदर्शन में किवेली संस्थान उनके कपड़े, पत्र और तस्वीरें सँजोता है, और ERT की धारावाहिक Φλόγα και Άνεμος (लौ और हवा) उनकी कहानी को टेलीविज़न पर लाई है। अभ्यास के लिए विकिमीडिया कॉमन्स पर उनकी मंडली का 1910 का कार्यक्रम-पत्र खोलें। ΘΙΑΣΟΣ ΚΥΒΕΛΗΣ ΑΔΡΙΑΝΟΥ और ΤΙΜΗΤΙΚΗ ΠΑΡΑΣΤΑΣΙΣ पढ़ें और पुराने रूप को आज की यूनानी में लिखें: τιμητική παράσταση (सम्मान-प्रदर्शन)। फिर राष्ट्रीय रंगमंच के अभिलेखागार में 1953 की पात्र-सूची (διανομή) ढूँढें और बताएँ कि कौन किसकी भूमिका निभाता है: Η Κυβέλη υποδύεται την κοντέσσα Βαλέραινα (किवेली काउंटेस वालेरेना की भूमिका निभाती हैं)।
क्या आप जानते हैं?
- बाद में प्रसिद्ध कवि बने आंगेलोस सिकेलियानोस ने 1901 के उसी द वाइल्ड डक में एक छोटी भूमिका निभाई थी, जिसमें वे हेडविग थीं।
- मार्च 1904 में नेआ स्कीनी यह प्रस्तुति, उन्हें हेडविग के रूप में लेकर, एरमूपोली के अपोलोन थिएटर ले गई — सिरोस का वही शहर जहाँ आज किवेली संस्थान है।
- राष्ट्रीय रंगमंच के साथ काउंटेस वालेरेना के रूप में उनके अंतिम दर्ज प्रदर्शन मार्च 1967 में साइप्रस के निकोसिया में हुए।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Η αγριόπαπια | द वाइल्ड डक — हेडविग, नेआ स्कीनी | 1901 |
| Το κουκλόσπιτο | ए डॉल्स हाउस — नोरा | 1907 |
| Το μυστικό της κοντέσσας Βαλέραινας | काउंटेस वालेरेना का रहस्य — काउंटेस, राष्ट्रीय रंगमंच | 1953 |
| Ο γλάρος | द सीगल — आर्कादिना | 1957 |
| Δόνα Ροζίτα | दोन्या रोसिता — मौसी | 1959 |
| Διάλογοι καρμηλιτισσών | डायलॉग्स ऑफ़ द कार्मेलाइट्स — मादाम द क्रुआसी | 1962 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Η ζωή είναι χαρά. Δεν είναι χρέος.
I zoí íne chará. Den íne chréos.
जीवन आनंद है। यह कर्तव्य नहीं है।











































