जीवन
ज़ोई करेली (Zoi या Zoé Karelli भी लिखा जाता है) ख्रिसूला अर्गिरियादु का उपनाम था, जिनका जन्म 1901 में थेसालोनिकी में ख्रिसूला पेंत्ज़िकी के रूप में हुआ। यह नाम उन्होंने ख़ुद चुना। उनके छोटे भाई लेखक और चित्रकार निकोस गव्रिइल पेंत्ज़िकिस थे। उनकी पढ़ाई घर पर हुई, जहाँ उन्होंने स्कूली विषय, विदेशी भाषाएँ और संगीत सीखा। वे फ़्रांसीसी, जर्मन, अंग्रेज़ी और इतालवी बहुत अच्छी तरह जानती थीं, और बाद में थेसालोनिकी विश्वविद्यालय में श्रोता के रूप में भाषाशास्त्र की कक्षाओं में जाती रहीं। 1919 में उन्होंने कृषि-विशेषज्ञ थियोदोरोस अर्गिरियादिस से विवाह किया; उनके दो बेटे हुए।
उन्होंने तीस की उम्र के बाद छपना शुरू किया। अक्टूबर 1935 में थेसालोनिकी की पत्रिका Το 3ο μάτι (तीसरी आँख) के पहले अंक में उनका एक छोटा गद्य-अंश छपा, और 1937 में उनकी पहली कविताएँ आईं। 1945 से 1948 तक उन्होंने पत्रिका Κοχλίας (घोंघा) के साथ निकटता से काम किया, जिसमें उन्होंने कविताएँ, निबंध और अनुवाद छापे। वे 1954 से 1961 तक एथेंस में रहीं, पर थेसालोनिकी ही उनका शहर रहा।
पहचान उन्हें बाद के वर्षों में मिली। 1956 में उन्हें कविता का द्वितीय राजकीय पुरस्कार, 1974 में कविता का प्रथम राजकीय पुरस्कार और 1978 में एथेंस अकादमी का एक पुरस्कार मिला। 1982 में वे एथेंस अकादमी की संवाददाता सदस्य चुनी गईं, और 1988 में थेसालोनिकी के अरस्तू विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टरेट दी। 1980 से 1986 तक वे थेसालोनिकी लेखक संघ की उपाध्यक्ष रहीं। 16 जुलाई 1998 को उनका निधन हुआ।
कृतियाँ
करेली ने अपना पहला संग्रह Πορεία (यात्रा) 1940 में प्रकाशित किया, और कुल मिलाकर कविता की बारह किताबें, जिनमें Η εποχή του θανάτου (मृत्यु का मौसम, 1948), Κασσάνδρα και άλλα ποιήματα (कसांद्रा और अन्य कविताएँ, 1955) और Ο καθρέφτης του μεσονυκτίου (आधी रात का दर्पण, 1958) शामिल हैं। 1973 में उनकी 1940 से 1973 तक की कविताएँ दो खंडों में संकलित हुईं। उन्होंने पद्य-नाटक भी लिखे: Σιμωνίς βασιλόπαις του Βυζαντίου (सिमोनिस, बीज़ान्टियम की राजकुमारी, 1965) और Ορέστης (ओरेस्टीज़, 1971) का मंचन उत्तरी यूनान के राजकीय रंगमंच ने 1966 और 1976 में किया। उनके निबंधों में फ़्रांसीसी कवि पॉल क्लोदेल पर एक अध्ययन और वेटिंग फ़ॉर गोदो की एक व्याख्या शामिल है।
उनकी कविता अंतर्मुखी और प्रश्न पूछने वाली है। समय, एकांत, प्रेम, मृत्यु और आस्था बार-बार लौटते हैं, और आलोचक अक्सर इसे भीतरी वाणी और अस्तित्व की बेचैनी की कविता कहते हैं। कसांद्रा, ओरेस्टीज़ और यूरिडिसी जैसे प्राचीन मिथक के पात्र उन्हें वर्तमान के बारे में बोलने में मदद करते हैं। थेसालोनिकी Θεσσαλονίκη 904 μ.Χ. (थेसालोनिकी, ईस्वी 904) जैसी कविताओं में आता है, जो उस वर्ष शहर पर हुए हमले को याद करती है।
