जीवन
आल्की किरियाकिदू का जन्म 17 जून 1935 को थेस्सालोनिकी में हुआ। वे एफ़्तिख़िया और स्तिल्पोन किरियाकिदिस की तीसरी बेटी थीं; पिता थेस्सालोनिकी विश्वविद्यालय में लोकवार्ता पढ़ाते थे। उन्होंने 1953 में अनातोलिया कॉलेज की पढ़ाई पूरी की और उसी वर्ष अरस्तू विश्वविद्यालय के दर्शन संकाय में प्रवेश लिया। फ़ुलब्राइट छात्रवृत्ति उन्हें पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय ले गई, जहाँ 1957 में उन्होंने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स की उपाधि ली, और 1958 में थेस्सालोनिकी से इतिहास और पुरातत्व की उपाधि प्राप्त की। उनका दोहरा उपनाम पिता के नाम को उनके पति स्तेलियोस नेस्तोरास के नाम से जोड़ता है।
1960 में वे विश्वविद्यालय की उस पीठ में सहायक बनीं जिसमें लोकवार्ता शामिल थी, और 1960 के दशक के मध्य में उन्होंने मकदूनिया और थ्रेस के बुने हुए वस्त्रों पर डॉक्टरेट पूरी की। 1966–67 में एक सरकारी छात्रवृत्ति उन्हें पेरिस ले गई, जहाँ वे École Pratique des Hautes Études में क्लोद लेवी-स्त्रॉस की संगोष्ठी में शामिल हुईं। थेस्सालोनिकी लौटकर उन्होंने पीठ का बहुत-सा अध्यापन संभाला, पर सैन्य तानाशाही के दौरान उनका करियर रोक दिया गया: 1973 में उनका पद नवीनीकृत नहीं हुआ और उन्हें माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाने भेज दिया गया।
सैन्य शासन के पतन के बाद वे सितंबर 1974 में विश्वविद्यालय लौटीं। 1976 में वे प्रोफ़ेसर चुनी गईं और 1979 में लोकवार्ता की पूर्ण प्रोफ़ेसर बनीं। उन्होंने अनातोलिया के नए व्यवसाय और उदार कला विद्यालय, आज के ACT, में मानवविज्ञान भी पढ़ाया, और 1978 में थेस्सालोनिकी की कला संस्था ‘तेख़नी’ की अध्यक्ष बनीं। सितंबर 1988 में तिरपन वर्ष की आयु में थेस्सालोनिकी में उनका निधन हुआ।
कृतियाँ

उनके डॉक्टरेट शोध-प्रबंध Τα υφαντά της Μακεδονίας και της Θράκης (मकदूनिया और थ्रेस के बुने वस्त्र, 1965) ने उत्तरी यूनान की घरेलू बुनाई का अध्ययन किया। पेरिस में उनका परिचय संरचनात्मक मानवविज्ञान से हुआ, और बाद में उन्होंने लेवी-स्त्रॉस की द सैवेज माइंड (वन्य चिंतन) के यूनानी संस्करण की भूमिका लिखी (1977)। Λαογραφικά μελετήματα (लोकवार्ता अध्ययन, 1975) में संकलित उनके निबंधों ने ये नए प्रश्न यूनानी लोकवार्ता शोध में पहुँचाए।
उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक Η θεωρία της ελληνικής λαογραφίας (यूनानी लोकवार्ता का सिद्धांत, 1978) इस बात का आलोचनात्मक विश्लेषण है कि इस विषय ने “लोक” और उसकी परंपरा को कैसे परिभाषित किया था, जिसमें उनके अपने पिता के विचार भी शामिल हैं। इसने पाठकों को आमंत्रित किया कि वे लोकवार्ता शोध को एक तटस्थ अभिलेख नहीं, बल्कि इतिहास और राष्ट्रीय चिंताओं की उपज के रूप में देखें।
