जीवन
दनाई स्त्रातिगोपुलू का जन्म 8 फ़रवरी 1913 को एथेंस के मेताक्सुर्गियो मोहल्ले में हुआ; कुछ स्रोत 1911 बताते हैं। उनके पिता इप्पोलितोस स्त्रातिगोपुलोस इंजीनियर और पत्रकार थे। उनका बचपन फ़्रांस में, पेरिस और मार्सेई में बीता, जहाँ उन्होंने राजनीति विज्ञान के साथ उच्चारण-कला और गायन भी सीखा। उनका पहला काम पत्रकारिता था। 1935 में वे एक युवा रिपोर्टर के रूप में संगीतकार अत्तिक (क्लेओन त्रियान्दाफ़िल्लू) के साथ मिस्र के दौरे पर गईं और, जैसा उन्होंने बाद में बताया, पेशेवर गायिका बनकर लौटीं। 1930 के दशक के अंत में वे एथेंस में अत्तिक के संगीत मंच ‘मांद्रा’ (भेड़ों का बाड़ा) पर उनकी सबसे प्रिय गायिका बनीं, और अख़बारों ने उन्हें ‘अत्तिक की बुलबुल’ कहा।
जर्मन क़ब्ज़े के दौरान वे गाती रहीं और प्रतिरोध आंदोलन में शामिल हुईं; कुछ समय उन्हें अवेरोफ़ जेल में रखा गया। प्रतिरोध में उनकी मुलाक़ात योर्गोस ख़ाल्कियादाकिस से हुई, जिनसे उन्होंने 1945 में विवाह किया। 1954 में उनका देहांत हो गया, और दनाई ने बेटी लीदा को पाला, जो आगे चलकर गायिका भी बनीं। अत्तिक का निधन अगस्त 1944 में हुआ; दनाई उनके गीत गाती रहीं और उन्हें लॉन्ग-प्लेइंग रिकॉर्डों पर फिर से रिकॉर्ड किया।
उनकी छोटी बहन मीरका, जो चिली में रहने वाली बाँसुरी-वादिका थीं, उन्हें सैंटियागो ले आईं। वहाँ उन्होंने पाँच वर्ष चिली विश्वविद्यालय में यूनानी लोकसंस्कृति पढ़ाई और 1973 में, सैनिक तख़्तापलट से कुछ ही पहले, देश छोड़ा। एथेंस लौटकर वे 18 जनवरी 2009 को अपनी मृत्यु तक लिखती और अनुवाद करती रहीं।
कृतियाँ

स्त्रातिगोपुलू ने तीन रूपों में काम किया: गायिका, गीतकार-संगीतकार और लेखिका। उनकी सबसे प्रसिद्ध प्रस्तुतियाँ अत्तिक के गीत हैं, जैसे Ας ερχόσουν για λίγο (काश तुम थोड़ी देर के लिए आते) और Μαραμένα τα γιούλια (मुरझाए बनफ़्शे)। अत्तिक संगीत और बोल दोनों लिखते थे; दनाई का योगदान आवाज़ और गाने का ढंग था, यानी प्रस्तुति। 1930 और 1940 के दशकों के छपे हुए स्वरलिपि-पत्र, जो आज यूनानी साहित्यिक और ऐतिहासिक अभिलेखागार (ELIA) में रखे हैं, उन्हें उस दौर के कई हल्के गीतों की गायिका बताते हैं। उन्होंने अपने गीत भी रचे, यूनानी प्रेस के अनुसार लगभग 300, और यूनानी लोकगीत, यानी δημοτικά τραγούδια, भी गाए।
