जीवन
लिसिपोस सिक्योन से थे, जो कोरिंथ के पास का एक नगर था और जहाँ चित्रकला तथा कांस्य-शिल्प की मज़बूत परंपरा थी। उनके जन्म और मृत्यु की सटीक तिथियाँ ज्ञात नहीं हैं। रोमन लेखक प्लिनी द एल्डर उनके उत्कर्ष को 113वें ओलंपियाड (328–325 ईसा-पूर्व) में, यानी सिकंदर महान के समय में रखते हैं, और उनके मिले काम ईसा-पूर्व चौथी सदी के उत्तरार्ध के बड़े हिस्से तक फैले लंबे करियर की ओर इशारा करते हैं। प्लिनी, यूनानी इतिहासकार सामोस के दूरिस का हवाला देकर, बताते हैं कि लिसिपोस का कोई गुरु नहीं था और उन्होंने एक साधारण कांस्य-कारीगर के रूप में शुरुआत की। जब उन्होंने चित्रकार यूपोम्पोस से पूछा कि किस पुराने उस्ताद का अनुसरण करें, तो उन्होंने लोगों की भीड़ की ओर इशारा करके कहा कि किसी दूसरे कलाकार की नहीं, स्वयं प्रकृति की नकल करनी चाहिए। यह बाद का एक किस्सा है, समकालीन दस्तावेज़ नहीं।
लिसिपोस वह मूर्तिकार बने जो सिकंदर से सबसे घनिष्ठ रूप से जुड़ा था। प्लूटार्क लिखते हैं कि उनकी मूर्तियाँ सिकंदर के रूप को, गर्दन के हल्के झुकाव समेत, सबसे अच्छी तरह दिखाती थीं, और स्वयं सिकंदर केवल लिसिपोस को ही अपना चित्रण करने योग्य मानते थे। प्लिनी जोड़ते हैं कि लिसिपोस ने सिकंदर को उनके बचपन से शुरू करके अनेक कृतियों में गढ़ा। वे एक प्रसिद्ध कहानी भी सुनाते हैं: मूर्तिकार हर मूर्ति के मेहनताने में से एक सोने का सिक्का अलग रख देते थे, और उनकी मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी को लगभग 1,500 सिक्के मिले। यह संख्या शायद बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है, पर इससे उनके विशाल उत्पादन की ख्याति झलकती है। प्लिनी उनके पुत्रों लाइप्पोस, बोएदास और यूथिक्रातेस को उनकी कार्यशाला में प्रशिक्षित मूर्तिकारों के रूप में गिनाते हैं।
कृतियाँ

लिसिपोस मुख्य रूप से कांसे में काम करते थे, और उनकी मूल मूर्तियों में से लगभग कोई भी नहीं बची। हम उन्हें प्राचीन वर्णनों, अभिलेख वाले आधारों और बाद की प्रतियों से जानते हैं, इसलिए हर श्रेय-निर्धारण में सावधानी चाहिए। प्लिनी कहते हैं कि उन्होंने पुरानी मूर्तियों के अधिक चौकोर अनुपात बदल दिए: सिर छोटे हुए, शरीर अधिक छरहरे और बाल अधिक बारीक, ताकि आकृतियाँ ज़्यादा लंबी दिखें। प्लिनी मूर्तिकार की यह उक्ति भी दर्ज करते हैं: पहले के कलाकार लोगों को वैसा बनाते थे जैसे वे थे, और वे उन्हें वैसा बनाते थे जैसे वे दिखते थे।
उनका सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ी Αποξυόμενος (अपने को खुरचकर साफ़ करने वाला) था। यह कांस्य मूर्ति एक युवक को दिखाती थी जो कसरत के बाद स्ट्रिजिल, यानी धातु के एक मुड़े हुए खुरचने वाले औज़ार, से अपनी बाँह से तेल और रेत हटा रहा है। रोम में अग्रिप्पा ने इसे अपने स्नानागार के सामने स्थापित किया; प्लिनी के अनुसार सम्राट तिबेरियस इसे अपने शयनकक्ष में ले गए, जब तक कि रंगमंच में हुए विरोध ने उन्हें इसे लौटाने पर मजबूर नहीं कर दिया। 