जीवन
उनके प्रकाशक Metaixmio और यूनानी पुस्तक डेटाबेस Biblionet के अनुसार लेना कित्सोपुलू (Kitsopoulou) का जन्म 1971 में एथेंस में हुआ; एक फ़्रांसीसी रंगमंच कार्यक्रम 1976 बताता है। उन्होंने कारोलोस कून के कला रंगमंच (Θέατρο Τέχνης) के नाट्य विद्यालय में अभिनय सीखा और 1994 में स्नातक हुईं। इसके बाद उन्होंने शास्त्रीय और आधुनिक नाटकों तथा फ़िल्मों में अभिनय किया। 1997 में दिमित्रिस अथानितिस की फ़िल्म No Sympathy for the Devil के लिए उन्हें थेसालोनिकी अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।
जल्द ही लेखन उनके लिए अभिनय जितना ही महत्वपूर्ण हो गया। 2006 में Kedros प्रकाशन ने उनका पहला कहानी-संग्रह Νυχτερίδες (चमगादड़) प्रकाशित किया, जिसे पत्रिका Διαβάζω (मैं पढ़ता/पढ़ती हूँ) का पहली कृति पुरस्कार मिला। तब से वे मुख्य रूप से लेखिका और निर्देशक के रूप में काम करती हैं। वे अख़बारों के लिए भी लिखती हैं और संकलनों में कहानियाँ देती हैं, जैसे यूनानी आर्थिक संकट पर 2013 का एक संग्रह।
उनके नाटकों का अंग्रेज़ी, फ़्रांसीसी, जर्मन, स्पेनिश और पोलिश में अनुवाद हुआ है और वे यूनान के साथ-साथ लंदन और बर्लिन में भी प्रस्तुत हुए हैं। वे गायिका के रूप में भी प्रस्तुति देती हैं। उनका 2015 का कहानी-संग्रह Το μάτι του ψαριού (मछली की आँख) 2016 में यूनानी राजकीय कहानी और लघु उपन्यास पुरस्कार की अंतिम सूची में था। वे एथेंस में रहती और काम करती हैं।
कृतियाँ

कित्सोपुलू की कहानियाँ छोटी और सीधी हैं। Νυχτερίδες और बाद के संग्रह Μεγάλοι δρόμοι (बड़ी सड़कें, Metaixmio, 2010) तथा Το μάτι του ψαριού ऐसे साधारण लोगों को दिखाते हैं जो हमारे बीच रहते लगते हैं, पर हानि, निराशा और मृत्यु से टकराते हैं। आलोचक उनके कटे-छँटे वाक्यों और अतियथार्थवादी, कभी-कभी उदास स्पर्शों की ओर ध्यान दिलाते हैं। Μεγάλοι δρόμοι की दो कहानियाँ मंच के लिए रूपांतरित हुईं।
उनका सबसे प्रसिद्ध नाट्य-पाठ एक लघु उपन्यास के रूप में शुरू हुआ। Μ.Α.Ι.Ρ.Ο.Υ.Λ.Α. (Kedros, 2009) 37 वर्ष की एक स्त्री के बारे में है जो अपना जीवन, या कहें दुनिया, बदलने का निश्चय करती है। शीर्षक का हर अक्षर उसके कड़वे, हास्यपूर्ण “जीवन-दर्शन” के एक शब्द की शुरुआत है। 2009 में यूनान के राष्ट्रीय रंगमंच ने इसे एकालाप के रूप में मंचित किया, जिसका निर्देशन कित्सोपुलू और स्त्री की भूमिका निभाने वाली मारिया प्रोतोपाप्पा ने किया; 2011 में यह प्रस्तुति मिलान के Piccolo Teatro गई। मंच पर स्त्री दर्शकों से, स्वयं से और अपने आसपास की हर चीज़ से बात करती है, खट्टे-मीठे, व्यंग्यपूर्ण और मज़ेदार शब्दों की धारा में।
