जीवन
मारिया लूकिया हाज़िलाज़ारू, जिन्हें मात्सी कहा जाता था, जनवरी 1914 में थेस्सालोनिकी में पैदा हुईं; उनके पिता क्लेओन हाज़िलाज़ारोस एक व्यवसायी थे। पहले विश्वयुद्ध के दौरान परिवार फ़्रांस और इटली में रहा, और 1919 से एथेंस में बस गया। 1934 में, परिवार की संपत्ति डूब जाने के बाद, उनके माता-पिता दोनों कुछ ही महीनों के अंतर पर चल बसे। उन्होंने तीन बार विवाह किया; 1939 से 1943 तक उनके तीसरे पति अतियथार्थवादी कवि आन्द्रेयास एम्बिरिकोस थे।
जून 1944 में, जर्मन क़ब्ज़े के दौरान, प्रकाशक इकारोस ने मात्सी आन्द्रेऊ नाम से उनका पहला संग्रह छापा। दिसंबर 1945 में वे फ़्रांसीसी संस्थान की छात्रवृत्ति लेकर मातारोआ जहाज़ से पेरिस गईं। 1946 से 1954 तक वे वहाँ पिकासो के भतीजे, कातालान चित्रकार ख़ावियेर विलातो के साथ रहीं; वे स्वयं पिकासो से भी मिलीं और फ़्रांसीसी में लिखने लगीं।
1958 में वे एथेंस लौटीं और 1964 तक यूनानी राष्ट्रीय पर्यटन संगठन में काम किया, फिर दोबारा पेरिस चली गईं। 1973 से वे फिर एथेंस में रहीं और यूनान के कमर्शियल बैंक के जनसंपर्क विभाग में काम किया। 1984 में फ़्रीदा लियाप्पा की ERT शृंखला Γυναικεία πορτραίτα (स्त्रियों के चित्र) की फ़िल्म में उन्होंने अपने जीवन के बारे में बताया और अपनी कविताएँ पढ़ीं। 16 जून 1987 को एथेंस में उनका निधन हुआ।
कृतियाँ
Μάης, Ιούνης και Νοέμβρης (मई, जून और नवंबर, 1944) से इकारोस की आधुनिक यूनानी कविता की एक नई शृंखला शुरू हुई, जिसमें जल्द ही निकोस एंगोनोपूलोस की Μπολιβάρ (बोलिवार) भी छपी। यह किताब तब आई जब अख़बारों के आलोचक अतियथार्थवाद का मज़ाक उड़ा रहे थे, और आलोचक मिखाइल रोदास ने उनकी कविताओं पर भी हमला किया। बाद में उन्होंने बताया कि ये कविताएँ उन्होंने लगभग बिना रुके लिखीं, फिर बार-बार काटीं और बदलीं, जब तक कि बस बहुत थोड़ा-सा बचा रहे, "जैतून की गुठली जैसा"।
उनकी भाषाओं को अलग-अलग समझना ज़रूरी है। पेरिस में उन्होंने गी लेवी मानो के छोटे प्रकाशन से फ़्रांसीसी में दो किताबें छापीं: Cinq fois (पाँच बार, 1949) और La Frange des mots (शब्दों की झालर, 1954)। उन्होंने यूनानी लोकगीतों का फ़्रांसीसी अनुवाद Chants populaires des Grecs (1951) भी किया। यूनानी में उन्होंने Κρυφοχώρι (छिपा गाँव, 1951) लिखा, और उनकी यूनानी कविताएँ Έρως μελαχρινός (साँवला एरोस, 1979) में संकलित हुईं। 7 × 3 (1984) में यूनानी, फ़्रांसीसी और अंग्रेज़ी पाठ हैं, और Το δίχως άλλο (हर हाल में, 1985) उनका अंतिम संग्रह था।
उनकी कविताएँ छोटी, ऐंद्रिय और शरीर, प्रकृति तथा रोज़मर्रा की चीज़ों से लिए गए चौंकाने वाले बिंबों से भरी हैं। वे स्वयं अपने लेखन को उत्तर-अतियथार्थवादी (μεταϋπερρεαλιστικό) कहती थीं।
आज के यूनान में विरासत
लंबे समय तक हाज़िलाज़ारू के पाठक कम रहे, पर उनकी मृत्यु के बाद रुचि बढ़ी है। इकारोस आज भी Ποιήματα 1944–1985 छापता है; ख़्रीस्तोस दानियिल ने 2012 में उनकी सचित्र जीवनी प्रकाशित की, और 2013 में पेरिस से एम्बिरिकोस को लिखे उनके पत्र (1946–1947) छपे। 2022 में साहित्यिक पत्रिका Χάρτης (ख़ार्तिस) ने उन पर एक बड़ा विशेष खंड निकाला, जिसमें उनकी कविताओं पर आधारित एक नाट्य-प्रस्तुति की भी चर्चा हुई। पत्रकार स्तातिस त्सांगारूसियानोस के अनुसार मानोस हाजिदाकिस ने उनके काम को "स्त्री की कविता, पूरी तरह आवेग" कहा था।
आज़माइए: यूनानी शीर्षक Μάης, Ιούνης και Νοέμβρης ज़ोर से पढ़िए, उसके पास औपचारिक रूप Μάιος, Ιούνιος और Νοέμβριος लिखिए, फिर अपनी कोई तारीख़ बोलिए, जैसे «Γεννήθηκα στις 3 Μαΐου» (मेरा जन्म 3 मई को हुआ)।
क्या आप जानते हैं?
- वे कहती थीं कि वे तीन भाषाएँ बोलती हैं: माता-पिता के स्थान बदलने के कारण उन्होंने पहले अंग्रेज़ी, फिर इतालवी और यूनान लौटने के बाद ही यूनानी सीखी।
- उनके अनुसार उनके तत्त्वमीमांसीय और दार्शनिक विचार फ़्रांसीसी में आते थे, और वे अक्सर यूनानी शब्द व्यर्थ खोजती रहती थीं।
- वे औपचारिक εσείς (आप) की जगह अनौपचारिक εσύ (तुम) पसंद करती थीं और उसे "दोस्ती की ओर एक क़दम" कहती थीं।
- उनकी पहली किताब के आवरण पर चित्रकारों दियामांतोपूलू और मानूसाकिस की चार रंगों वाली काष्ठ-छाप थी।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Μάης, Ιούνης και Νοέμβρης | मई, जून और नवंबर | 1944 |
| Cinq fois | पाँच बार (फ़्रांसीसी में) | 1949 |
| Κρυφοχώρι | छिपा गाँव | 1951 |
| La Frange des mots | शब्दों की झालर (फ़्रांसीसी में) | 1954 |
| Έρως μελαχρινός | साँवला एरोस | 1979 |
| Το δίχως άλλο | हर हाल में | 1985 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Ψάχνεις τις σωστές λέξεις. Κι αυτό είναι ποίηση.
Psáchnis tis sostés léxis. Ki aftó íne poíisi.
तुम सही शब्द खोजते हो। और यही कविता है।





























































