जीवन
अथेनायोस के बारे में लगभग सब कुछ उनकी अपनी पुस्तक से ही पता चलता है। वे नील डेल्टा के एक पुराने यूनानी व्यापारिक नगर नौक्रातिस से थे, और एक अंश में वे वहाँ के लोगों को “मेरे नौक्रातिसवासी” कहते हैं। उन्होंने दूसरी शताब्दी ईस्वी के अंत और तीसरी के आरंभ में रोम में जीवन बिताया और लिखा। वे 192 में मरे सम्राट कोमोडस का उल्लेख अपने समय के व्यक्ति के रूप में करते हैं, इसलिए कृति उस वर्ष के बाद पूरी हुई। कुछ विद्वान संवाद के मुख्य वक्ता, टायर के उल्पियन, को 220 के दशक में मरे प्रसिद्ध विधिवेत्ता उल्पियन से जोड़ते हैं और इसलिए पुस्तक को बाद का मानते हैं; यह पहचान अनिश्चित है।
'विद्वानों का भोज' अथेनायोस की दो पहले की कृतियों का भी उल्लेख करता है, जो अब खो चुकी हैं: सीरिया के राजाओं का इतिहास, और आर्खिप्पोस की कॉमेडी Ἰχθύες ('मछलियाँ') में आई एक मछली पर एक छोटा अध्ययन। भोज के मेज़बान एक प्रतिष्ठित रोमन, लारेंसिस हैं; अतिथियों में वैयाकरण, दार्शनिक, संगीतकार और एक पात्र के रूप में पेर्गामोन के चिकित्सक गैलेन हैं। अथेनायोस पूरी कहानी अपने मित्र तिमोक्रातेस को प्लेटो के संवादों जैसी रूपरेखा में सुनाते हैं। उनके परिवार, शिक्षकों या मृत्यु के वर्ष के बारे में कुछ भी विश्वसनीय ज्ञात नहीं है।
कृतियाँ

Δειπνοσοφισταί पंद्रह पुस्तकों में बची है। सबसे पुरानी पूर्ण पांडुलिपि, जो संभवतः दसवीं शताब्दी में लिखी गई और अब वेनिस में है, पहली दो पुस्तकें, तीसरी का आरंभ और पुस्तक 11 व 15 के कुछ अंश खो चुकी है; ये हिस्से एक छोटे संक्षेप (एपिटोम) से ज्ञात हैं। संक्षेप कहता है कि पुस्तक की बनावट भोज की भव्यता की नकल करती है। विषय मेज़ और बातचीत के साथ चलते हैं: पुस्तक 3 में रोटियाँ, पुस्तक 7 में मछलियाँ, पुस्तक 13 में प्रेम और प्रसिद्ध स्त्रियाँ, पुस्तक 15 में मालाएँ। हर विषय उद्धरणों की प्रतियोगिता बन जाता है, क्योंकि अतिथि एक-दूसरे को कॉमेडी, इतिहास, चिकित्सा और कविता की पंक्तियों से जवाब देते हैं।
पुस्तक 7 में कथावाचक तिमोक्रातेस से वादा करता है कि वह मछलियों को वर्णक्रम में गिनाएगा ताकि वे याद रह सकें। पुस्तक 3 में अतिथि पोंतियानुस चौथी शताब्दी ईसा पूर्व के स्वादिष्ट भोजन के कवि आर्खेस्त्रातोस को उद्धृत करते हैं, जो लेसबोस के एरेसोस के जौ और एथेंस के बाज़ार की रोटी की प्रशंसा करता है। अथेनायोस बताते हैं कि यह कविता कई शीर्षकों से प्रचलित थी, जिनमें Γαστρονομία ('गैस्ट्रोनॉमी') और Ἡδυπάθεια ('आनंद का जीवन') हैं। परतें मायने रखती हैं: पंक्तियाँ आर्खेस्त्रातोस ने लिखीं, पोंतियानुस उन्हें उद्धृत करने वाला पात्र है, और पूरी बातचीत अथेनायोस ने रची। आर्खेस्त्रातोस के बचे अंश, और आलेक्सिस व आंतिफ़ानेस जैसे कवियों की खोई कॉमेडी की कई पंक्तियाँ, आज मुख्यतः ऐसे ही उद्धरणों के माध्यम से पढ़ी जाती हैं।
