जीवन
रीता बूमी का जन्म 1906 में सिरोस में हुआ। बचपन में ही, लगभग 1919 में, वे लंबे समय से चल रही बाल पत्रिका Η Διάπλασις των Παίδων (बच्चों का गठन) में कविताएँ छपवा रही थीं। लगभग 1920 में, किशोरावस्था में ही, वे सिसिली के सिराक्यूज़ में बस गईं, जहाँ उन्होंने शिक्षाशास्त्र पढ़ा और मॉन्टेसरी पद्धति का प्रशिक्षण लिया; वहाँ जाते समय उनकी सही उम्र को लेकर स्रोतों में थोड़ा अंतर है। 1929 में वे सिरोस लौटीं, उसी वर्ष उनकी कविता Μικρέ μου αλήτη… (मेरे नन्हे आवारा…) एथेंस की पत्रिका Νέα Εστία (नया चूल्हा) में छपी।
यूनान लौटकर वे 1929 से पत्रिका Ιόνιος Ανθολογία (आयोनियन संकलन) की प्रधान संपादक रहीं, 1930 से 1932 तक पत्रिका Κυκλάδες (किक्लादेस) प्रकाशित की और 1930 से 1933 तक बाल-कल्याण की एक संस्था का संचालन किया। 1936 में उन्होंने कवि निकोस पाप्पास से विवाह किया। दंपति लगभग 1940 तक उनके गृहनगर त्रिकाला में रहे और फिर जीवन भर के लिए एथेंस में बस गए।
वे पत्रिकाओं और अख़बारों में पत्रकार और अनुवादक के रूप में आजीविका कमाती थीं, जिनमें Νέα Εστία और 1957 से 1960 तक वामपंथी दैनिक Η Αυγή (भोर) शामिल थे। वामपंथ के प्रति प्रतिबद्ध, उन्होंने एथेंस में जर्मन क़ब्ज़े का दौर झेला और उस अनुभव को कविता में बदला। 1956 से 1958 तक उन्होंने अपना कविता-पत्र Εφημερίδα των ποιητών (कवियों का अख़बार) भी निकाला। 1984 में एथेंस में उनका निधन हुआ।
कृतियाँ
उनका पहला संग्रह Τα τραγούδια στην αγάπη (प्रेम के लिए गीत) 1930 में आया। दूसरे, Οι σφυγμοί της σιγής μου (मेरे मौन की धड़कन), को 1935 में एथेंस अकादमी से सम्मान मिला: राष्ट्रीय पुस्तक केंद्र का अभिलेखागार इसे प्रथम प्रशंसा कहता है, जबकि प्रिंसटन में उनके काग़ज़ात की सूची इसे प्रथम पुरस्कार कहती है। युद्ध ने उनकी आवाज़ बदल दी। Αθήνα · Δεκέμβρης 1944 (एथेंस · दिसंबर 1944) ने 1945 में राष्ट्रीय प्रतिरोध का प्रथम पुरस्कार जीता। 1949 में, जिस वर्ष उनका इतालवी संग्रह Ritorno in Ortigia (ओर्तीजिया वापसी) आया, उन्हें सिराक्यूज़ का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक Χίλια σκοτωμένα κορίτσια (हज़ार मारी गई लड़कियाँ, 1963) प्रतिरोध में भाग लेने के कारण मृत्युदंड पाने वाली स्त्रियों के अंतिम शब्द प्रस्तुत करती है और नामों की एक सूची को काव्यात्मक स्मारक बना देती है। बाद के संग्रहों में Φως ιλαρόν (आनंदमय प्रकाश, 1966) है, जिसका नाम एक प्राचीन ईसाई संध्या-स्तुति से लिया गया है। 1975 में उन्होंने कहानियाँ Όταν πεινούσαμε και πολεμούσαμε (जब हम भूखे थे और लड़ रहे थे) प्रकाशित कीं, जो 1941–45 के दौर में घटती हैं। आलोचक उनके लेखन को प्रकृति-प्रेम में रचा-बसा, ऐंद्रिय और गीतात्मक बताते हैं, जिसमें युद्ध के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रश्न और प्रबल होते हैं।
अनुवाद उनकी अपनी कविताओं के साथ-साथ चलता रहा। उन्होंने शोलोख़ोव के धीरे बहे दोन रे, बेकेट के मर्फ़ी और कई बुल्गारियाई तथा रोमानियाई कवियों का यूनानी में अनुवाद किया, और निकोस पाप्पास के साथ विश्व कविता के संकलन तैयार किए।
आज के यूनान में विरासत
बूमी-पापा यूनानी कवियों की दो विश्वयुद्धों के बीच की पीढ़ी से हैं, और युद्ध के बाद की उनकी किताबों ने उन्हें प्रतिरोध की स्मृति की प्रमुख आवाज़ बना दिया। आलोचक मार्कोस अव्येरिस ने स्पेनिश गणतंत्रवादी वक्ता दोलोरेस इबारूरी के नाम पर उन्हें यूनानी कविता की पासियोनारिया कहा। उनके काग़ज़ात, निकोस पाप्पास के काग़ज़ात के साथ, प्रिंसटन विश्वविद्यालय पुस्तकालय में सुरक्षित हैं। एथेंस में समकालीन सामाजिक इतिहास अभिलेखागार (ΑΣΚΙ) उनकी कविता Αν βγω περίπατο με τις νεκρές μου φίλες (अगर मैं अपनी मृत सहेलियों के साथ सैर पर निकलूँ) की एक पृष्ठ की प्रति रखता है, जिसने बाद में एक छोटी जर्मन-यूनानी फ़िल्म-कविता को प्रेरित किया। आज़माइए: SearchCulture.gr पर यह शीर्षक खोजें। फिर उनके पाँच शीर्षकों को तीन यूनानी लेबलों में बाँटें, ποίημα (कविता), συλλογή (संग्रह) या μετάφραση (अनुवाद), और संग्रहों को क्रम से गिनें: η πρώτη συλλογή, η δεύτερη συλλογή, η τρίτη συλλογή।
क्या आप जानते हैं?
- बचपन में, लगभग 1919 में, उन्होंने बाल पत्रिका Η Διάπλασις των Παίδων में कविताएँ छपवाईं।
- सिसिली में उन्होंने मॉन्टेसरी पद्धति की शिक्षिका के रूप में प्रशिक्षण लिया।
- उनकी एक कविता-पुस्तक, Ritorno in Ortigia, इतालवी में लिखी गई है।
- रोमानिया राज्य और बुखारेस्ट की अकादमी ने भी उन्हें सम्मानित किया।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Τα τραγούδια στην αγάπη | प्रेम के लिए गीत — पहला संग्रह | 1930 |
| Οι σφυγμοί της σιγής μου | मेरे मौन की धड़कन | 1935 |
| Αθήνα · Δεκέμβρης 1944 | एथेंस · दिसंबर 1944 | 1945 |
| Χίλια σκοτωμένα κορίτσια | हज़ार मारी गई लड़कियाँ | 1963 |
| Φως ιλαρόν | आनंदमय प्रकाश | 1966 |
| Όταν πεινούσαμε και πολεμούσαμε | जब हम भूखे थे और लड़ रहे थे — कहानियाँ | 1975 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Θα την έλεγα η Πασιονάρια της ελληνικής ποίησης.
Tha tin éléga i Pasionária tis ellinikís poíisis.
मैं उन्हें यूनानी कविता की पासियोनारिया कहूँगा।





























