1849 में त्रास्तेवेरे में मिली एक संगमरमर प्रति आज वेटिकन संग्रहालय में है। डेल्फ़ी में, फ़ारसालोस के दाओखोस के पारिवारिक स्मारक से खिलाड़ी आगियास की संगमरमर मूर्ति को लिसिपोस की एक कांस्य मूर्ति की संभावित प्रति माना जाता है। अन्य कृतियाँ केवल ग्रंथों से ज्ञात हैं: तारास (तारेंतुम) में चालीस हाथ ऊँची कांस्य ज़्यूस मूर्ति, Καιρός (उचित क्षण) की एक मूर्ति और हेराक्लीज़ की अनेक आकृतियाँ। नेपल्स का विशाल फ़ार्नेसे हेराक्लीज़, जिस पर प्रतिलिपिकार ग्लाइकोन के हस्ताक्षर हैं, लिसिपोस-शैली के एक मॉडल पर आधारित है।
आज के यूनान में विरासत
लिसिपोस शास्त्रीय से हेलेनिस्टिक मूर्तिकला की ओर बदलाव को समझने में मदद करते हैं, और उनका प्रभाव दूर तक पहुँचा: प्लिनी कहते हैं कि उनके शिष्य लिंडोस के खारेस ने रोड्स का विशालकाय बनाया। यूनान में उनकी शैली सबसे साफ़ डेल्फ़ी के पुरातत्व संग्रहालय में दिखती है, जहाँ आगियास दाओखोस समूह के साथ खड़ा है। एक छोटे अभ्यास के लिए वेटिकन अपोक्स्योमेनोस की एक तस्वीर खोलें और आधुनिक यूनानी में तीन वाक्य लिखें जो Πριν από την άσκηση (कसरत से पहले), Τώρα (अब) और Μετά (बाद में) से शुरू हों। उदाहरण: Πριν από την άσκηση άλειψε το σώμα του με λάδι (कसरत से पहले उसने शरीर पर तेल मला)। फिर एक कर्मवाच्य वाक्य जोड़ें, जैसे Το άγαλμα σώζεται σε αντίγραφο (मूर्ति एक प्रति में सुरक्षित है)। याद रखें कि तस्वीर रोमन संगमरमर प्रति की है, लिसिपोस की खोई हुई कांस्य मूर्ति की नहीं।
क्या आप जानते हैं?
- प्लिनी के अनुसार रोमन जनता रंगमंच में तब तक चिल्लाती रही जब तक तिबेरियस ने अपोक्स्योमेनोस लौटा नहीं दिया।
- रोड्स का विशालकाय लिंडोस के खारेस ने बनाया था, जिन्हें प्लिनी लिसिपोस का शिष्य कहते हैं।
- प्लिनी बताते हैं कि तारास की विशाल ज़्यूस मूर्ति इतनी अच्छी तरह संतुलित थी कि तूफ़ान उसे गिरा नहीं सकते थे।
- कवि पोसिडिप्पोस ने एक सूक्ति-कविता लिखी जिसमें लिसिपोस की काइरोस मूर्ति एक राहगीर के प्रश्नों का उत्तर देती है।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Αγίας (ανάθημα του Δαόχου) | आगियास: डेल्फ़ी में संगमरमर, लिसिपोस की कांस्य मूर्ति की संभावित प्रति | c. 337–332 BC |
| Αποξυόμενος | अपोक्स्योमेनोस (अपने को खुरचता खिलाड़ी): खोई कांस्य मूर्ति, वेटिकन में रोमन प्रति | c. 320 BC |
| Πορτρέτα του Μεγάλου Αλεξάνδρου | सिकंदर महान के चित्र: खोई कांस्य मूर्तियाँ | 4th c. BC |
| Δίας του Τάραντα | तारास का ज़्यूस: खोई विशाल कांस्य मूर्ति | 4th c. BC |
| Καιρός | काइरोस (उचित क्षण): ग्रंथों से ज्ञात खोई कांस्य मूर्ति | 4th c. BC |
| Ηρακλής (τύπος Φαρνέζε) | हेराक्लीज़, फ़ार्नेसे प्रकार: नेपल्स में ग्लाइकोन की प्रति का मॉडल | 4th c. BC |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Τίς πόθεν ὁ πλάστης; Σικυώνιος. Οὔνομα δὴ τίς; Λύσιππος.
आज की यूनानी मेंΠοιος είναι ο γλύπτης και από πού; Από τη Σικυώνα. Και το όνομά του; Λύσιππος.
Tís póthen ho plástēs? Sikyṓnios. Oúnoma dḕ tís? Lýsippos.
मूर्तिकार कौन है, और कहाँ से? सिक्योन से। और उसका नाम? लिसिपोस।

















































