जीवन
अलेक्सांद्रोस पापादियामांतिस का जन्म 4 मार्च 1851 को स्पोरादेस द्वीपसमूह के छोटे से द्वीप स्कियाथोस पर एक पादरी के घर हुआ। परिवार गरीब था और उनकी पढ़ाई धीमी और बार-बार रुकने वाली रही: उन्होंने स्कियाथोस और स्कोपेलोस में पढ़ाई की, फिर खाल्किदा के जिम्नेशियम में, पिरेयस में और अंत में एथेंस के वारवाकियो स्कूल में। 1872 में उन्होंने एक मित्र के साथ कई महीने माउंट एथोस पर बिताए, और इस अनुभव ने ऑर्थोडॉक्स उपासना से उनके गहरे लगाव को आकार दिया। उन्होंने एथेंस विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र संकाय में दाख़िला लिया, पर डिग्री कभी पूरी नहीं की।
1880 के दशक से वे एथेंस में Εφημερίς और Ακρόπολις जैसे अख़बारों और पत्रिकाओं के लिए अनुवादक और लेखक के रूप में मुश्किल से गुज़ारा करते रहे; उन्होंने अंग्रेज़ी और फ़्रांसीसी कथा-साहित्य का अनुवाद किया, जिसमें 1889 में दोस्तोयेव्स्की का अपराध और दंड भी शामिल है। उन्होंने कभी विवाह नहीं किया, किराए के कमरों में रहे, साधारण फटे-पुराने कपड़े पहनते रहे और प्लाका के अगियोस एलिसेओस के छोटे गिरजाघर में अपने चचेरे भाई, लेखक अलेक्सांद्रोस मोराइतिदिस, के साथ भजन गाते रहे। उनकी झिझक और धर्मनिष्ठा के कारण उन्हें ο κοσμοκαλόγερος उपनाम मिला, यानी संसार में रहने वाला भिक्षु।
1908 में शराब और गरीबी से थककर वे हमेशा के लिए स्कियाथोस लौट गए। वहीं 3 जनवरी 1911 को निमोनिया से उनकी मृत्यु हुई, उसी घर में जहाँ उनका जन्म हुआ था।
कृतियाँ
पापादियामांतिस ने किस्तों में छपे ऐतिहासिक उपन्यासों से शुरुआत की: Η Μετανάστις (प्रवासी स्त्री, 1879), Οι Έμποροι των Εθνών (राष्ट्रों के व्यापारी, 1882) और Η Γυφτοπούλα (बंजारन लड़की, 1884)। पर उनकी असली विधा कहानी थी। Το Χριστόψωμο (क्रिसमस की रोटी, 1887) से आगे उन्होंने लगभग 170 कहानियाँ लिखीं, जिनमें से अधिकांश स्कियाथोस पर आधारित हैं: मछुआरे, विधवाएँ, चरवाहे, हर गिरजाघर और हर जड़ी-बूटी को जानने वाली बूढ़ी औरतें, ईस्टर पर बच्चे, सर्दियों के तूफ़ानों में खोए जहाज़।
उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति Η Φόνισσα (हत्यारिन, 1903) है। बूढ़ी फ्रांगोयान्नू जीवन भर पुरुषों की सेवा करने के बाद इस नतीजे पर पहुँचती है कि गरीब परिवारों के लिए बेटियाँ केवल दुख हैं, और यह मानते हुए कि वह भला कर रही है, नवजात बच्चियों को मारने लगती है; कहानी के अंत में वह समुद्र की एक चट्टान पर ईश्वरीय और मानवीय न्याय के बीच फँस जाती है। Όνειρο στο κύμα (लहर पर सपना, 1900) एक युवा चरवाहे की चाँदनी में नहाती एक लड़की की याद है; Το Μοιρολόγι της Φώκιας (सील का शोकगीत, 1908) एक डूबे हुए बच्चे की कहानी है जिसका शोक एक सील मनाती है।
उनकी भाषा केवल उनकी अपनी है: वर्णन के लिए लचीली, संगीतमय कथारेवूसा, संवादों के लिए डिमोटिक और स्कियाथोस की बोली, और इन सबके नीचे बीज़ान्टिन भजनों की लय। प्रकृति, गरीबी और आस्था कभी सजावट नहीं होतीं; वे कहानी का पूरा संसार हैं।
आज के यूनान में विरासत
Η Φόνισσα यूनानी लाइसियम स्कूलों में पढ़ाई जाती है और इस पर कई बार फ़िल्में बनी हैं, सबसे हाल में 2023 में। हर क्रिसमस और ईस्टर पर अख़बार और वेबसाइटें उनकी त्योहार की कहानियाँ फिर से छापते हैं, और कुछ परिवारों में Το Χριστόψωμο या Στο Χριστό στο Κάστρο को ऊँची आवाज़ में पढ़ना एक परंपरा है। स्कियाथोस पर आप पापादियामांतिस हाउस देख सकते हैं, वह छोटा दो-मंज़िला घर जहाँ उनका जन्म और मृत्यु हुई और जो अब संग्रहालय है; द्वीप का हवाई अड्डा भी उन्हीं के नाम पर है। यूनानी सरकार ने उनकी मृत्यु की शताब्दी पर 2011 को पापादियामांतिस वर्ष घोषित किया। अधिकांश यूनानी शहरों में Παπαδιαμάντη नाम की सड़कें हैं, और उनका शब्द ο κοσμοκαλόγερος आज भी ऐसे धर्मपरायण व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है जो संसार में सादगी से जीता है।
क्या आप जानते हैं?
- उनकी एकमात्र प्रसिद्ध तस्वीर 1906 में लेखक पावलोस निरवानास ने एथेंस के देक्सामेनी चौक पर खींची थी; कहा जाता है कि पापादियामांतिस बड़ी अनिच्छा से राज़ी हुए थे।
- उन्होंने 1889 में अपना किराया चुकाने के लिए एक अख़बार के वास्ते दोस्तोयेव्स्की के अपराध और दंड का एक फ़्रांसीसी संस्करण से यूनानी में अनुवाद किया।
- उनके चचेरे भाई अलेक्सांद्रोस मोराइतिदिस भी प्रसिद्ध लेखक और भजन-गायक थे; दोनों को 'स्कियाथोस के दो अलेक्ज़ेंडर' कहा जाता था।
- उन्होंने स्वयं एथेंस के बारे में लगभग कुछ नहीं लिखा; उनकी लगभग सभी कहानियाँ स्कियाथोस के गिरजाघरों, तटों और जैतून के बाग़ों की ओर लौटती हैं।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Η Μετανάστις | प्रवासी स्त्री | 1879 |
| Οι Έμποροι των Εθνών | राष्ट्रों के व्यापारी | 1882 |
| Το Χριστόψωμο | क्रिसमस की रोटी | 1887 |
| Όνειρο στο κύμα | लहर पर सपना | 1900 |
| Η Φόνισσα | हत्यारिन | 1903 |
| Το Μοιρολόγι της Φώκιας | सील का शोकगीत | 1908 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Σαν να 'χαν ποτέ τελειωμό / τα πάθια κι οι καημοί του κόσμου.
San na 'chan pote teleiomo / ta pathia ki oi kaimoi tou kosmou.
मानो संसार के दुखों और पीड़ाओं का / कभी कोई अंत हो सकता हो।