जीवन
खालेपास का जन्म 24 अगस्त 1851 को तीनोस के उत्तर में संगमरमर कारीगरों के गाँव पिर्गोस (पानोर्मोस) में हुआ। उनके पिता संगमरमर नक़्क़ाशी की कार्यशाला चलाते थे, और लड़का छेनियों और पत्थर के टुकड़ों के बीच बड़ा हुआ। उन्होंने एथेंस के ललित कला विद्यालय में पढ़ाई की, और 1873 में तीनोस के एवांगेलिस्त्रिया चर्च की एक छात्रवृत्ति ने उन्हें म्यूनिख की ललित कला अकादमी भेजा। 1876 में वे एथेंस लौटे, एक स्टूडियो खोला और दो वर्षों के भीतर अपनी सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ बनाईं।
1878 में उनका मन टूट गया। उन्होंने मूर्तियाँ नष्ट कर दीं, काम करना बंद कर दिया और कई बार आत्महत्या का प्रयास किया। 1888 में उनके परिवार ने उन्हें कोर्फ़ू के मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ वे 1902 तक रहे। फिर वे पिर्गोस लौटकर अपनी माँ के साथ रहने लगे, जो मानती थीं कि मूर्तिकला ने ही उन्हें बीमार किया है, और जो आकृतियाँ वे बनाने की कोशिश करते, उन्हें तोड़ देती थीं। वर्षों तक उन्होंने तीनोस की पहाड़ियों में चरवाहे का काम किया और गाँव के सीधे-सादे «पागल» बने रहे।
1916 में उनकी माँ का निधन हुआ, और लगभग 1918 में, 67 वर्ष की आयु में, खालेपास ने फिर से मूर्तियाँ बनानी शुरू कीं, ज़्यादातर मिट्टी और प्लास्टर में। 1925 में एथेंस अकादमी में प्रदर्शित उनकी कृतियों के प्लास्टर साँचों और 1927 में अकादमी के कला सम्मान (आरिस्तियोन) ने उन्हें देर से मान्यता दिलाई। 1930 में वे रिश्तेदारों के साथ रहने एथेंस चले गए और लगभग अंत तक काम करते रहे। 15 सितंबर 1938 को वहीं उनका निधन हुआ।
कृतियाँ

युवा खालेपास उन्नीसवीं सदी के म्यूनिख की भावना में ढले एक शास्त्रीय मूर्तिकार थे। उनकी Σατυρίσκος παίζων με τον Έρωτα (एरोस के साथ खेलता युवा सैटर, 1877) एक पौराणिक सैटर को प्रेम के नन्हे देवता को छेड़ते हुए दिखाती है, गति और हास्य से भरपूर। Η Κοιμωμένη (सोती हुई युवती, 1878) सोफ़िया अफ़ेन्दाकी की क़ब्र के लिए बनाई गई, जो एक धनी परिवार की लड़की थी और कम उम्र में तपेदिक से चल बसी थी। खालेपास ने मृत्यु नहीं दिखाई: उन्होंने अपने बिस्तर पर सोती एक युवती को दिखाया, चादर उसके शरीर पर स्वाभाविक रूप से गिरती हुई, एक हाथ छाती के पास टिका हुआ, मानो वह किसी भी क्षण जाग सकती हो। उसी वर्ष उन्होंने Μήδεια (मीडिया) शुरू की, यूनानी त्रासदी की वह माँ जो अपने बच्चों को मार डालती है; बीमारी शुरू होने पर यह अधूरी रह गई।
उनके बुढ़ापे की कृतियाँ बिल्कुल अलग हैं। मिट्टी और प्लास्टर की छोटी आकृतियों में वे बार-बार उन्हीं विषयों पर लौटे — सैटर और एरोस, मीडिया, बाइबिल के दृश्य — लेकिन शास्त्रीय शांति ग़ायब हो चुकी है। शरीर खुरदुरे हैं, चेहरे लगभग बच्चों जैसे, रूप सरलीकृत, मानो वे अकादमी के नियम भूल गए हों और अपनी ख़ुद की भाषा पा ली हो। बीसवीं सदी के आलोचकों ने इन अंतिम कृतियों में एक बहुत आधुनिक मूर्तिकार देखा, और आज इन्हें उनकी युवावस्था की संगमरमर की उत्कृष्ट कृतियों जितना ही मूल्यवान माना जाता है।
आज के यूनान में विरासत
खालेपास से मिलने के लिए पानाथिनाइको स्टेडियम के पास एथेंस के प्रथम क़ब्रिस्तान (Α΄ Νεκροταφείο) जाइए और «सोती हुई युवती» ढूँढिए: यह वहाँ सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली क़ब्रों में से एक है। तीनोस में, पिर्गोस स्थित उनका पारिवारिक घर एक छोटा संग्रहालय है, तीनोस के कलाकारों के संग्रहालय के बगल में, और गाँव में आज भी संगमरमर नक़्क़ाशी का एक विद्यालय है। एथेंस की राष्ट्रीय कला दीर्घा उनकी शुरुआती संगमरमर कृतियाँ, जिनमें 1877 का «एरोस के साथ खेलता सैटर» भी है, और उनकी बाद की मिट्टी की आकृतियाँ, दोनों प्रदर्शित करती है। उनके जीवन ने किताबों और वृत्तचित्रों को प्रेरित किया है, और «सोती हुई युवती» कई किताबों के आवरण पर दिखाई देती है।
क्या आप जानते हैं?
- वे लगभग चालीस वर्षों तक, 1878 से लगभग 1918 तक, कला से दूर रहे, फिर भी अपने युग के सबसे प्रशंसित यूनानी मूर्तिकार बने।
- उन्होंने 67 वर्ष की आयु में फिर से मूर्तियाँ बनानी शुरू कीं और लगभग 87 वर्ष की आयु तक काम करते रहे।
- «सोती हुई युवती» एक वास्तविक व्यक्ति की क़ब्र है: सोफ़िया अफ़ेन्दाकी, जिनकी 1873 में कम उम्र में मृत्यु हुई।
- उनके पैतृक गाँव, तीनोस के पिर्गोस, ने संगमरमर मूर्तिकारों की कई पीढ़ियाँ दी हैं और वहाँ आज भी संगमरमर नक़्क़ाशी का विद्यालय है।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Σατυρίσκος παίζων με τον Έρωτα | एरोस के साथ खेलता युवा सैटर | 1877 |
| Η Κοιμωμένη | सोती हुई युवती | 1878 |
| Μήδεια | मीडिया (अधूरी) | 1878 |
| Σάτυρος και Έρως (πηλός) | सैटर और एरोस (बाद के मिट्टी संस्करण) | c. 1920s–1930s |
कृतियों से



विकिमीडिया कॉमन्स से सार्वजनिक डोमेन की तस्वीरें।
याद रखने लायक एक पंक्ति
Η Κοιμωμένη του Α΄ Νεκροταφείου
I Koimomeni tou Protou Nekrotafeiou
प्रथम क़ब्रिस्तान की सोती हुई युवती

























