जीवन
रचना के भीतर के संकेतों से डायोजनीज़ लाएर्तियोस को सामान्यतः तीसरी सदी ईस्वी में रखा जाता है। जन्मस्थान, पेशा और सटीक जीवनतिथियाँ निश्चित नहीं। लाएर्तियोस नाम किसी नगर को प्रमाणित नहीं करता। यात्रा या अध्यापन गढ़ने के बदले उपलब्ध लेखक और यूनानी पाठ से शुरू करें। वे रोमन शासन के यूनानीभाषी साहित्यिक जगत के हैं, वर्णित कई दार्शनिकों से सदियों बाद के।
विशेषतः उन्हें चौथी सदी ईसापूर्व के सिनोपे के सिनिक डायोजनीज़ से अलग रखें, जिनकी उकसाने वाली कथाएँ प्रसिद्ध हैं। वे छठी पुस्तक के विषय हैं, संग्रह के लेखक नहीं। लाएर्तियोस अक्सर लुप्त परंपराओं से जीवनियाँ, विचार, पुस्तकसूचियाँ, उक्तियाँ और दस्तावेज जुटाते हैं। किसी प्रामाणिक लेखक का नाम लेना प्रत्यक्ष मूलपाठ पढ़ने का प्रमाण नहीं। वे अपनी कविताएँ भी जोड़ते हैं। इस तरह सामग्री का संयोजक दिखता है, अतीत की अदृश्य खिड़की नहीं। अनिश्चित जीवनी चयन और संप्रेषण पर ध्यान दिलाए, काल्पनिक व्यक्तिगत विवरण पर नहीं।
कृतियाँ

उपलब्ध प्रसिद्ध दार्शनिकों के जीवन दस पुस्तकों का संग्रह है। नीचे चार प्रविष्टियाँ उसी के भाग हैं, पुस्तकक्रम में; ज्ञात प्रकाशनतिथियों वाली चार स्वतंत्र रचनाएँ नहीं। पहली में आरंभ और ज्ञानी, दूसरी में सुकरात, छठी में सिनिक, दसवीं में एपीक्यूरस हैं। क्रम दार्शनिक उत्तराधिकार भी देखता है, केवल आधुनिक समयरेखा नहीं।
उक्ति कथाकार की भूमिका से है: अनाक्सिमांद्रोस और पाइथागोरस से जुड़ी दो शुरुआतें या शाखाएँ प्रस्तावित हैं। यह उनका संगठन है, सभी परंपराओं का सर्वमान्य इतिहास नहीं। कहीं वर्णन, कहीं उद्धृत दस्तावेज हैं। दसवीं पुस्तक एपीक्यूरस के तीन पत्र और प्रमुख सिद्धांत बचाती है। भीतर के पाठ अपने आरोपित लेखक को रखते हैं; संप्रेषण उन्हें लाएर्तियोस की राय नहीं बनाता। मजेदार कथा भी स्वतः प्रमाणित घटना नहीं। पढ़ते समय स्रोत, वैकल्पिक वृत्तांत और आवाज का बदलाव पहचानें। संरक्षण महत्व देता है, हर सूचना फिर भी जाँच माँगती है।
आज के यूनान में विरासत
एक यूनानी स्रोतकार्ड बनाएँ: दार्शनिक, बताने वाला लेखक, पुस्तक और खंड। “डायोजनीज़ लाएर्तियोस, VII.23” सातवीं पुस्तक, खंड 23 है। आधुनिक यूनानी में αναφέρει ότι या παραθέτει τα λόγια से सार लिखें, दूसरे की आवाज की शुरुआत रेखांकित करें। βίος और βιογραφία को रोजमर्रा ζωή से मिलाएँ। इससे कथनक्रिया, संदर्भ और लेखक/विषय भेद सीखते हैं। अंत में दो वाक्य: पाठ क्या कहता है और प्रमाण क्या निष्कर्ष देता है। यूनानी सार दोनों स्पष्ट रखे।
क्या आप जानते हैं?
- वे जीवनीकार हैं, सिनिक डायोजनीज़ नहीं।
- संग्रह में दस पुस्तकें हैं।
- दसवीं एपीक्यूरस के नाम के तीन पत्र बचाती है।
- जीवनतिथियाँ और गृहनगर अनिश्चित हैं।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Βίοι φιλοσόφων, Α΄ | जीवन I: आरंभ और ज्ञानी | 3rd c. AD (part of one collection; undated) |
| Βίοι φιλοσόφων, Β΄ | जीवन II: सुकरात और अन्य | 3rd c. AD (part of one collection; undated) |
| Βίοι φιλοσόφων, Ϛ΄ | जीवन VI: सिनिक | 3rd c. AD (part of one collection; undated) |
| Βίοι φιλοσόφων, Ι΄ | जीवन X: एपीक्यूरस | 3rd c. AD (part of one collection; undated) |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Φιλοσοφίας δὲ δύο γεγόνασιν ἀρχαί
आज की यूनानी मेंΗ φιλοσοφία είχε δύο αφετηρίες.
Philosophias de dyo gegonasin archai
दर्शन की दो शुरुआतें हुई हैं।



