उनके लेखन में कविता-संग्रह Αντιδράσεις (प्रतिक्रियाएँ, 1960) और पुस्तक Αττίκ (अत्तिक, 1986) शामिल हैं, जो उस संगीतकार का चित्र है जिसे वे जानती थीं। चिली में विश्वविद्यालय ने उनकी Cantos de los griegos (यूनानियों के गीत, 1973) प्रकाशित की: स्वरलिपि, सुर-संगति की टिप्पणियों और पाठों के स्पेनिश अनुवाद के साथ यूनानी लोकगीत। उन्होंने पाब्लो नेरूदा की Alturas de Macchu Picchu (माचू पिच्चू की ऊँचाइयाँ) का यूनानी में अनुवाद किया, उनकी चार कविताओं को रिकॉर्ड Danai canta a Neruda (दनाई नेरूदा को गाती हैं) के लिए संगीतबद्ध किया, और बाद में उनकी Canto General और Estravagario का अनुवाद किया। अनुवाद शब्दों को एक भाषा से दूसरी भाषा में ले जाता है; प्रस्तुति किसी मौजूदा गीत को आवाज़ देती है। उनके काम में दोनों हैं।
आज के यूनान में विरासत
स्त्रातिगोपुलू को सबसे पहले उस आवाज़ के रूप में याद किया जाता है जो अत्तिक के गीतों को 1930 के दशक से लॉन्ग-प्लेइंग रिकॉर्डों के युग तक ले आई। पोपी मागुला-गाइतानू की 2002 की जीवनी का शीर्षक है Δανάη: Το αηδόνι του έρωτα (दनाई: प्रेम की बुलबुल)। चिली विश्वविद्यालय में उनकी 1960 के दशक की रिकॉर्डिंग आधुनिक यूनानी की कक्षाओं में इस्तेमाल हुईं, और वहाँ के यूनानी अध्ययन केंद्र ने अप्रैल 2009 में उनकी स्मृति में एक श्रवण-संध्या आयोजित की। ख़ुद आज़माइए: ऑनलाइन कुनादिस अभिलेखागार में उनका यूनानी नाम, Δανάη Στρατηγοπούλου, खोजिए, जो उन्हें यूनानी हल्के संगीत की परंपरा के गीतों से जोड़ता है, और एक छोटी रिकॉर्डिंग सुनिए। फिर अपना एक वाक्य लिखिए, जैसे Η φωνή είναι ήρεμη (आवाज़ शांत है), या कोई और विशेषण चुनिए। आपका वाक्य आवाज़ का वर्णन है; वह गीत के बोलों का अनुवाद नहीं है।
क्या आप जानते हैं?
- अत्तिक के साथ पहली यात्रा उन्होंने गायिका नहीं, पत्रकार के रूप में की थी।
- उनकी 1960 के दशक की रिकॉर्डिंग चिली विश्वविद्यालय में आधुनिक यूनानी की कक्षाओं में इस्तेमाल हुईं।
- सैंटियागो में रहने वाली उनकी बाँसुरी-वादिका बहन मीरका ने उनकी चिली यात्रा को प्रेरित किया।
- उन्होंने कविताओं का स्पेनिश से यूनानी में और यूनानी लोकगीतों का स्पेनिश में अनुवाद किया।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Ας ερχόσουν για λίγο | काश तुम थोड़ी देर के लिए आते — उनकी प्रस्तुति में अत्तिक का गीत | ? |
| Αντιδράσεις | प्रतिक्रियाएँ — कविताएँ | 1960 |
| Cantos de los griegos | यूनानियों के गीत — स्पेनिश अनुवाद सहित यूनानी लोकगीत | 1973 |
| Danai canta a Neruda | दनाई नेरूदा को गाती हैं — नेरूदा की कविताओं पर उनके संगीत का रिकॉर्ड | ? |
| Αττίκ | अत्तिक — संगीतकार पर पुस्तक | 1986 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Ήταν ολόκληρος κόσμος γεμάτος μουσική ο άνθρωπος αυτός.
Ítan olókliros kósmos gemátos mousikí o ánthropos aftós.
वह व्यक्ति संगीत से भरी एक पूरी दुनिया था।















































