
पार्थेनन मार्बल्स क्या हैं?
पार्थेनन 447 से 432 ईसा पूर्व के बीच एथेंस की देवी एथेना के लिए बनाया गया था। इसे सफ़ेद संगमरमर (μάρμαρον) की मूर्तियों (γλυπτά) से सजाया गया था, जिन्हें मूर्तिकार फ़िडियस (Φειδίας) के नेतृत्व में एक दल ने बनाया था। ये तीन तरह की थीं:
- पेडिमेंट (ἀετώματα), छत के दोनों सिरों पर बड़ी मूर्तियों से भरे दो त्रिकोण;
- मेटोप (μετόπαι), बाहरी स्तंभों के ऊपर लगे चौकोर नक्काशीदार पैनल;
- फ़्रीज़ (ζῳοφόρος), लगभग 160 मीटर लंबी नक्काशीदार पट्टी, जिसमें एक बड़ी शोभायात्रा दिखाई गई थी।
इनमें से ज़्यादातर मूर्तियाँ अलग कलाकृतियाँ नहीं थीं: इन्हें इमारत के ही हिस्सों के रूप में तराशा गया था। इस विवाद में यह बात बहुत मायने रखती है।
अंग्रेज़ी में इन्हें अक्सर “Elgin Marbles” कहा जाता है, उस आदमी के नाम पर जो इन्हें ब्रिटेन ले गया। ब्रिटिश म्यूज़ियम इन्हें “Parthenon Sculptures” कहता है। यूनान में इन्हें «τα Γλυπτά του Παρθενώνα», यानी “पार्थेनन की मूर्तियाँ” कहा जाता है, हालाँकि पुराना नाम «Ελγίνεια μάρμαρα» आज भी शब्दकोशों में मिलता है। कोई कौन-सा नाम चुनता है, इससे अक्सर पता चलता है कि वह किस पक्ष में है।
एक्रोपोलिस से लंदन तक
1687 में वेनिस की सेना की घेराबंदी के दौरान पार्थेनन के अंदर रखा बारूद फट गया और मंदिर का बड़ा हिस्सा गिर गया। कई मूर्तियाँ टूट गईं या खंडहरों में पड़ी रहीं। लगभग 1800 में एथेंस उस्मानी (ऑटोमन) साम्राज्य का हिस्सा था। थॉमस ब्रूस, यानी लॉर्ड एल्गिन, कुस्तुंतुनिया (आज का इस्तांबुल) में ब्रिटेन के राजदूत थे। 1801 से 1805 के बीच उनके लोग उस समय बची मूर्तियों में से लगभग आधी ले गए। कुछ खंडहरों से उठाई गईं; फ़्रीज़ के कई पत्थरों से मज़दूरों ने सिर्फ़ नक्काशीदार सामने का हिस्सा आरी से काट लिया, ताकि उन्हें ले जाना आसान हो।
एल्गिन का कहना था कि उनके पास उस्मानी सरकार की अनुमति थी, एक दस्तावेज़ जिसे फ़रमान कहते हैं। इसमें ठीक-ठीक किस बात की अनुमति थी, और क्या इसमें इमारत से मूर्तियाँ उतारने की अनुमति थी, यह आज असहमति का एक मुख्य मुद्दा है।
संगमरमर को ब्रिटेन ले जाने में एल्गिन का पैसा डूब गया। 1816 में हाउस ऑफ़ कॉमन्स की एक समिति ने जाँच की कि उन्होंने ये मूर्तियाँ कैसे हासिल कीं, और इन्हें 35,000 पाउंड में ख़रीदने की सिफ़ारिश की, जो उनकी उम्मीद से बहुत कम था। संसद ने मंज़ूरी दी और संग्रह ब्रिटिश म्यूज़ियम में चला गया, जहाँ वह आज भी प्रदर्शित है। 1963 से एक क़ानून, ब्रिटिश म्यूज़ियम एक्ट, म्यूज़ियम के ट्रस्टियों (Trustees) को केवल कुछ ख़ास मामलों में ही वस्तुएँ देने की अनुमति देता है, जैसे दोहरी प्रतियाँ या इतनी क्षतिग्रस्त वस्तुएँ कि उन्हें रखा न जा सके।
ब्रिटिश म्यूज़ियम का पक्ष
ब्रिटिश म्यूज़ियम का संचालन ट्रस्टियों (Trustees) का एक बोर्ड करता है। उनके आधिकारिक बयान के मुख्य बिंदु ये हैं:
- लॉर्ड एल्गिन ने उस समय के एथेंस और लंदन के क़ानूनी अधिकारियों की जानकारी और अनुमति से काम किया, और 1816 में संसद की समिति ने उनके काम को क़ानूनी पाया।