उनके नाटक अक्सर यूनानी इतिहास और मिथक को आरंभ-बिंदु बनाते हैं। Αθανάσιος Διάκος – Η επιστροφή (अथानासियोस दियाकोस – वापसी, एथेंस महोत्सव, 2012) का शीर्षक 1821 के एक नायक से लिया गया है। Aoustras or the Hardness (राष्ट्रीय रंगमंच, 2011) और Little Red Riding Hood – The First Blood (ओनासिस सांस्कृतिक केंद्र, 2014) ने अलग राहें लीं। जुलाई 2023 में एपिडॉरस के प्राचीन रंगमंच में अरिस्तोफ़ानेस के Σφήκες (ततैये) के उनके मंचन ने आलोचकों को तीखे रूप से बाँट दिया।
आज के यूनान में विरासत
कित्सोपुलू के पाठ आज भी यूनानी मंचों और किताबों की अलमारियों पर हैं। 2021 में Μ.Α.Ι.Ρ.Ο.Υ.Λ.Α. एथेंस के ज़ीना थिएटर में लौटा, दिमित्रा देर्मित्ज़ाकी के निर्देशन में और किट्टी पाइताज़ोग्लू की भूमिका के साथ; 2025 में Metaixmio ने Νυχτερίδες और Μ.Α.Ι.Ρ.Ο.Υ.Λ.Α. को फिर से प्रकाशित किया। राष्ट्रीय रंगमंच का डिजिटल संग्रह 2009 की प्रस्तुति की तस्वीरें, कार्यक्रम-पुस्तिकाएँ और अख़बारी कतरनें संजोए हुए है। यूनानी अभ्यास के लिए वह संग्रह-प्रविष्टि खोलें और शीर्षक को अक्षर-दर-अक्षर पढ़ें। पूरा एकालाप वयस्कों का साहित्य है, A1 पठन नहीं, इसलिए केवल उसका रूप अपनाएँ: एक व्यक्ति दर्शकों से बात करता है। तीन पंक्तियों का अपना एकालाप लिखें: Είμαι η Μαρία (मैं मारिया हूँ)। Μένω στην Αθήνα (मैं एथेंस में रहती हूँ)। Μιλάω για τη ζωή μου (मैं अपने जीवन के बारे में बोलती हूँ)। फिर उसे ज़ोर से पढ़ें।
क्या आप जानते हैं?
- अपनी पहली किताब से पहले ही, 1997 में उन्होंने थेसालोनिकी फ़िल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता।
- शीर्षक Μ.Α.Ι.Ρ.Ο.Υ.Λ.Α. एक स्त्री-नाम Μαιρούλα जैसा दिखता है, पर हर बड़ा अक्षर एक अलग शब्द का सूचक है।
- मार्च 2011 में राष्ट्रीय रंगमंच की प्रस्तुति Μ.Α.Ι.Ρ.Ο.Υ.Λ.Α. मिलान के Piccolo Teatro में खेली गई।
- अथानासियोस दियाकोस पर उनके नाटक ने 2013 में जर्मनी के हाइडेलबर्ग Stückemarkt का अंतरराष्ट्रीय लेखक पुरस्कार जीता।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Νυχτερίδες | चमगादड़ (कहानियाँ) | 2006 |
| Μ.Α.Ι.Ρ.Ο.Υ.Λ.Α. | M.A.I.R.O.U.L.A. (लघु उपन्यास और एकालाप) | 2009 |
| Μεγάλοι δρόμοι | बड़ी सड़कें (कहानियाँ) | 2010 |
| Αθανάσιος Διάκος – Η επιστροφή | अथानासियोस दियाकोस – वापसी (नाटक) | 2012 |
| Το μάτι του ψαριού | मछली की आँख (कहानियाँ) | 2015 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Αυτός ο μονόλογος είναι οι σκέψεις ενός καθημερινού ανθρώπου που βαδίζει αναπόφευκτα όλο και πιο κοντά στον θάνατο
Aftós o monólogos íne i sképsis enós kathimerinoú anthrópou pou vadízi anapófefkta ólo ke pio kontá ston thánato
यह एकालाप एक साधारण इंसान के विचार हैं, जो अनिवार्य रूप से मृत्यु के और-और क़रीब चलता जाता है















































