जीवन
काल्वोस का जन्म अप्रैल 1792 में ज़ाकिंथोस में हुआ, जो उस समय भी वेनिस के अधीन था, और उनका जीवन एक लंबा निर्वासन रहा। 1802 में उनके पिता उन्हें और उनके छोटे भाई को इटली के लिवोर्नो ले गए और माँ को पीछे छोड़ दिया; काल्वोस ने उन्हें फिर कभी नहीं देखा। वे इतालवी भाषी परिवेश में बड़े हुए और 1812 में फ़्लोरेंस में कवि उगो फ़ोस्कोलो से मिले, जिन्होंने उन्हें अपना सचिव और शिष्य बनाया। 1816 में वे फ़ोस्कोलो के साथ स्विट्ज़रलैंड और लंदन गए, जहाँ उन्होंने भाषाएँ पढ़ाईं और एक अंग्रेज़ महिला, मारिया थेरेसा थॉमस, से विवाह किया, जिनकी 1820 में उनकी नन्ही बेटी के साथ मृत्यु हो गई।
फ़्लोरेंस लौटकर वे इतालवी उदारवादियों की गुप्त संस्था कार्बोनारी में शामिल हुए और 1821 में तोस्काना से निष्कासित कर दिए गए, उसी वर्ष जब यूनानी क्रांति शुरू हुई। जिनेवा में उन्होंने Η Λύρα (1824), दस ओड, और पेरिस में Λυρικά (1826), दस और ओड प्रकाशित किए। 1826 में वे क्रांति की सेवा के लिए नाफ़प्लियो गए, गुटों की आपसी लड़ाई से विरक्त हुए और ब्रिटिश शासित कोर्फ़ू चले गए, जहाँ उन्होंने चौथाई सदी तक आयोनियन अकादमी और निजी विद्यालयों में पढ़ाया और फिर कभी यूनानी कविता नहीं लिखी।
1852 में वे अपनी दूसरी पत्नी, शार्लट ऑगस्टा वाडम्स, के साथ इंग्लैंड गए और उनके साथ लिंकनशर के बाज़ार-क़स्बे लाउथ में लड़कियों का एक विद्यालय चलाया। वहीं 3 नवंबर 1869 को उनका निधन हुआ। 1960 में उनके और उनकी पत्नी के अवशेष ज़ाकिंथोस लाए गए और द्वीप के दूसरे महान कवि दियोनिसियोस सोलोमोस के पास रखे गए, जिनसे वे कभी नहीं मिले थे।
कृतियाँ
ये बीस ओड यूनानी स्वतंत्रता संग्राम की कविताएँ हैं जो दूर से लिखी गईं, एक ऐसी यूनानी में जिसे कभी किसी ने बोला नहीं था: होमरीय रंगत वाली एक पुरातन शैली, जिसमें लोकभाषा (डेमोटिक) मिली हुई है, ας έχωσι जैसे रूपों और χάλκεον जैसे शब्दों के साथ। काल्वोस ने इनके लिए एक छंद गढ़ा: चार छोटी तुकहीन पंक्तियाँ और उसके बाद पाँच अक्षरों की पाँचवीं पंक्ति, जो ओड को एक गंभीर, कदमताल जैसी लय देती है, सोलोमोस के लोकगीत वाले छंद से बिल्कुल अलग।
पहला ओड Ο Φιλόπατρις (देशभक्त) ज़ाकिंथोस को ω φιλτάτη πατρίς कहकर संबोधित करता है और इस इच्छा के साथ समाप्त होता है कि उन्हें पराई धरती में न दफ़नाया जाए, एक इच्छा जिसे नियति ने अनसुना कर दिया। Εις Σάμον (सामोस के प्रति) उस छंद से शुरू होता है जिसे सब जानते हैं: जो भय के काँसे के हाथ को महसूस करते हैं, वे दासता का जुआ ढोते रहें; स्वतंत्रता को सद्गुण और साहस चाहिए। Εις Ψαρά और Εις Χίον उन द्वीपों का शोक मनाते हैं जिन्हें उस्मानियों ने 1822 और 1824 में नष्ट किया; Εις Σούλι और Εις Πάργαν एपिरस के गढ़ों का सम्मान करते हैं; Ο Ωκεανός (महासागर) और Τα Ηφαίστεια (ज्वालामुखी) समुद्र और यूनानी अग्नि-नौकाओं की ओर मुड़ते हैं। Εις Θάνατον (मृत्यु के प्रति) सपने में प्रकट होती उनकी माँ को याद करता है।