आज के यूनान में विरासत
अथेनायोस की मेज़ आज भी रोज़मर्रा की यूनानी में मौजूद है। Δείπνο (रात का भोजन) प्राचीन δεῖπνον है, और ψάρι (मछली) ὀψάριον से आया है, जो ὄψον का लघुरूप है; ὄψον पके भोजन का शब्द है, जिस पर अतिथि पुस्तक 7 में चर्चा करते हैं। एरेसोस, जिसके जौ की आर्खेस्त्रातोस ने प्रशंसा की, आज भी लेसबोस का एक गाँव है। यह करके देखें: इस पृष्ठ के आधुनिक यूनानी पाठ में आर्खेस्त्रातोस की रोटी वाली पंक्तियों से जुड़े वाक्य फिर से पढ़ें। फिर आधुनिक यूनानी में पाँच व्यंजनों का मेन्यू वर्णक्रम में लिखें, जैसे अथेनायोस ने अपनी मछलियों के साथ किया। अप्रत्यक्ष कथन में दो वाक्य जोड़ें: Ο Αρχέστρατος γράφει ότι το καλύτερο κριθάρι βγαίνει στην Ερεσό (आर्खेस्त्रातोस लिखता है कि सबसे अच्छा जौ एरेसोस से आता है) और Ο Ποντιανός παραθέτει τους στίχους του (पोंतियानुस उसकी पंक्तियाँ उद्धृत करता है)।
क्या आप जानते हैं?
- δειπνοσοφιστής शब्द δεῖπνον (रात का भोजन) और σοφιστής (विशेषज्ञ या सोफ़िस्ट) को जोड़ता है।
- पेर्गामोन के चिकित्सक गैलेन अतिथियों में एक पात्र के रूप में आते हैं और रोटियों पर भाषण देकर भोजन में देर कराते हैं।
- अथेनायोस कहते हैं कि उन्होंने पुस्तक 7 की मछलियों को वर्णक्रम में रखा ताकि वे आसानी से याद रहें।
- नाताले कोंती का लैटिन अनुवाद 1556 में वेनिस में छपा।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Περὶ τῶν ἐν Συρίᾳ βασιλευσάντων | सीरिया के राजाओं पर — खोया हुआ इतिहास, केवल एक उल्लेख से ज्ञात | ? |
| Μελέτη για τη θρᾷτταν στους «Ἰχθύες» του Αρχίππου | आर्खिप्पोस की 'मछलियाँ' में एक मछली पर अध्ययन — खोया हुआ प्रबंध | ? |
| Δειπνοσοφισταί, βιβλίο Γ΄ | 'विद्वानों का भोज', पुस्तक 3 — रोटियाँ और आर्खेस्त्रातोस | after 192 AD |
| Δειπνοσοφισταί, βιβλίο Ζ΄ | 'विद्वानों का भोज', पुस्तक 7 — मछलियों की वर्णक्रम सूची | after 192 AD |
| Δειπνοσοφισταί, βιβλίο ΙΓ΄ | 'विद्वानों का भोज', पुस्तक 13 — प्रेम, पत्नियाँ और गणिकाएँ | after 192 AD |
याद रखने लायक एक पंक्ति
ἵνα δὲ εὐμνημόνευτά σοι γένηται τὰ λεχθέντα, κατὰ στοιχεῖον τάξω τὰ ὀνόματα
आज की यूनानी मेंΓια να θυμάσαι εύκολα όσα ειπώθηκαν, θα βάλω τα ονόματα σε αλφαβητική σειρά.
hína dè eumnēmóneuta soi génētai tà lechthénta, katà stoicheîon táxō tà onómata
ताकि तुम्हें कही गई बातें आसानी से याद रहें, मैं नामों को वर्णक्रम में रखूँगा।

















































