जीवन
ओलिया लाज़ारिदू (Olia Lazaridu भी लिखा जाता है) का जन्म एथेंस में हुआ। उन्होंने कारोलोस कून द्वारा स्थापित कला रंगमंच, थियात्रो तेख़्निस, के नाट्य विद्यालय में अभिनय सीखा और बाद में पेरिस में फ़्रांसीसी निर्देशक आंत्वान वितेज़ से कक्षाएँ लीं। मंच की एक आरंभिक स्मृति उन्हें यूनानी रंगमंच के एक बड़े नाम से जोड़ती है: 1978 में एली लांबेती की प्रस्तुति Έξι μονόπρακτα (छह एकांकी) में उनकी एक मूक भूमिका थी। चालीस से अधिक वर्ष बाद इसी अनुभव ने एक नई प्रस्तुति को प्रेरित किया।
उनका फ़िल्मी सफ़र नए यूनानी सिनेमा के वर्षों में शुरू हुआ। उन्होंने निकोस निकोलाइदिस की Τα κουρέλια τραγουδάνε ακόμα (चिथड़े अब भी गाते हैं, 1979) में वेरा की भूमिका निभाई और Το στίγμα (कलंक, 1982) में मुख्य भूमिका की। कलंक, तेरिरेम और जुनून का महादूत में उनके अभिनय को पुरस्कार मिले। 2012 में उन्हें Παράδεισος (स्वर्ग, 2011) के लिए यूनानी फ़िल्म अकादमी का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार मिला।
रंगमंच में उन्होंने लेफ़्तेरिस वोयात्ज़िस, थियोदोरोस तेरज़ोपूलोस, वासिलिस पापावासिलियू और आंजेला ब्रूस्कू जैसे निर्देशकों के साथ काम किया है। 2008 में उन्होंने एथेंस फ़ेस्टिवल में ब्रेष्ट की एक प्रस्तुति के लिए नाट्य समूह 18 Μποφώρ (18 बोफ़ोर्ट) का समन्वय किया, जो 18 Άνω उपचार कार्यक्रम पूरा कर चुके लोगों से बना था। उन्होंने पोतामोस प्रकाशन से छोटी कविताओं की एक छोटी किताब Τα δύσκολα εύκολα (कठिन, आसान) भी प्रकाशित की है।
कृतियाँ
लाज़ारिदू का काम सिनेमा, रंगमंच और निर्देशन के बीच चलता है। सिनेमा में वे अभिनेताओं की उस पीढ़ी से हैं जिसने 1970 और 1980 के दशक के नए यूनानी सिनेमा को आकार दिया। बाद की फ़िल्मों में Πριν το τέλος του κόσμου (दुनिया के अंत से पहले, 1996) और स्वर्ग हैं, वह भूमिका जिसने उन्हें अकादमी पुरस्कार दिलाया।
मंच पर वे अक्सर ऐसे पाठ चुनती हैं जो आवाज़ पर टिके हों। दिसंबर 2016 में उन्होंने एथेंस के Bios सांस्कृतिक स्थल पर सिल्विया लियूलियू के निर्देशन में सैमुएल बेकेट के Ευτυχισμένες μέρες (सुखी दिन) में ज़मीन में दबी स्त्री की भूमिका निभाई: मिट्टी में फँसी एक स्त्री जो एक और “सुखी दिन” बिताने की कोशिश में लगभग बिना रुके बोलती रहती है। 2017 में उन्होंने दिमित्रिस कातालेइफ़ोस के साथ Φωνές (आवाज़ें) में अभिनय किया, जो हैरल्ड पिंटर की छोटी एकांकियों से बनी प्रस्तुति थी और जिसका निर्देशन मानोस करात्ज़ोयानिस ने किया। 2020 में योर्गोस नानूरिस ने एथेंस के संगीत भवन मेगारोन में उन्हें Έξι φορές (छह बार) में निर्देशित किया: स्ट्रिंडबर्ग, चेख़व, कोक्तो और शेक्सपियर के पाठों की एक शाम, जो लांबेती की 1978 की प्रस्तुति से प्रेरित थी।
निर्देशिका के रूप में उन्होंने 2021 में पीरियस के नगर रंगमंच के ओमेगा मंच पर लेखक की 200वीं जयंती के अवसर पर दोस्तोयेव्स्की का Έγκλημα και τιμωρία (अपराध और दंड) प्रस्तुत किया। उनकी पहले की प्रस्तुतियों में पापादियामांतिस का Ο γάμος του Καραχμέτη (करख़मेतिस का विवाह) और Άσμα ασμάτων (गीतों का गीत) शामिल हैं। उन्होंने अभिनय, निर्देशन और लेखन को एक ही चीज़ तक पहुँचने के अलग-अलग रास्ते बताया है।
आज के यूनान में विरासत
लाज़ारिदू उस पीढ़ी से हैं जिसने नए यूनानी सिनेमा को प्रयोगधर्मी रंगमंच से जोड़ा, और वे आज भी अभिनय, निर्देशन और लेखन करती हैं। यूनानी सीखने वालों के लिए उनकी एक मंच-भूमिका वर्णन का अच्छा पहला अभ्यास है। सुखी दिन की उस स्त्री की कल्पना कीजिए: वह मिट्टी में है, चल नहीं सकती, पर बोलती है। इस पेज के पाठ की मदद से वर्तमान काल में तीन छोटे वाक्य लिखिए: Η ηρωίδα είναι στο χώμα. Δεν περπατάει. Μιλάει πολύ. (नायिका मिट्टी में है। वह नहीं चलती। वह बहुत बोलती है।) फिर किसी साथी से पूछिए Ποιος μιλάει; (कौन बोल रहा है?) और एक नाम से उत्तर दीजिए। ये हमारे अपने अभ्यास-वाक्य हैं, नाटक की पंक्तियाँ नहीं।
क्या आप जानते हैं?
- 1978 में एली लांबेती की छह एकांकी में उनकी एक मूक भूमिका थी।
- उन्होंने पेरिस में आंत्वान वितेज़ से अभिनय की कक्षाएँ लीं।
- उनकी फ़िल्मी भूमिकाओं को पुरस्कार मिले हैं, जिनमें यूनानी फ़िल्म अकादमी का पुरस्कार भी शामिल है।
- उन्होंने छोटी कविताओं की किताब Τα δύσκολα εύκολα (कठिन, आसान) लिखी है।
प्रमुख कृतियाँ
| यूनानी शीर्षक | शीर्षक | वर्ष |
|---|---|---|
| Τα κουρέλια τραγουδάνε ακόμα | चिथड़े अब भी गाते हैं — फ़िल्म, वेरा के रूप में | 1979 |
| Το στίγμα | कलंक — फ़िल्म | 1982 |
| Πριν το τέλος του κόσμου | दुनिया के अंत से पहले — फ़िल्म | 1996 |
| Παράδεισος | स्वर्ग — फ़िल्म, यूनानी फ़िल्म अकादमी पुरस्कार | 2011 |
| Ευτυχισμένες μέρες | बेकेट का सुखी दिन — मंच भूमिका | 2016 |
| Έγκλημα και τιμωρία | अपराध और दंड — निर्देशिका के रूप में | 2021 |
याद रखने लायक एक पंक्ति
Όταν παίζεις στο θέατρο, ο εαυτός σου δε σου ανήκει ολότελα.
Ótan pézis sto théatro, o eaftós su de su aníki olótela.
जब तुम रंगमंच पर अभिनय करते हो, तो तुम्हारा अपना आप पूरी तरह तुम्हारा नहीं रहता।





























































