जीवन
योर्गोस ज़ोंगोलोपुलोस, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Giorgos, George या Georgios Zongolopoulos भी कहा जाता है, 1903 में एथेंस में जन्मे। उन्होंने 1924 से 1930 तक एथेंस के ललित कला विद्यालय में थोमास थोमोपुलोस से मूर्तिकला सीखी। फिर शिक्षा मंत्रालय के वास्तुकला विभाग में विद्यालयों और अन्य भवनों की योजनाएँ बनाईं। वास्तुकला ने कलाकृति और उसके परिवेश के संबंध को उनकी निरंतर चिंता बनाने में मदद की।
1936 में उन्होंने चित्रकार एलेनी पास्कालिदु-ज़ोंगोलोपुलु से विवाह किया। दोनों ने लंबा कलात्मक जीवन तथा यूनान और पेरिस में कार्यशालाएँ साझा कीं। फ़्रांसीसी सरकार की छात्रवृत्ति उन्हें 1949 में पेरिस में मार्सेल जिमों के स्टूडियो ले गई। 1950 के दशक के आरंभ में इटली में अध्ययन ने कांस्य ढलाई और ऐतिहासिक मूर्तिकला का ज्ञान बढ़ाया। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों से यूनान के बाहर के दर्शकों ने उनकी बदलती कला जानी।
वे धीरे-धीरे पहचानी जा सकने वाली मानव आकृतियों से सरल, अमूर्त संरचनाओं की ओर गए। धातु, खाली जगह, पानी और गति ने मूर्तिकला की संभावनाएँ बढ़ाईं। सार्वजनिक परियोजनाएँ इस खोज को रोज़ गुज़रने वाले स्थानों में लाईं। 2004 में उन्होंने अपना फ़ाउंडेशन बनाया और उसी वर्ष उनका निधन हुआ। फ़ाउंडेशन एथेंस के साइकिको में उनके पुराने घर और स्टूडियो में दोनों कलाकारों की कृतियाँ रखता है तथा सार्वजनिक मूर्तियों के रेखाचित्र, मॉडल और व्यावहारिक निर्णय दर्ज करता है।
कृतियाँ

राष्ट्रीय गैलरी की कांस्य चित्रमूर्ति Ο ζωγράφος Μίμης Βιτσώρης (चित्रकार मिमिस वित्सोरिस, 1934) मानव चेहरे में उनकी आरंभिक रुचि दर्शाती है। Μνημείο Ζαλόγγου (ज़ालोंगो स्मारक), जिसका अनावरण 1961 में हुआ, सफ़ेद पत्थर की जुड़ी और सरलीकृत आकृतियों से सूली की महिलाओं को याद करता है। वास्तुकार पात्रोक्लोस कारांतिनोस के सहयोग से इसका आकार और रूपरेखा पर्वतीय परिदृश्य के अनुरूप सोची गई।
Γλυπτό ΔΕΘ (थेसालोनिकी अंतरराष्ट्रीय मेले की मूर्ति, 1966) अमूर्त धातु-रूपों को शहरी परिवेश में लाती है। Ομπρέλες (छतरियाँ) में परिचित छतरी बारिश से बचाव के बजाय ढाँचा बन जाती है। 1997 की तटीय स्थापना अपनी रेखाओं के बीच से समुद्र और आकाश देखने देती है। प्रकाश और दृष्टिकोण बदलने पर मूर्ति और परिवेश का संबंध बदलता है।
दूसरी जगह पानी सचमुच गति पैदा करता है: एथेंस के ओमोनिया चौक में स्थापित जलगतिज Πεντάκυκλο (पाँच वृत्त, 2001) पानी से धातु के वृत्त चलाती है। संग्रहालय की उनकी छतरियाँ स्थापना ने भी पानी से चलती गति की खोज की। ये कृतियाँ दिखाती हैं कि सामग्री, तंत्र और स्थान को साथ क्यों देखना चाहिए। सार्वजनिक मूर्ति दृश्य व्यवस्थित कर सकती है, छाया डाल सकती है या परिचित शहरी रास्ते में बदलती लय ला सकती है।
आज के यूनान में विरासत
फ़ाउंडेशन का ऐतिहासिक पृष्ठ ΟΜΠΡΕΛΕΣ, 12.01.1997 (छतरियाँ, 12 जनवरी 1997) खोलकर समुद्रतट की तस्वीर देखें। μπροστά, πίσω और ανάμεσα से तीन बातें बताएँ: धातु-रूपों के आगे, पीछे या बीच में क्या है? उसी दृष्टिकोण से दिखाई देने वाली चीज़ें लिखें; छाया दिखे तो उसे भी शामिल करें।
फिर μία ψηλή ομπρέλα को πολλές ψηλές ομπρέλες में बदलकर देखें कि विशेषण संज्ञा के साथ बहुवचन में कैसे बदलता है। नीचे का अनुकूलित यूनानी पाठ नमूना देता है। यह अभ्यास रोज़मर्रा शब्दावली को खुले स्थान में कलाकार की रुचि से जोड़ता है: रूपों के बीच खाली जगह और पीछे का समुद्र भी धातु जितने उपयोगी वर्णन-विषय बनते हैं।
क्या आप जानते हैं?
- मूर्तिकला पर ध्यान केंद्रित करने से पहले उन्होंने विद्यालयों के डिज़ाइन बनाए।
- ज़ालोंगो स्मारक की 1961 की तारीख अनावरण की है; निर्माण 1954–1960 में हुआ।
- फ़ाउंडेशन उनकी और चित्रकार एलेनी पास्कालिदु-ज़ोंगोलोपुलु की कृतियाँ सुरक्षित रखता है।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Ο ζωγράφος Μίμης Βιτσώρης | चित्रकार मिमिस वित्सोरिस | 1934 |
| Μνημείο Ζαλόγγου | ज़ालोंगो स्मारक (अनावरण) | 1961 |
| Γλυπτό ΔΕΘ | थेसालोनिकी अंतरराष्ट्रीय मेले की मूर्ति | 1966 |
| Ομπρέλες | छतरियाँ (थेसालोनिकी स्थापना) | 1997 |
| Πεντάκυκλο | पाँच वृत्त | 2001 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Γλυπτική είναι σήμερα και μία σκιά.
Glyptikí eínai símera kai mía skiá.
आज एक छाया भी मूर्तिकला है।

























































































