जीवन
निकोस दिमु 1935 में एथेंस में जन्मे और 1954 में एथेंस कॉलेज से विद्यालयी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने म्यूनिख विश्वविद्यालय में दर्शन तथा अंग्रेज़ी और फ़्रांसीसी साहित्य पढ़ा। उनका काम विज्ञापन, पत्रकारिता, टेलीविज़न, रेडियो और फ़ोटोग्राफ़ी तक फैला। साहित्यिक और दार्शनिक प्रश्नों के साथ उन्होंने कंप्यूटर और कारों पर भी लिखा। कविता, गद्य, निबंध और व्यंग्य एक ही व्यापक लेखकीय यात्रा के भाग हैं। Η δυστυχία του να είσαι Έλληνας (यूनानी होने का दुख) 1975 में इकारोस से आया और उनका सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रंथ बना।
उन्होंने अपने जीवन को भी दीर्घकालीन साहित्यिक परियोजना बनाया। जिन गलियों में वे रहे, उनके आधार पर रचे चार भाग 2004 में Οι δρόμοι μου (मेरी गलियाँ) में एकत्र हुए। पाताकिस का विस्तारित संस्करण 2015 में आया। ईआरटी के लिए अपने लेख में उन्होंने बताया कि आत्मकथा लिखने में पंद्रह वर्ष लगे और शुरुआत बिखरे निजी किस्सों से हुई। बेनाकी संग्रहालय ने 2015 में प्रदर्शनी और सूची के माध्यम से उनके लेखन, तस्वीरों और प्रसारण-कर्म को साथ दिखाया। बाद की पुस्तकों में Μικρό εγχειρίδιο ορθολογισμού (και ανορθολογισμού) (तर्कवाद और अतर्कवाद की छोटी पुस्तिका, 2016) और Η αντίσταση στον Δαρβίνο και άλλα 13 ετερόδοξα κείμενα (डार्विन का विरोध और तेरह अन्य विधर्मी लेख, 2024) शामिल हैं।
कृतियाँ

Η δυστυχία του να είσαι Έλληνας (यूनानी होने का दुख, 1975) लगातार कथा के बजाय छोटे क्रमांकित विचारों का प्रयोग करता है। शुरुआत इच्छा और वास्तविकता के फ़ासले से होती है, फिर यूनानी आत्म-छवियों, मिथकों और भय की ओर जाती है। एमानुइल रोइदिस को समर्पण इसे सार्वजनिक निश्चितताओं को चुनौती देने की परंपरा से जोड़ता है। कथन लेखक के तर्क हैं, जिनसे सहमति या असहमति हो सकती है; वे हर यूनानी का निष्पक्ष विवरण नहीं। Μικρό εγχειρίδιο ορθολογισμού (και ανορθολογισμού) (तर्कवाद और अतर्कवाद की छोटी पुस्तिका, 2016) आलोचनात्मक चिंतन को अभ्यास की विधि बताता है, विरासत में मिला सिद्धांत नहीं।
Οι δρόμοι μου (मेरी गलियाँ, संकलन 2004, विस्तार 2015) सार्वजनिक बहस से निजी अनुभव की ओर जाता है। गलियाँ स्मृतियाँ व्यवस्थित करती हैं, लेकिन दिमु घटनाओं की सूची के बजाय आंतरिक वृत्तांत बताते हैं। कब्ज़े के दौर का बचपन, जर्मनी में पढ़ाई, काम और लेखन एक याद किए हुए जीवन के भाग हैं। विद्यार्थी अपनी स्मृति किसी जगह से शुरू कर सकते हैं। बचपन की गली चुनें, Όταν ήμουν παιδί… (जब मैं बच्चा था…) से शुरू करें, फिर बताएँ कहाँ रहते थे और स्कूल कैसे जाते थे। तीन मौलिक वाक्य पहला सरल आत्मकथात्मक अनुच्छेद बनाते हैं।
आज के यूनान में विरासत
दिमु का काम प्रकाशकों, प्रसारण अभिलेखों और बेनाकी प्रदर्शनी-सूची से उपलब्ध है। ईआरटी के Νίκος Δήμου: μια ζωή πιο αληθινή από μυθιστόρημα (निकोस दिमु: उपन्यास से अधिक सच्चा जीवन) में Οι δρόμοι μου (मेरी गलियाँ) लिखने का उनका अपना वृत्तांत है। छोटा आरंभ पढ़कर अपनी स्मृति-पर्ची बनाएँ। Όταν ήμουν παιδί… (जब मैं बच्चा था…), फिर Έμενα… (मैं रहता था…) और Πήγαινα στο σχολείο… (मैं स्कूल जाता था…) लिखें। याद करने के लिए तस्वीर या गली चुनें। अपने तीन वाक्य ज़ोर से पढ़ें और साथी से पूछें Πού έμενες; (तुम कहाँ रहते थे?)। पूरी आत्मकथा पढ़े बिना निजी अतीत का अभ्यास होगा।
क्या आप जानते हैं?
- 1975 का Η δυστυχία του να είσαι Έλληνας एमानुइल रोइदिस को समर्पित है।
- उनकी आत्मकथा निवास की गलियों पर आधारित चार भागों से विकसित हुई।
- बेनाकी संग्रहालय ने 2015 में उनका लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी साथ प्रस्तुत किया।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Η δυστυχία του να είσαι Έλληνας | यूनानी होने का दुख | 1975 |
| Οι δρόμοι μου | मेरी गलियाँ — संकलित आत्मकथा | 2004 |
| Μικρό εγχειρίδιο ορθολογισμού (και ανορθολογισμού) | तर्कवाद और अतर्कवाद की छोटी पुस्तिका | 2016 |
| Η αντίσταση στον Δαρβίνο και άλλα 13 ετερόδοξα κείμενα | डार्विन का विरोध और तेरह अन्य विधर्मी लेख | 2024 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Η αυτοβιογραφία μου πήρε δεκαπέντε χρόνια να γραφτεί.
I aftoviografía mou píre dekapénte chrónia na graftí.
मेरी आत्मकथा लिखने में पंद्रह वर्ष लगे।

























































































