जीवन
इउलिया नाकू, जिन्हें लिलिका कहा जाता था, एथेंस के एक संपन्न परिवार में जन्मीं। ईआरटी अभिलेखागार सहित अधिकांश यूनानी स्रोत उनका जन्म वर्ष 1904 बताते हैं, जबकि पुस्तकालय अभिलेख 1903 और डेबोरा टैनन का 1983 का अध्ययन 1899 देता है। 1917 में उन्होंने जिनेवा के दर्शनशास्त्र संकाय में पढ़ाई शुरू की। उनकी पहली कहानियाँ और लघु उपन्यास फ़्रांसीसी में पेरिस की पत्रिकाओं में छपे।
1930 के दशक की शुरुआत में वे यूनान लौटीं और 1932 में उनका संग्रह Η ξεπάρθενη (कौमार्य खोई लड़की) प्रकाशित हुआ। 1934 से उन्होंने गायन पढ़ाया, पहले क्रीट के रेथिम्नो में और फिर एथेंस में। 1936 में वे पत्रकारिता की ओर मुड़ीं और Ακρόπολις (अक्रोपोलिस) तथा Έθνος (एथनोस) अख़बारों और Νέα Εστία (नेआ एस्तिया) जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के लिए लिखा। कई वर्षों तक वे यूनानी पत्रकारिता में अकेली महिला थीं। उनकी भेंट निकोस कज़ान्त्ज़ाकिस से हुई और वे एथेंस के देक्सामेनी मंडल के लेखकों से जुड़ीं।
धुरी राष्ट्रों के क़ब्ज़े के दौरान उन्होंने बीमार और भूखे बच्चों के साथ स्वयंसेवक के रूप में काम किया। युद्ध के बाद उन्होंने कई वर्ष विदेश में, कुछ समय स्विट्ज़रलैंड में, बिताए, फिर दोबारा एथेंस में बस गईं। 25 मई 1989 को एथेंस में उनका निधन हुआ।
कृतियाँ
नाकू 1930 के दशक की पीढ़ी से थीं, उन लेखकों से जिन्होंने आधुनिक यूनानी उपन्यास को आकार दिया, और वे इसकी पहली महिला गद्यकारों में थीं। उनके कथा-साहित्य का बड़ा भाग उनके अपने जीवन से उपजता है। उनकी कहानियाँ और उपन्यास दहेज प्रथा, वेश्यावृत्ति और यूनानी समाज में स्त्रियों को दी गई संकरी जगह की आलोचना करते हैं, जिसमें 4 अगस्त 1936 को शुरू हुई मेताक्सास तानाशाही में स्त्रियों पर दबाव भी शामिल है। उनका उपन्यास Οι παραστρατημένοι (भटके हुए) 1935 में प्रकाशित हुआ।
उनकी पत्रकारिता भी उतनी ही सीधी है। Ακρόπολις में उन्होंने कामकाजी स्त्रियों, बाल श्रम और आठ घंटे के कार्यदिवस पर लिखा, और पिरेयस के वूर्ला वेश्यालय इलाक़े में जाकर वहाँ की स्त्रियों को अपनी कहानी अपने शब्दों में कहने दी। Η κόλαση των παιδιών (बच्चों का नरक, 1944) क़ब्ज़े के अकाल के दौरान बच्चों के साथ उनके काम पर आधारित कहानियाँ संकलित करता है; 1946 में इसका अंग्रेज़ी अनुवाद आया।
Η κυρία Ντορεμί (मदाम दोरेमी, 1955) एक हास्य उपन्यास है और उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक है; इसकी नायिका एक शिक्षिका है जो एक प्रांतीय नगर के पूर्वाग्रहों का सामना करती है। बाद के उपन्यासों में Για μια καινούργια ζωή (नए जीवन के लिए, 1960) है। उन्होंने उपन्यास-शैली की जीवनियाँ भी लिखीं, जैसे एडगर ऐलन पो का जीवन, और अपने पत्रकारिता के वर्षों के संस्मरण।
आज के यूनान में विरासत
टेलीविज़न ने नाकू को नई पीढ़ी से परिचित कराया। 1983 में ईआरटी ने Η κυρία Ντορεμί पर आधारित 13 कड़ियों का धारावाहिक प्रसारित किया, जिसका निर्देशन निकोस कूतेलिदाकिस ने किया, पटकथा यान्निस कांदिलास ने लिखी और मुख्य भूमिका एलेनी अनूसाकी ने निभाई; इसमें पेरिस से लौटी एक शिक्षिका दो विश्वयुद्धों के बीच के रेथिम्नो की रूढ़िवादिता से टकराती है। ईटी-2 ने 1988 में Για μια καινούργια ζωή का रूपांतरण किया। ईआरटी अभिलेखागार 25 मई को उनके जीवन पर विशेष सामग्री से उन्हें याद करता है। यूनानी अभ्यास के लिए उनका 1936 का वाक्य «Εγώ η ίδια εργάζομαι, παλεύω…» (मैं ख़ुद काम करती हूँ, संघर्ष करती हूँ…) लें और उसे अप्रत्यक्ष कथन में लिखें: Η Νάκου είπε ότι η ίδια εργαζόταν… (नाकू ने कहा कि वे ख़ुद काम करती थीं…)। फिर शिक्षिका और एक अभिभावक के बीच चार पंक्तियों का संवाद लिखें और उसे μου είπε ότι… और της είπα πως… से बताएँ।
क्या आप जानते हैं?
- पिरेयस को अच्छी तरह जानने वाले कवि निकोस कव्वादियास ने उनकी रिपोर्टों के लिए जानकारी दी और उन्हें एक पुराने बजरे पर बने "तैरते" वेश्यालय में ले गए।
- Η κόλαση των παιδιών 1946 में अंग्रेज़ी में The Children's Inferno: Stories of the Great Famine in Greece नाम से छपा, अनुवादक ऐलन रॉस मैकडूगल थे।
- अमेरिकी भाषाविद् डेबोरा टैनन ने उन पर पूरी पुस्तक Lilika Nakos (1983) लिखी और एक पाठ का अनुवाद किया जिसमें नाकू अपनी माँ के बारे में लिखती हैं।
- उनकी कहानियाँ 1930 के दशक में ही अंग्रेज़ी पाठकों तक पहुँच गई थीं: “The Broken Doll” 1936–1937 में लंदन की पत्रिका Life and Letters Today में छपी।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Η ξεπάρθενη | कौमार्य खोई लड़की | 1932 |
| Οι παραστρατημένοι | भटके हुए | 1935 |
| Η κόλαση των παιδιών | बच्चों का नरक | 1944 |
| Η κυρία Ντορεμί | मदाम दोरेमी | 1955 |
| Για μια καινούργια ζωή | नए जीवन के लिए | 1960 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Εγώ η ίδια εργάζομαι, παλεύω και ξέρω από πείρα με τι κόπο η γυναίκα βγάζει το ψωμί της.
Egó i ídia ergázome, palévo ke xéro apó píra me ti kópo i gynéka vgázi to psomí tis.
मैं ख़ुद काम करती हूँ, संघर्ष करती हूँ और अनुभव से जानती हूँ कि स्त्री कितनी मेहनत से अपनी रोटी कमाती है।










