देशभक्ति के विषयों के पीछे वे शास्त्रीय आदर्श हैं जो उन्होंने फ़ोस्कोलो से आत्मसात किए: सद्गुण, स्वतंत्रता, प्रकृति की नैतिक भव्यता। ये ओड कोमल होने के बजाय अमूर्त और प्रतिमा जैसे हैं, और इनकी शब्दावली के लिए मूल भाषियों को भी शब्दकोश चाहिए, और ठीक इसी कारण सेफ़ेरिस इनकी विचित्रता के प्रशंसक थे।
आज के यूनान में विरासत
Θέλει αρετήν και τόλμην η ελευθερία संसद में, अख़बारों की सुर्ख़ियों में और विद्यालयों की दीवारों पर उद्धृत होती है; कम ही यूनानी बाक़ी ओड जानते हैं, पर यह पंक्ति सब जानते हैं। ये ओड 1889 में फिर जीवित हुए, जब कोस्तिस पालामास ने 'ज़ाकिंथोसवासी काल्वोस' पर व्याख्यान दिया, और फिर 1930 और 1940 के दशकों में सेफ़ेरिस के निबंधों के माध्यम से; आज Εις Σάμον लिसीयम (उच्च माध्यमिक) की साहित्य-संकलन में शामिल है। ज़ाकिंथोस में सोलोमोस और प्रख्यात ज़ाकिंथोसवासियों के संग्रहालय में वह मक़बरा है जहाँ सोलोमोस और काल्वोस की क़ब्रें अगल-बगल हैं; इंग्लैंड के लाउथ में एक पट्टिका उस घर को चिह्नित करती है जहाँ उनका निधन हुआ। एथेंस और कई नगरों में Κάλβου नाम की सड़कें हैं। Ο Φιλόπατρις का एक अच्छा पाठ सुनना उनकी लय सुनने का सबसे अच्छा तरीक़ा है।
क्या आप जानते हैं?
- उन्होंने पूरे जीवन में बीस यूनानी कविताएँ लिखीं, सभी लगभग 1823 से 1826 के बीच, और फिर चालीस से अधिक वर्षों तक एक भी नहीं।
- अपने यूनानी ओड से पहले उन्होंने इतालवी में त्रासदियाँ और कविताएँ लिखीं, और इंग्लैंड में इतालवी व्याकरण की एक पाठ्यपुस्तक प्रकाशित की।
- उनका पहला ओड मातृभूमि में क़ब्र की कामना करता है; उनकी मृत्यु एक अंग्रेज़ी बाज़ार-क़स्बे में हुई और वे ज़ाकिंथोस केवल 1960 में पहुँचे, इक्यानबे वर्ष बाद।
- काल्वोस और सोलोमोस, दोनों ज़ाकिंथोस में जन्मे और दोनों क्रांति के कवि, कभी नहीं मिले, और अब एक ही मक़बरे में विश्राम करते हैं।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Η Λύρα (δέκα ωδές) | वीणा (दस ओड) | 1824 |
| Ο Φιλόπατρις | देशभक्त | 1824 |
| Εις Θάνατον | मृत्यु के प्रति | 1824 |
| Λυρικά (δέκα ωδές) | गीतिकाव्य (दस ओड) | 1826 |
| Εις Σάμον | सामोस के प्रति | 1826 |
| Εις Ψαρά | प्सारा के प्रति | 1826 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Όσοι το χάλκεον χέρι / βαρύ του φόβου αισθάνονται, / ζυγόν δουλείας ας έχωσι· / θέλει αρετήν και τόλμην / η ελευθερία.
आज की यूनानी मेंΌσοι αισθάνονται το βαρύ, χάλκινο χέρι του φόβου, ας έχουν τον ζυγό της σκλαβιάς· η ελευθερία θέλει αρετή και τόλμη.
Osoi to chalkeon cheri / vary tou fovou aisthanontai, / zygon douleias as echosi; / thelei aretin kai tolmin / i eleftheria.
जो भय के भारी / काँसे के हाथ को महसूस करते हैं, / वे दासता का जुआ ढोते रहें; / स्वतंत्रता को सद्गुण / और साहस चाहिए।