जीवन
एलिसावेत मूत्ज़ान का जन्म 2 अक्तूबर 1801 को आयोनियन द्वीपों के ज़ाकिन्थोस में एक पुराने कुलीन परिवार में हुआ; उनके माता-पिता फ़्रांगिस्कोस मूत्ज़ान और आंगेलिकी सिगूरू थे। उनका नाम Elisabeth, Moutza या Martinegou के रूप में भी मिलता है। उनके वर्ग की लड़की से अपेक्षा थी कि वह पारिवारिक घर में ही रहे। अपने वृत्तांत में वे एक बंद दुनिया का वर्णन करती हैं, जहाँ युवती मुश्किल से बाहर जा पाती थी और जहाँ पढ़ने की उनकी इच्छा आसपास के लोगों को अजीब लगती थी। उन्हें नियमित शिक्षा कम मिली और उन्होंने प्राचीन यूनानी और इतालवी पढ़कर बहुत कुछ ख़ुद सीखा।
उनकी सबसे गहरी इच्छा अध्ययन और लेखन के लिए जीने की थी। उन्होंने मठ में जाने की अनुमति माँगी, धार्मिक बुलावे से कम और विवाह तथा बंदी जीवन से बचने के लिए अधिक, पर परिवार ने मना कर दिया। उन्होंने चुपके से ज़ाकिन्थोस छोड़कर इटली जाने की असफल कोशिश भी की। वे याद करती हैं कि 1821 की यूनानी क्रांति की ख़बर ने उन्हें इतना उद्वेलित किया कि वे ख़ुद हथियार उठाना चाहती थीं। 1831 में, परिवारों के बीच लंबी बातचीत के बाद, उनका विवाह निकोलाओस मार्तिनेंगोस से हुआ। 1832 में बेटे एलिसावेतियोस के जन्म के कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई; कितने दिन बाद, इस पर स्रोतों में मतभेद है।
कृतियाँ

एलिसावेत ने बहुत लिखा: यूनानी और इतालवी में नाटक, कविताएँ, और प्राचीन रचनाओं के गद्य अनुवाद, जैसे आइस्किलस का Προμηθεύς Δεσμώτης (बंधा हुआ प्रोमेथियस) और होमर का Οδύσσεια (ओडिसी)। इनमें से लगभग सब खो गया। उनकी एकमात्र पूरी रचना के साथ केवल बिखरे अंश बचे हैं।
वह रचना है उनकी Αυτοβιογραφία (आत्मकथा), जो 1831 में पूरी हुई। प्रथम पुरुष में लिखी यह रचना परिवार को, और बाद के पाठकों को, समझाती है कि उन्होंने अपने लिए तय किया गया जीवन क्यों ठुकराया। वे घर में बंद दिनों, किताबों की भूख, समाज के लिए उपयोगी होने की आशा और अपने लेखन के भविष्य की चिंता का वर्णन करती हैं, जिन्हें वे लगभग अपनी संतान की तरह संबोधित करती हैं। भाषा आयोनियन उच्च वर्ग की बोलचाल की यूनानी है, जिसमें इतालवी उधार शब्द और चर्च की शब्दावली मिली है, इसलिए आज वह पुरानी और औपचारिक लगती है। उनके बेटे ने 1881 में एथेंस में इसे Η Μήτηρ μου (मेरी माँ) शीर्षक से प्रकाशित किया, पर कुछ अंश काट दिए, इसलिए आज हम संक्षिप्त रूप पढ़ते हैं। विद्वान इसे व्यापक रूप से किसी स्त्री द्वारा लिखा पहला आधुनिक यूनानी गद्य पाठ और आयोनियन द्वीपों के दैनिक जीवन की दुर्लभ प्रथम पुरुष गवाही मानते हैं।
आज के यूनान में विरासत
Αυτοβιογραφία आज आधुनिक यूनानी साहित्य की क्लासिक रचना है। यूनानी विद्यार्थी निम्न माध्यमिक के तीसरे वर्ष की पाठ्यपुस्तक Κείμενα Νεοελληνικής Λογοτεχνίας (आधुनिक यूनानी साहित्य के पाठ) में इसके अंश पढ़ते हैं। यह कई बार पुनः प्रकाशित हुई, सबसे हाल में 2021 में, और अंग्रेज़ी (1989) तथा फ़्रांसीसी (2020) में अनूदित हुई। दीदो सोतिरियू का किशोर उपन्यास Οι επισκέπτες (मेहमान, 1979) उनकी कहानी से संवाद करता है, और यूनानी रंगमंचों ने इसे मंच पर उतारा है। निकोलाओस कांतूनिस द्वारा बनाया उनका चित्र एथेंस की राष्ट्रीय चित्रशाला का है। आज़माएँ: उनका वाक्य «χωρίς να δύναμαι να πηγαίνω» पढ़ें, पुरानी क्रिया δύναμαι की जगह μπορώ रखें, फिर अपने स्कूली वर्षों पर दो वाक्य लिखें: Μπορούσα να… (मैं … कर पाता था) और Δεν μπορούσα να… (मैं … नहीं कर पाता था)।
क्या आप जानते हैं?
- उनके बेटे ने Αυτοβιογραφία को 1881 में प्रकाशित किया, उसके पूरा होने के ठीक पचास साल बाद।
- उन्होंने लिखा कि 1821 की क्रांति की ख़बर से उनका ख़ून गर्म हो उठा।
- उनका चित्र लगभग 1832 में ज़ाकिन्थोस के चित्रकार निकोलाओस कांतूनिस ने बनाया।
- पुस्तकालय सूचियाँ उनका नाम कई वर्तनियों में दर्ज करती हैं, जैसे Moutza, Moutsa और Martinegou।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Προμηθεύς Δεσμώτης (πεζή μετάφραση) | बंधा हुआ प्रोमेथियस — आइस्किलस का गद्य अनुवाद, अधिकांश खोया हुआ | ? |
| Οδύσσεια (πεζή μετάφραση) | ओडिसी — होमर का गद्य अनुवाद, अधिकांश खोया हुआ | ? |
| Αυτοβιογραφία | आत्मकथा — पूरी पांडुलिपि | 1831 |
| Η Μήτηρ μου | मेरी माँ — आत्मकथा का पहला, संक्षिप्त संस्करण, बेटे द्वारा प्रकाशित | 1881 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Μέρα και νύκτα κλεισμένη, χωρίς να δύναμαι να πηγαίνω μήτε εις εκκλησίαν, μήτε εις περιδιάβασιν
Méra ke nýkta klisméni, chorís na dýname na pigéno míte is eklisían, míte is peridiávasin
दिन-रात बंद, चर्च या सैर तक पर जाने में असमर्थ

















