- मूर्तियों का जो हिस्सा बचा है, उसका लगभग आधा एथेंस में है। इन्हें दो बड़े संग्रहालयों में बाँटने से जनता को लाभ होता है, क्योंकि दोनों एक अलग पर एक-दूसरे की पूरक कहानी सुनाते हैं: एथेंस में शहर का इतिहास, लंदन में दुनिया की संस्कृतियों का इतिहास।
- म्यूज़ियम, जहाँ प्रवेश मुफ़्त है, कहता है कि वह मूर्तियाँ उधार देने के अनुरोध पर विचार करेगा, लेकिन उधार लेने वाले को मानना होगा कि वे ट्रस्टियों की हैं।
1963 का क़ानून भी तय करता है कि ट्रस्टी क्या कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में म्यूज़ियम के नेतृत्व ने यूनान के साथ एक नई “पार्थेनन साझेदारी” की बात की है, और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की ख़बरें आई हैं। 2025 में ट्रस्टियों ने दर्ज किया कि कोई भी साझेदारी म्यूज़ियम को चलाने वाले क़ानूनी ढाँचे के अनुरूप होनी चाहिए, और ब्रिटिश सरकार कह चुकी है कि वह इस ढाँचे को नहीं बदलेगी।
यूनान का पक्ष
यूनान केवल मूर्तियों की वापसी (ἐπιστροφή) नहीं, बल्कि एथेंस में उनके पुनर्मिलन (επανένωση) की माँग करता है। यूनानी सरकार का तर्क है कि:
- ये मूर्तियाँ एक ही स्मारक के हिस्से हैं, और इन्हें पार्थेनन के सामने एक साथ देखा जाना चाहिए, ताकि पूरी कृति को एक इकाई के रूप में समझा जा सके;
- इन्हें उतारने से इमारत को नुक़सान हुआ, और एल्गिन के फ़रमान ने इसे क़ानूनी नहीं बनाया: 2024 में संस्कृति मंत्री लीना मेंडोनी ने कहा कि किसी भी उस्मानी फ़रमान ने एल्गिन को मूर्तियों के साथ वैसा बर्ताव करने की अनुमति नहीं दी जैसा उन्होंने किया;
- यूनान ट्रस्टियों के स्वामित्व को नहीं मानता, इसलिए वह इन शर्तों पर उधार स्वीकार नहीं करेगा।
आधुनिक अभियान अभिनेत्री और संस्कृति मंत्री मेलिना मर्कुरी (Μελίνα Μερκούρη) ने शुरू किया, जिन्होंने 1982 में मेक्सिको सिटी में यूनेस्को के एक सम्मेलन में मूर्तियों की वापसी की माँग की। 2009 से नया एक्रोपोलिस संग्रहालय फ़्रीज़ को उसके मूल क्रम में दिखाता है, और लंदन में मौजूद टुकड़ों की जगह प्लास्टर की प्रतिकृतियाँ लगी हैं। यूनान यह मामला सांस्कृतिक संपदा की वापसी से जुड़ी यूनेस्को की एक समिति के सामने भी ले गया है, जिसने दोनों देशों से इसे सुलझाने को कहा है। दूसरी जगहों पर रखे छोटे टुकड़े लौट आए हैं, 2022 में पालेर्मो से और 2023 में वैटिकन से।
मुख्य तिथियाँ
- 447–432 BCपार्थेनन और उसकी मूर्तियाँ बनती हैं।
- 1687वेनिस की घेराबंदी में मंदिर में रखा बारूद फट जाता है।
- 1801–1805लॉर्ड एल्गिन के लोग बहुत-सी मूर्तियाँ ले जाते हैं।
- 1816संसद 35,000 पाउंड में संग्रह को ब्रिटिश म्यूज़ियम के लिए ख़रीदती है।
- 1963ब्रिटिश म्यूज़ियम एक्ट तय करता है कि ट्रस्टी क्या दे सकते हैं।
- 1982मेलिना मर्कुरी यूनेस्को के एक सम्मेलन में मूर्तियों की वापसी माँगती हैं।
- 2009एथेंस में नया एक्रोपोलिस संग्रहालय खुलता है।
आठ शब्द, तब और अब
| प्राचीन यूनानी | आज की यूनानी | अर्थ |
|---|---|---|
| मूर्ति | ||
| संगमरमर | ||
| वापसी, लौटाना (पहले “मोड़”) | ||
| संग्रहालय (पहले म्यूज़ों का मंदिर) | ||
| प्लास्टर प्रतिकृति, नक़ल | ||
| फ़्रीज़ (नक्काशीदार पट्टी) | ||
| चौकोर नक्काशीदार पैनल | ||
| ऊपरी नगर, गढ़ |