उन्होंने रोज़मर्रा के जीवन को भी ध्यान से देखा। Λαϊκή αγορά (हाट-बाज़ार) में स्त्रियाँ अपनी ख़रीदारी लेकर धीरे-धीरे बाज़ार से लौटती हैं, और कवयित्री हरी सब्ज़ियाँ, लाल शलजम, संतरे और पीले नींबू देखती है: एक कठिन सप्ताह में छोटी-छोटी ख़ुशियाँ।
आज के यूनान में विरासत
करेली को बीसवीं सदी के मध्य में थेसालोनिकी के साहित्यिक जीवन की एक केंद्रीय आवाज़ के रूप में याद किया जाता है। उनकी मृत्यु के कुछ ही समय बाद पत्रिका Νέα Πορεία ने जुलाई–सितंबर 1998 के अंक के पन्ने उनकी स्मृति को समर्पित किए, जिनमें उनकी कविताओं का चयन था; यूनानी भाषा केंद्र आज यह अंक ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। यूनान का लिलियन वूदूरी महान संगीत पुस्तकालय 1988 का एक रिकॉर्ड Ελληνικά ποιήματα: Η Ζωή Καρέλλη διαβάζει Καρέλλη (यूनानी कविताएँ: ज़ोई करेली पढ़ती हैं करेली) सँभाले हुए है, जिसमें उनकी अपनी आवाज़ है। उनकी कविता Λαϊκή αγορά (हाट-बाज़ार) के साथ एक छोटा अभ्यास करें: इस पृष्ठ पर उद्धृत दो पंक्तियों में रंगों के शब्द πράσινα (हरे) और κόκκινα (लाल) खोजें। फिर अपना वाक्य बनाएँ: Στη λαϊκή βλέπω πράσινα λαχανικά (बाज़ार में मैं हरी सब्ज़ियाँ देखता/देखती हूँ)। यह हमारा अभ्यास-वाक्य है, कविता की पंक्ति नहीं।
क्या आप जानते हैं?
- करेली ने अपनी पहली कविता 1937 में प्रकाशित की, जब वे लगभग पैंतीस वर्ष की हो चुकी थीं।
- पत्रिका Κοχλίας के लिए उन्होंने अकेले या दूसरों के साथ जेम्स जॉयस, प्लोटिनस, लॉन्गफ़ेलो, रॉबर्ट ब्राउनिंग और टी. एस. एलियट के पाठों का अनुवाद किया।
- उनका नाटक Ορέστης (ओरेस्टीज़) एक प्राचीन मिथक को आधुनिक पद्य में फिर से कहता है और 1976 में थेसालोनिकी में मंचित हुआ।
- उनके उपनाम Ζωή का यूनानी में अर्थ है “जीवन”।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Πορεία | यात्रा — पहला कविता-संग्रह | 1940 |
| Η εποχή του θανάτου | मृत्यु का मौसम — कविताएँ | 1948 |
| Κασσάνδρα και άλλα ποιήματα | कसांद्रा और अन्य कविताएँ — राजकीय पुरस्कार 1956 | 1955 |
| Ο καθρέφτης του μεσονυκτίου | आधी रात का दर्पण — कविताएँ | 1958 |
| Ορέστης | ओरेस्टीज़ — पद्य-नाटक, 1976 में मंचित | 1971 |
| Τα Ποιήματα | कविताएँ — दो खंडों में, 1940–1973 | 1973 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
με τα λαχανικά, δροσερά, πράσινα, βαθύχρωμα γογγύλια, κόκκινα.
me ta lachaniká, droserá, prásina, vathýchroma gongýlia, kókkina.
सब्ज़ियों के साथ, ताज़ी, हरी, गहरे रंग के शलजम, लाल।





























