Οι δώδεκα μήνες (बारह महीने, 1982), जिसमें चित्रकार ख़्रोनिस बोत्सोग्लू के बारह पूरे पृष्ठ के चित्र हैं, वर्ष के रिवाजों का अनुसरण करती है: घर-घर गाए जाने वाले गीत (κάλαντα), कार्निवल, मध्य-ग्रीष्म में संत योहन की अलाव, κλήδονας नाम का शकुन-रिवाज और खेतों का काम। 1980 के दशक में वे मौखिक इतिहास की ओर मुड़ीं और थेस्सालोनिकी के पोंटिक यूनानी शरणार्थियों को अपना शोध-क्षेत्र चुना। 1987 का उनका लेख «Ο χρόνος της προφορικής ιστορίας» (मौखिक इतिहास का समय) इस वाक्य से शुरू होता है: “मौखिक इतिहास का समय स्मृति का समय है।”
आज के यूनान में विरासत
यूनानी लोकवार्ताविद आज भी उन्हें सम्मान देते हैं। अरस्तू विश्वविद्यालय का लोकवार्ता संग्रहालय और अभिलेखागार इस विषय को आकार देने वाले लोगों में उन्हें एक पृष्ठ समर्पित करता है, और एथेंस विश्वविद्यालय ने 2013 का अपना वार्षिक लोकवार्ता व्याख्यान देश और काल में पारंपरिक संस्कृति के उनके दृष्टिकोण को समर्पित किया। Οι δώδεκα μήνες आज भी Malliaris-Paideia से छपती है। किसी एक रिवाज पर उनकी पद्धति आज़माएँ: किसी परिचित यूनानी नगर या गाँव का कोई त्योहार चुनें, Πότε γίνεται…; (… कब होता है?) पूछें और एक महीने तथा एक सीमा-सूचक शब्द के साथ उत्तर दें, जैसे Σε πολλά μέρη ο κλήδονας γίνεται τον Ιούνιο (कई जगहों पर क्लिदोनास जून में होता है)। फिर एक वाक्य जोड़ें कि आपकी जानकारी कहाँ से आई: किसी पुस्तक से, किसी वेबसाइट से या किसी ऐसे व्यक्ति से जिससे आपने पूछा।
क्या आप जानते हैं?
- यूनानी उपाधि पूरी करने से पहले, 1956–57 में उन्होंने फ़ुलब्राइट छात्रवृत्ति पर अमेरिका में पढ़ाई की।
- तानाशाही के दौरान उन्होंने माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाया, पहले वासिलिका में और फिर कालामारिया में।
- 1974 में उन्होंने थोड़े समय शिक्षा मंत्रालय में इतिहास की स्कूली पाठ्यपुस्तकों पर काम किया।
- 1983 में उन्होंने अनातोलिया के व्यवसाय और उदार कला विद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य भाषण दिया।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Τα υφαντά της Μακεδονίας και της Θράκης | मकदूनिया और थ्रेस के बुने वस्त्र (डॉक्टरेट शोध-प्रबंध) | 1965 |
| Λαογραφικά μελετήματα | लोकवार्ता अध्ययन (निबंध) | 1975 |
| Ο Claude Lévi-Strauss, το έργο του | क्लोद लेवी-स्त्रॉस और उनका कार्य (वन्य चिंतन के यूनानी संस्करण की भूमिका) | 1977 |
| Η θεωρία της ελληνικής λαογραφίας. Κριτική ανάλυση | यूनानी लोकवार्ता का सिद्धांत: एक आलोचनात्मक विश्लेषण | 1978 |
| Οι δώδεκα μήνες – Τα λαογραφικά | बारह महीने: लोकवार्ता (चित्र: ख़्रोनिस बोत्सोग्लू) | 1982 |
| Ο χρόνος της προφορικής ιστορίας | मौखिक इतिहास का समय (लेख) | 1987 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Ο χρόνος της προφορικής ιστορίας είναι ο χρόνος της μνήμης.
O chrónos tis proforikís istorías eínai o chrónos tis mnímis.
मौखिक इतिहास का समय स्मृति का समय है।










































